एक घर दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे की राह में बना रोड़ा, 12,000 करोड़ के एक्सप्रेसवे पर भारी पड़ रहा किसान

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Delhi-Dehradun Expressway News Update: दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे देश के बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स में से एक है, लेकिन मंडोला का यह 28 साल पुराना विवाद इसके सामने बड़ी चुनौती बन गया है. जब तक इस कानूनी विवाद का समाधान नहीं होता, तब तक एक्सप्रेसवे का यह हिस्सा पूरी तरह सुचारू रूप से काम नहीं कर पाएगा. आइए जानते हैं पूरा मामला…

एक घर बन रहा है दिल्ली देहरादून एक्सप्रेसवे में रोड़ा.

Delhi Dehradun Expressway: दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे का काम लगभग पूरा हो चुका है. आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस परियोजना का उद्घाटन किया. इसके साथ ही उत्तर भारत के इंफ्रास्ट्रक्चर मैप पर एक बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है. अब बस ढाई घंटे में दिल्ली से देहरादून पहुंचा जा सकेगा. मगर, इस पूरे एक्सप्रेसवे के निर्माण काम के रास्ते में एक बड़ा रोड़ा सामने आया है. दरअसल, लोनी के मंडोला गांव में स्थित एक दो-मंजिला मकान इस परियोजना के रास्ते में रुकावट बनता दिख रहा है. अब आप सोच रहे होंगे कि ऐसा क्या ही हो गया. आइए जानते हैं.

दो मंजिला मकान बना रोड़ा
गाजियाबाद के लोनी के मंडोला गांव में एक दो-मंजिला मकान बना हुआ है. ये एक्सप्रेसवे के रैंप (Ramp) के बीच में खड़ा है, जिसकी वजह से प्रोजेक्ट का एक अहम हिस्सा अधूरा रह गया है. यह घर करीब 28 साल पुराना है और लंबे समय से कानूनी विवाद में फंसा हुआ है. इसी कारण एक्सप्रेसवे का मुख्य रैंप पूरी तरह तैयार नहीं हो पाया है, जिससे आने-जाने वाले वाहनों को परेशानी हो सकती है.

क्या है 28 साल पुरानी कहानी?
कहानी की शुरुआत होती है सन् 1998 में. उस समय उत्तर प्रदेश आवास विकास परिषद ने मंडोला हाउसिंग स्कीम के लिए जमीन अधिग्रहण का नोटिस जारी किया था. अधिकतर किसान तो मान गए. उन्होंने सरकार द्वारा तय मुआवजा स्वीकार कर लिया. मगर, वीरसेन सरोहा नाम के एक किसान हाई कोर्ट चले गए. उन्होंने अदालत में साफ कहा कि वो अपना घर नहीं देना चाहते हैं. इस पर कोर्ट ने उनके घर के अधिग्रहण पर रोक लगा दी. तब से यह मामला कोर्ट में लंबित है. अब इस केस की पैरवी उनके परिवार की नई पीढ़ी कर रही है और विवाद अभी तक सुलझ नहीं पाया है.

भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण को एक्सप्रेसवे का निर्माण पूरा करने के लिए इस जमीन की जरूरत है. हालांकि, कानूनी अड़चन के कारण काम अटक गया है. इस समस्या को हल करने के लिए NHAI ने घर के पीछे से एक वैकल्पिक सड़क (Alternative Road) बनानी शुरू कर दी है. दावा किया जा रहा था कि उद्घाटन से पहले यह सड़क तैयार कर दी जाएगी. हालांकि, यह नई सड़क मुख्य रैंप जितनी चौड़ी और सुविधाजनक नहीं होगी. इसे एक तरह की सर्विस रोड की तरह इस्तेमाल करना पड़ेगा, जिससे ट्रैफिक मैनेजमेंट पर असर पड़ सकता है.

यह होंगी समस्याएं

  1. मुख्य रैंप अधूरा रहने से देहरादून से आने वाले ट्रैफिक को नीचे उतरने में दिक्कत होगी.
  2. मंडोला के पास ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे और दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे का बड़ा इंटरचेंज है. इस रुकावट से सुगम कनेक्टिविटी प्रभावित हो सकती है.
  3. वैकल्पिक सर्विस रोड की चौड़ाई और क्षमता मुख्य एक्सप्रेसवे से काफी कम होगी.

मुआवजे को लेकर परिवार की मांग
घर के मालिक परिवार का कहना है कि उन्हें आज के बाजार रेट के हिसाब से मुआवजा मिलना चाहिए. पहले इस जमीन को अधिग्रहण से बाहर रखा गया था, लेकिन बाद में इसे एक्सप्रेसवे प्रोजेक्ट में शामिल कर लिया गया. परिवार का यह भी आरोप है कि जब मूल हाउसिंग प्रोजेक्ट ही शुरू नहीं हुआ, तो जमीन को किसी दूसरे प्रोजेक्ट के लिए देना गलत है. इस मामले में 2024 में सुप्रीम कोर्ट में भी सुनवाई हुई, जहां कोर्ट ने इलाहाबाद हाई कोर्ट को इस केस का जल्द फैसला करने का निर्देश दिया है.

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काव्‍या मिश्रा

Kavya Mishra is working with News18 Hindi as a Senior Sub Editor in the regional section (Uttar Pradesh, Uttarakhand, Haryana and Himachal Pradesh). Active in Journalism for more than 7 years. She started her j…और पढ़ें

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