कॉमेडी का खजाना हैं संजय दत्त की 8 फिल्में, हंस-हंसकर हो जाएंगे लोटपोट, पहले और दूसरे नंबर वाली बनीं सबकी फेवरेट

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एक्शन और सीरियस किरदारों में लोहा मनवाने वाले संजय दत्त जब कॉमेडी के मैदान में उतरते हैं, तो अच्छे-अच्छे दिग्गजों की छुट्टी कर देते हैं. उनका देसी स्वैग और उनकी नेचुरल कॉमिक टाइमिंग दर्शकों को हंसने पर मजबूर कर देती है. इस खास लिस्ट में हम लाए हैं संजय दत्त की वो 8 बेहतरीन फिल्में, जो कॉमेडी का असली खजाना हैं. खास तौर पर पहले और दूसरे नंबर वाली फिल्मों ने तो सफलता के सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए और आज भी फैंस की पहली पसंद बनी हुई हैं.

नई दिल्ली. संजय दत्त का नाम सुनते ही जेहन में डरावने विलेन की छवि उभरती है, लेकिन उनकी कॉमेडी का भी अपना एक अलग ही स्वैग है. उनकी कॉमिक टाइमिंग इतनी नेचुरल है कि वह स्क्रीन पर बिना ज्यादा मेहनत किए ही दर्शकों को लोटपोट कर देते हैं. आज हम आपको उन 8 कॉमेडी फिल्मों के बारे में बताते हैं, जिन्होंने यह साबित कर दिया कि संजय दत्त बड़े पर्दे पर अपने हुनर के जरिए हंसी के ठहाके लगवाना भी बखूबी जानते हैं.

मुन्ना भाई एमबीबीएस: यह फिल्म संजय दत्त के करियर का टर्निंग पॉइंट मानी जाती है. इसमें उन्होंने एक ऐसे गुंडे का किरदार निभाया जो अपने पिता का सपना पूरा करने के लिए डॉक्टर बनने मेडिकल कॉलेज पहुंच जाता है. फिल्म में उनका जादू की झप्पी वाला डायलॉग और सर्किट (अरशद वारसी) के साथ केमिस्ट्री ने इतिहास रच दिया. यह फिल्म आज भी तनाव दूर करने की सबसे अच्छी दवा मानी जाती है.

लगे रहो मुन्ना भाई : मुन्ना भाई सीरीज की इस दूसरी कड़ी में संजय दत्त ने गांधीगीरी का नया कॉन्सेप्ट पेश किया. इस फिल्म में मुन्ना को महात्मा गांधी दिखने लगते हैं, जिसके बाद वह डंडे के बजाय अहिंसा से लोगों की समस्याएं सुलझाता है. संजू बाबा ने इस गंभीर विषय को इतने मजाकिया और सरल अंदाज में पेश किया कि यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर ब्लॉकबस्टर साबित हुई.

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ऑल द बेस्ट- फन बिगेन्स: रोहित शेट्टी के निर्देशन में बनी इस फिल्म में संजय दत्त ने धरम कपूर का किरदार निभाया था. फिल्म की कहानी कन्फ्यूजन और गलतफहमियों पर आधारित है, जहां संजय दत्त का सीरियस लेकिन फनी अंदाज दर्शकों को खूब पसंद आया. अजय देवगन और फरदीन खान जैसे कलाकारों के साथ उनकी जुगलबंदी ने इस फिल्म को एक कंपलीट कॉमेडी पैकेज बना दिया.

धमाल: इस कल्ट कॉमेडी फिल्म में संजय दत्त एक चालाक पुलिस इंस्पेक्टर कबीर नायक की भूमिका में नजर आए थे. फिल्म की कहानी चार दोस्तों और एक छिपे हुए खजाने के इर्द-गिर्द घूमती है. संजय दत्त जिस तरह से पूरी फिल्म में उन चारों दोस्तों (रितेश, अरशद, जावेद और आशीष) को परेशान करते हैं और अंत में खुद फंसते हैं, वह वाकई देखने लायक है.

हसीना मान जाएगी: गोविंदा और संजय दत्त की यह जोड़ी 90 के दशक की सबसे मजेदार जोड़ियों में से एक थी. डेविड धवन की इस फिल्म में संजय दत्त ने गोविंदा के बड़े भाई का रोल निभाया था. दोनों भाइयों की शरारतें, उनके पिता (कादर खान) को परेशान करना और करिश्मा कपूर-पूजा बत्रा के साथ रोमांस आज भी दर्शकों को हंसने पर मजबूर कर देता है.

जोड़ी नं. 1: एक बार फिर गोविंदा और संजय दत्त ने इस फिल्म में कमाल कर दिया. फिल्म के गाने हों या संजू बाबा का देसी अंदाज, हर चीज में जबरदस्त कॉमेडी का तड़का लगा है. इस फिल्म ने साबित किया कि संजू बाबा हर तरह के रोल में फिट हैं. इसमे गोविंदा के साथ संजय दत्त की जोड़ी ने धमाल मचा दिया है. रिलीज के बाद यह मूवी दर्शकों के बीच काफी चर्चा में रही.

वाह लाइफ हो तो ऐसी: इस फिल्म में संजय दत्त ने मॉडर्न यमराज का किरदार निभाकर सबका दिल जीत लिया था. फिल्म में जब वह शाहिद कपूर की मौत के बाद उनका फैसला करने आते हैं, तो धीरे-धीरे उनके जीवन के इमोशनल ड्रामे में खुद भी बह जाते हैं. संजू बाबा का यह यमराज पुराने डरावने रूप से बिल्कुल अलग, सूट-बूट और लग्जरी कारों वाला था. उनकी शानदार कॉमिक टाइमिंग और भावुक अंदाज ने इस फंतासी फिल्म में एक अलग ही जान फूंक दी थी.

एक और एक ग्यारह: डेविड धवन के निर्देशन में बनी ‘एक और एक ग्यारह’ संजय दत्त और गोविंदा की जोड़ी की सबसे यादगार कॉमेडी फिल्मों में से एक है. इसमें संजू ने तारा और गोविंदा ने सितारा का किरदार निभाया है, जो दो शातिर लेकिन मजेदार चोर होते हैं. फिल्म की असली जान दोनों ट्यूनिंग और उनके बीच के मजाकिया डायलॉग्स हैं.

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