LBSNAA में ट्रेनिंग, JNU से डिग्री, पोस्टिंग से पहले IAS अफसरों को बेलने पड़ते हैं कई पापड़

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IAS Officers LBSNAA Training: क्या आप जानते हैं कि मसूरी में स्थित LBSNAA में कठिन ट्रेनिंग पूरी करने के बाद देश के आईएएस अफसरों को एक खास मास्टर डिग्री भी मिलती है? यह डिग्री दिल्ली की मशहूर जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी (JNU) देती है. जानिए इसका नियम.

IAS Officers LBSNAA Training: आईएएस अफसरों को जेएनयू का डिग्री कोर्स भी पूरा करना होता है

नई दिल्ली (IAS Officers LBSNAA Training). संघ लोक सेवा आयोग की सिविल सेवा परीक्षा देश की सबसे कठिन परीक्षाओं में से एक है. इसे पास करने के बाद देश के होनहार युवा मसूरी स्थित ‘लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासन अकादमी’ (LBSNAA) में ट्रेनिंग लेते हैं. यहां अफसरों को देश चलाने के तौर-तरीके, कानून और प्रशासनिक बारीकियां सिखाई जाती हैं. क्या आप जानते हैं कि 2 साल की बेहद कठिन ट्रेनिंग को सफलतापूर्वक पूरा करने के बाद आईएएस अफसरों को बाकायदा ‘मास्टर्स डिग्री’ भी मिलती है?

पहाड़ों की रानी मसूरी में होने वाली आईएएस ट्रेनिंग की डिग्री का कनेक्शन देश की सबसे चर्चित और प्रतिष्ठित दिल्ली की ‘जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी’ (JNU) से है. एलबीएसएनएए (LBSNAA) से पास आउट होने वाले हर डायरेक्ट रिक्रूट आईएएस अधिकारी को जेएनयू की तरफ से खास पोस्ट ग्रेजुएशन डिग्री दी जाती है. जानिए आईएएस अधिकारियों को ट्रेनिंग के बाद कौन सी डिग्री दी जाती है और क्यों. सबसे रोचक बात है कि यह डिग्री आईपीएस या आईएफएस अधिकारी को नहीं मिलती है.

आईएएस अधिकारी को कौन सी डिग्री मिलती है?

मसूरी स्थित LBSNAA में 2 साल की इंडक्शन ट्रेनिंग पूरी करने के बाद आईएएस ऑफिसर ट्रेनीज को जेएनयू की एमए इन पब्लिक मैनेजमेंट की डिग्री दी जाती है. इस व्यवस्था की शुरुआत साल 2015 में जेएनयू की एग्जीक्यूटिव काउंसिल की मंजूरी के बाद हुई थी. इसका मकसद था कि सभी आईएएस अधिकारी अपनी दो साल की ट्रेनिंग के दौरान जो एकेडमिक और प्रैक्टिकल नॉलेज हासिल करते हैं, उसे ग्लोबल और शैक्षणिक मान्यता मिल सके.

जेएनयू का ’64 क्रेडिट’ वाला फॉर्मूला

जेएनयू की यह डिग्री पाना इतना आसान भी नहीं है. इसके लिए बकायदा कॉलेज की तरह पढ़ाई और परीक्षाएं देनी होती हैं. जेएनयू के नियमित कोर्सेस की तरह ही इस प्रोग्राम को भी 64 क्रेडिट्स में बांटा गया है, जो चार अलग-अलग सेमेस्टर्स में फैले होते हैं.

  • पहला सेमेस्टर (16 क्रेडिट): इसमें फाउंडेशन कोर्स के दौरान थ्योरी, लॉ और इकोनॉमिक्स की बुनियादी बातें सिखाई जाती हैं.
  • दूसरा सेमेस्टर (20 क्रेडिट): इसमें प्रशासनिक बारीकियां और भारत दर्शन (Winter Study Tour) शामिल होता है.
  • तीसरा सेमेस्टर (12 क्रेडिट): यह सबसे अहम है, जो एक साल की ‘डिस्ट्रिक्ट ट्रेनिंग’ (फील्ड पोस्टिंग) के दौरान पूरा होता है.
  • चौथा सेमेस्टर (16 क्रेडिट): ट्रेनिंग के आखिरी फेज-2 में जब अफसर वापस एकेडमी लौटते हैं तो अपने प्रैक्टिकल अनुभवों पर रिसर्च पेपर सौंपते हैं, जिसके बाद यह कोर्स पूरा होता है.

सिर्फ IAS अफसर को ही डिग्री क्यों दी जाती है?

LBSNAA के ‘फाउंडेशन कोर्स’ में आईएएस के साथ-साथ आईपीएस (IPS) और आईएफएस (IFS) जैसी अन्य सेवाओं के अधिकारी भी हिस्सा लेते हैं. लेकिन दो साल की ‘एमए इन पब्लिक मैनेजमेंट’ की डिग्री सिर्फ और सिर्फ आईएएस कैडर के अधिकारियों के लिए ही आरक्षित है. इसका कारण है कि अन्य सेवाओं के अधिकारी शुरुआती कुछ हफ्तों के बाद अपने-अपने स्टाफ कॉलेजों (जैसे हैदराबाद की पुलिस अकादमी) में चले जाते हैं, जबकि आईएएस अधिकारी पूरे 2 साल तक इस सैंडविच पैटर्न वाले कोर्स का हिस्सा बने रहते हैं.

जेएनयू ही क्यों देता है यह डिग्री?

जेएनयू का देश के कई प्रतिष्ठित संस्थानों के साथ पुराना नाता है. उदाहरण के लिए, नेशनल डिफेंस एकेडमी (NDA), इंडियन मिलिट्री एकेडमी (IMA) और काउंसिल ऑफ साइंटिफिक एंड इंडस्ट्रियल रिसर्च (CSIR) के तहत होने वाली कई ट्रेनिंग और कोर्सेस को भी जेएनयू ही एकेडमिक मान्यता और डिग्रियां देता है. इसी कड़ी में देश के नीति-निर्माताओं यानी आईएएस को भी इसके तहत जोड़ा गया है. तो अगली बार जब आप किसी आईएएस अफसर को देखें तो समझ जाएं कि वह सिर्फ सिविल सेवा परीक्षा पास करके नहीं आया, बल्कि वह पब्लिक मैनेजमेंट का क्वॉलिफाइड मास्टर भी है!

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Deepali PorwalSenior Sub Editor

Deepali Porwal is a seasoned bilingual journalist with 11 years of experience in the media industry. She currently works with News18 Hindi, focusing on the Education and Career desk. She is known for her versat…और पढ़ें

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