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Delhi Oldest Watch Shop: दिल्ली के निजामुद्दीन में जावेद की सबसे पुरानी घड़ी की दुकान है. यहां दुकान में 1940 के दौर की सोना-चांदी और हीरे जड़ी करीब 200 पुरानी घड़ियां हैं. इसके अलावा महात्मा गांधी की पॉकेट घड़ी भी रखी है. इन घड़ियों की कीमत जानकर आप हैरान हो जाएंगे
नई दिल्ली: राजधानी दिल्ली की एक पुरानी गली में समय जैसे ठहर सा गया है. यहां एक ऐसी विरासत जिंदा है, जहां 1940 के दौर की बंद हो चुकी ब्रांडों की घड़ियां आज भी टिक-टिक कर रही हैं. सोना, चांदी और डायमंड जड़ी ये दुर्लभ घड़ियां न सिर्फ लाखों की कीमत रखती हैं. बल्कि इतिहास की सांसें भी अपने भीतर समेटे हुए हैं. इस दुकान के मालिक ने लखनऊ में अपने उस्ताद से घड़ियां रिपेयर करने की बारीकियां सीखीं और आज उसी हुनर के दम पर दिल्ली की सबसे पुरानी घड़ी दुकान समय को संभालकर बैठी है. यहां हर घड़ी एक कहानी कहती है. असल में यह दुकान नहीं, बल्कि पुरानी गाड़ियों का म्यूजियम कहलाता है. जो कि दिल्ली के निजामुद्दीन इलाके में है. इसका नाम जावेद ओल्ड स्विस वॉच हैं. इसके मालिक का नाम जावेद हुसैन खान है. जो कि दिल्ली के ही रहने वाले हैं.
1940 की सोना-चांदी और हीरे जड़ी हुई है घड़ी
दुकान के मालिक जावेद हुसैन खान ने बताया कि उन्होंने करीब 40 साल पहले दिल्ली के निजामुद्दीन इलाके में इस शोरूम को शुरू किया था. तब से लेकर आज तक इनके पास लोग पुरानी घड़ियां खरीदने और बेचने आते हैं. कई ऐसे लोग हैं, जिनके पास उनके दादा और पूर्वजों की घड़ियां मौजूद है. वो यहां पर इन गाड़ियों को बेच जाते हैं. उन्होंने बताया कि उनके पास 1940 के वक्त की 60 ग्राम 24 कैरेट सोने लगी हुई घड़ी भी मौजूद है, जिसकी कीमत वर्तमान में 12 लाख रुपए से कम नहीं है.
इसके अलावा एक सोना-चांदी और हीरे जड़ी हुई घड़ी भी उनके पास मौजूद है. जो कि रिपेयर के लिए आई है और यह भी लगभग 1940 के करीब की है. उस वक्त अंग्रेज और जो भारत के सबसे अमीर लोग होते थे. वो सोना-चांदी और हीरे जड़ी हुई घड़ी पहनना ही पसंद करते थे. उन्होंने बताया कि उनके पास 200 से ज्यादा पुरानी घड़ियां मौजूद हैं, जो अब मार्केट में अपना वजूद खो चुकी है, लेकिन जिनकी कीमत अब लाखों में है.
महात्मा गांधी की भी घड़ी मौजूद
जावेद हुसैन खान ने बताया कि महात्मा गांधी पॉकेट घड़ी अपने पास रखते थे. वह पॉकेट घड़ी भी इनके पास मौजूद है, जो अब बंद हो चुकी है. जिसको वह रिपेयर कर रहे हैं. इसके अलावा 1940 से लेकर 1945, 1935 और 1975 तक से लेकर 1970 तक की घड़ियां उनके पास मौजूद है. कुछ घड़ियां 1954 के वक्त की भी हैं. सभी घड़ियों की कीमत 30,000 रुपए से लेकर 12 लाख या 13 लाख रुपए तक है.
उन्होंने बताया कि उनके पास दीवार पर टांगने वाली बड़ी-बड़ी घड़ियां है. जो हर एक घंटे पर जोरदार घंटा बजा कर बताती थी कि कितना वक्त हुआ है. कई म्यूजिक वाली घड़ियां भी है. 1975 में भारत में पुरानीघड़ियों की मैन्युफैक्चरिंग बंद हो गई थी. इसलिए जापान की कंपनी की बंद हुई घड़ियां भी उनके पास आज तक मौजूद है. भारत में पहले घड़ियां जो बननी शुरू की थी. जो मेड इन इंडिया थी .वो भी इन्होंने सहेज कर रखे हुए हैं.
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बृजेंद्र प्रताप सिंह डिजिटल-टीवी मीडिया में (2021) लगभग 5 सालों से सक्रिय हैं. मेट्रो न्यूज 24 टीवी चैनल मुंबई, ईटीवी भारत डेस्क, दैनिक भास्कर डिजिटल डेस्क के अनुभव के साथ 14 मई 2024 से News.in में सीनियर कंटें…और पढ़ें
