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Noida Digital Fraud News: नोए़़डा में साइबर ठगों ने दिल्ली ब्लास्ट में सिम इस्तेमाल होने का डर दिखाकर एक परिवार को जाल में फंसा लिया. आरोपी ने खुद को सीबीआई अधिकारी बताकर फर्जी जांच शुरू की और दिल्ली हेडक्वार्टर से जारी अरेस्ट वॉरंट दिखाने का दावा किया. जांच में सहयोग के नाम पर तीनों को लगातार वीडियो कॉल पर बने रहने के लिए मजबूर किया गया. चौथे दिन आरोपियों ने कहा कि उनके बैंक खातों में जमा रकम वेरिफाई करने के लिए उसे एक बताये गये खाते में ट्रांसफर करना होगा.
नोएडा में साइबर ठगों ने परिवार को बनाया निशाना
नोएडा: सेक्टर 74 स्थित केपटाउन सोसायटी के टावर सीबी वन में कृषि मंत्रालय से रिटायर्ड एक महिला अधिकारी अपनी छोटी बहन जो शहरी विकास मंत्रालय से रिटायर्ड है और भांजी के साथ रहती हैं. भांजी एमबीबीएस के अंतिम वर्ष की छात्रा है. 6 अप्रैल को कृषि मंत्रालय से रिटायर्ड अधिकारी के पास एक अनजान नंबर से फोन आया. कॉल करने वाले ने खुद को सरकारी अधिकारी बताते हुए कहा कि उनके आधार कार्ड पर एक सिम खरीदी गई है. जिसका इस्तेमाल दिल्ली में लाल किला के सामने हुए ब्लास्ट के दौरान बातचीत के लिए किया गया. साथ ही उनके आधार और पैन कार्ड से एक बैंक खाता खोला गया. जिसमें पाकिस्तान से रकम भेजी गई और यह पैसा देश में आतंकी गतिविधियों में इस्तेमाल हुआ. आरोपियों ने व्हाट्सएप पर एक फर्जी बैंक स्टेटमेंट भी भेजा और इसके बाद महिला, उनकी बहन और भांजी को तथाकथित जांच के नाम पर डिजिटल अरेस्ट कर लिया.
आरोपी ने खुद को सीबीआई अधिकारी बताकर फर्जी जांच शुरू की और दिल्ली हेडक्वार्टर से जारी अरेस्ट वॉरंट दिखाने का दावा किया. जांच में सहयोग के नाम पर तीनों को लगातार वीडियो कॉल पर बने रहने के लिए मजबूर किया गया. चौथे दिन आरोपियों ने कहा कि उनके बैंक खातों में जमा रकम वेरिफाई करने के लिए उसे एक बताये गये खाते में ट्रांसफर करना होगा. इस बीच 10 अप्रैल को पड़ोसियों ने गौर किया कि पिछले 3-4 दिनों से फ्लैट से कोई आवाज या हलचल नहीं आ रही थी. संदेह होने पर एक पड़ोसी ने खिड़की की तरफ देखा, जहां से पीड़िता की बहन ने इशारों में बताया कि वे लोग परेशानी में है. जिसके बाद इस घटना की सारी जानकारी एओए को दी गई.
सूचना मिलते ही केपटाउन एओए अध्यक्ष प्रवीण भारद्वाज सिक्योरिटी ऑफिसर दिनेश दुबे के साथ फ्लैट पर पहुंचे. काफी देर तक दरवाजा न खुलने पर उन्होंने जबरन अंदर प्रवेश किया. अंदर पहुंचकर सिक्योरिटी ऑफिसर दिनेश दुबे ने तुरंत फोन डिस्कनेक्ट कराकर तीनों महिलाओं को डिजिटल अरेस्ट से मुक्त कराया.
इस दौरान साइबर ठगों ने करीब 3 लाख रुपये ट्रांसफर करा लिए थे. पीड़िता की छोटी बहन के खाते से 1 लाख रुपये ठगों के खाते में भेज दिए गए. मामले की जानकारी मिलते ही एओए के पूर्व अध्यक्ष अरुण शर्मा ने थाना सेक्टर-113 और पुलिस अधिकारियों को सूचना दी. पुलिस टीम तुरंत मौके पर पहुंची और बैंक से संपर्क कर करीब 2 लाख रुपये का ट्रांजैक्शन रुकवा दिया.
पुलिस ने पीड़ित महिलाओं से बैंक खातों की जानकारी लेकर आगे की जांच शुरू कर दी है. केपटाउन एओए अध्यक्ष ने सभी निवासियों से अपील की है कि डिजिटल अरेस्ट, वीडियो कॉल पर खुद को पुलिस या सीबीआई अधिकारी बताकर धमकाने वाले साइबर अपराधियों से सतर्क रहें. किसी भी सरकारी एजेंसी द्वारा वीडियो कॉल पर पूछताछ या पैसे की मांग नहीं की जाती. ऐसी किसी भी संदिग्ध कॉल को तुरंत काट दें और तुरंत पुलिस को सूचना दें.
पीड़ित महिला ने बताया कि आरोपी उनकी बेटी और बहन को ठीक से सोने तक नहीं देते थे. दिन-रात वीडियो कॉल पर बनाए रखते थे और लगातार डांट-फटकार कर मानसिक रूप से प्रताड़ित करते रहे. कई दिनों तक फ्लैट में कोई हलचल न होने पर पड़ोसियों को शक हुआ. एक पड़ोसी मच्छर मारने की दवा छिड़कने के बहाने घर पहुंचा. इसी दौरान पीड़िता की छोटी बहन कमरे से बाहर आई और पड़ोसी को बताया कि वे लोग गंभीर परेशानी में है.
महिला ने बताया कि उनका एक भतीजा वकील है. उसका नंबर देने के बाद ठगों ने उस भतीजे से भी बात करने की बात कही. वहीं, पीड़िता की बेटी दिल्ली की एक यूनिवर्सिटी से एमबीबीएस कर रही है और उसके अंतिम सेमेस्टर की परीक्षाएं चल रही थी. उसे भी रात में पढ़ाई के दौरान वीडियो कॉल पर बैठे रहने के लिए मजबूर करते थे. यहां तक कि जब वह परीक्षा देने निकलती, तब तक वीडियो कॉल जारी रहता और एग्जाम हॉल में प्रवेश करने तक उसे कॉल काटने की अनुमति नहीं दी जाती थी. इसके अलावा ठग पीड़िता और उनकी छोटी बहन से अलग-अलग फोन पर लगातार वीडियो कॉल के जरिए संपर्क में बने रहते थे. जिससे पूरा परिवार भारी मानसिक दबाव में रहा.
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काशी के बगल चंदौली से ताल्लुक रखते है. बिजेनस, सेहत, स्पोर्टस, राजनीति, लाइफस्टाइल और ट्रैवल से जुड़ी खबरें पढ़ना पसंद है. मीडिया में करियर की शुरुआत ईटीवी भारत हैदराबाद से हुई. अभी लोकल18 यूपी के कॉर्डिनेटर की…और पढ़ें
