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Iran Israel War Impact On Delhi In Surplus Market: ईरान-इजरायल संकट की वजह से देश का सबसे बड़ा सरप्लस मार्केट ठप हो गया है. दुकानदारों का कहना है कि ग्राहक 70% कम हो गए हैं और जो पुराने कपड़े पहले सस्ते मिलते थे, उनके रेट 40% तक बढ़ चुके हैं. आखिर क्यों युद्ध की आग में झुलस रहा है भारत का यह कपड़ों का कारोबार? पढ़ें पूरी ग्राउंड रिपोर्ट.
नई दिल्ली: ईरान और इजरायल के बीच जारी भीषण संघर्ष की तपिश अब दिल्ली के गलियारों तक पहुंच चुकी है. जहां पूरी दुनिया ऊर्जा संकट और तेल-गैस की कीमतों को लेकर चिंतित है. वहीं इसका एक बेहद अप्रत्याशित और गहरा असर भारत के सबसे बड़े ओल्ड सरप्लस कपड़ा बाजार पर पड़ा है. दिल्ली का प्रसिद्ध आजाद मार्केट जो कभी खरीदारों की भीड़ से गुलजार रहता था. आज वहां सन्नाटा पसरा है. जानिए वहां के दुकानदार क्या कहते हैं?
मिडल ईस्ट से सप्लाई चेन टूटी, बाजार हुआ साफ
बाजार में पिछले 20 वर्षों से काम कर रहे व्यापारी विक्की ने लोकल 18 को वर्तमान स्थिति की भयावहता बताई. उन्होंने कहा कि आज आप मार्केट में साफ देख सकते हैं कि जहां पैर रखने की जगह नहीं होती थी. वहां अब केवल खाली सड़कें दिख रही हैं. व्यापारियों के अनुसार सप्लाई चेन का गणित पूरी तरह बिगड़ चुका है. दरअसल यूरोप और अन्य देशों से आने वाले पुराने कपड़े सबसे पहले मिडल ईस्ट (विशेषकर दुबई) पहुंचते हैं. वहां की फैक्ट्रियों में इनकी छंटाई, सफाई और पैकिंग होने के बाद ये भारत आते हैं. चूंकि अभी पूरा मिडल ईस्ट युद्ध की चपेट में है. वहां से सप्लाई पूरी तरह कट गई है. इसका नतीजा यह है कि बाजार में 60 से 70 फीसदी ग्राहकों की कमी आई है. इसके साथ डिमांड में भारी गिरावट दर्ज की गई है.
पुराने कपड़ों के रेट में 40% तक उछाल
सप्लाई रुकने का सीधा असर कीमतों पर पड़ा है. जो पुराने कपड़े अपनी किफायती दरों के लिए जाने जाते थे. उनके दाम 30% से 40% तक बढ़ चुके हैं. विक्की बताते हैं कि जो लेडीज शर्ट पहले 120 से 130 रुपये प्रति किलो मिलती थी, उसकी कीमत अब बढ़कर 200 से 225 रुपए प्रति किलो तक पहुंच गई है. कीमतों में इस उछाल की वजह से दूसरे राज्यों से आने वाले थोक व्यापारी अब दिल्ली का रुख नहीं कर रहे हैं.
लेबर का पलायन, गैस और रोजगार का संकट
बाजार केवल ग्राहकों से ही नहीं बल्कि लेबर से भी खाली हो चुका है. व्यापारियों का कहना है कि काम ठप होने की वजह से मजदूरों के पास कोई रोजगार नहीं बचा है. इसके अलावा, दिल्ली में गहराते ऊर्जा संकट के कारण गैस सिलेंडर मिलना दूभर हो गया है. जिससे मजदूरों के लिए दो वक्त का खाना जुटाना भी मुश्किल हो रहा है. थक-हारकर ज्यादातर लेबर अपने पैतृक राज्यों की ओर पलायन कर चुके हैं.
उम्मीद की किरण
बाजार के खालीपन को कैमरों में कैद करते हुए यह साफ दिखता है कि ग्लोबल वॉर का असर स्थानीय रेहड़ी-पटरी और छोटे व्यापारियों की कमर तोड़ रहा है. फिलहाल आजाद मार्केट के दुकानदारों को केवल इस बात की उम्मीद है कि मिडल ईस्ट के हालात जल्द सुधरेंगे और सप्लाई चेन बहाल होगी. ताकि इस एशिया प्रसिद्ध मार्केट की रौनक वापस लौट सके.
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मैंने अपने 12 वर्षों के करियर में इलेक्ट्रॉनिक, प्रिंट और डिजिटल मीडिया में काम किया है। मेरा सफर स्टार न्यूज से शुरू हुआ और दैनिक भास्कर, दैनिक जागरण, दैनिक भास्कर डिजिटल और लोकल 18 तक पहुंचा। रिपोर्टिंग से ले…और पढ़ें
