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मजदूरों की मानें तो उनके साथ हर स्तर पर अमानवीय व्यवहार होता है. उन्हें न बीमारी की छुट्टी मिलती है और न ही कैजुअल लीव. जब भी वे कोई छुट्टी लेते हैं तो उनके छोटे से वेतन में से पैसा काट लिया जाता है ऐसे में परिवार का खर्च कैसे चलांए?
नोएडा में मजदूरों का प्रदर्शन जारी है. मजदूरों की मानें तो उन्हें न बीमारी की लीव मिलती है और न त्यौहारों की छुट्टी, वे क्या करें?
‘मैं पिछले तीन साल से इसी कंपनी में सिक्योरिटी गार्ड के रूप में काम कर रहा हूं. इन 3 सालों में मेरी सैलरी 3 हजार रुपये भी नहीं बढ़ी. लेकिन इससे भी ज्यादा खराब तब लगता है जब खुद के बीमार होने या घर में पत्नी-बच्चों के बीमार होने पर छुट्टी मांगों को लीव तो मिल जाती है लेकिन सैलरी से पैसा कट जाता है.’ नोएडा की एक बड़ी कंपनी में सिक्योरिटी गार्ड ने बताया..
‘मेरा एक छोटा बच्चा है लेकिन पेट की जरूरत पूरी करने के लिए मैं कंपनी में सफाई कर्मचारी का काम करती हूं. मेरी शिफ्ट लगती है. यहां तक कि होली और दिवाली पर भी मुझे ऑफिस आना पड़ता है, जबकि परिवार में उस वक्त मेरी जरूरत होती है. त्यौहारों पर हमें छुट्टी नहीं मिलती, सिर्फ 15 अगस्त और 26 जनवरी की मिलती है. अगर हम छुट्टी ले लें तो या तो दूसरी शिफ्ट में आना होता है या पैसे कटवाने पड़ते हैं.’ ये बातें एक कंपनी में काम करने वाली सफाई कर्मचारी ने बताई..
फरीदाबाद के ईएसआई अस्पताल में पहुंचे एक कैंसर मरीज ने बताया, ‘मैं कैंसर का मरीज हूं और लंबे समय से मजदूरी करके ही पेट पाल रहा था. पिछली दफा जिस फैक्ट्री में काम पर लगा तो वहां ईएसआई की सुविधा भी थी, लेकिन जब इलाज की जरूरत पड़ी तो पता चला कि मालिक ने ईएसआई की पूरी किश्त जमा नहीं की और अब ईएसआई का फायदा मिलने में दिक्कत आ रही है.’
ये सभी सच्ची कहानियां उदाहरण हैं उस सिस्टम की जिसके खिलाफ नोएडा के मजदूर सड़कों पर उतरे हुए हैं. मजदूरों की मानें तो उनके साथ हर स्तर पर अमानवीय व्यवहार होता है. उन्हें न बीमारी की छुट्टी मिलती है और न ही कैजुअल लीव. जब भी वे कोई छुट्टी लेते हैं तो उनके छोटे से वेतन में से पैसा काट लिया जाता है ऐसे में परिवार का खर्च कैसे चलांए?
मजदूरों के इन हालातों पर अखिल भारतीय ट्रेड यूनियन कॉन्ग्रेस के नेता बेचु गिरी कहते हैं कि चाहे स्किल्ड वर्कर हैं, अनस्किल्ड हैं या सिक्योरिटी गार्ड हैं, सभी की स्थिति काफी खराब है. प्रदर्शन जरूर नोएडा में हो रहा है लेकिन चाहे हरियाणा हो या पंजाब, दिल्ली हो या मध्य प्रदेश, सभी जगह मजदरों के साथ न्याय नहीं हो रहा है.
- बेचू गिरी कहते हैं कि 12 घंटा सिक्योरिटी गार्ड काम करता है, लेकिन उसको न पैसा मिलता है और न छुट्टिया. ज्यादातर जगहों पर 3 गार्ड की जरूरत है लेकिन दो आदमी से काम चलाया जाता है और इसीलिए 8 घंटे की शिफ्ट के बजाय एक गार्ड 12 घंटे नौकरी करता है.
- मजदूरों की बात करें तो उनको बीमारी की छुट्टी नहीं मिलती. अगर कोई ईएसआई का फायदा लेता है तो भी उसे सिर्फ 70 फीसदी ही वेतन मिलता है. जबकि बहुत सारे मजदूरों को पैसा कटवाकर ही छुट्टी मिलती है.
- बहुत सारे लोगों की ईएसआई कटती ही नहीं है. जिनकी कटती भी है तो कई बार मालिक डिफॉल्टर हो जाता है और पूरी किश्त जमा नहीं कराता है और इलाज के लिए मजदूर भटकते रहते हैं.
. इन मजदूरों को न अर्न लीव और न सीएल मिलती है. सबसे बड़ी बात है कि 12 घंटे काम कराते हैं और मिनिमम वेज पर साइन कराते हैं. जॉब सिक्योरिटी तो है ही नहीं.
- . ईएसआई में ही सफाई कर्मचारी हैं जिन्हें त्यौहारी छुट्टी नहीं मिलती हैं, बाकी मजदूरों को मिलती हैं, सफाई वाले को नहीं मिलती. और तो कहां की कहें भारत सरकार के संस्थान में ही नहीं मिलती. इन्हें बस 15 अगस्त 26 जनवरी और 2 अक्टूबर लीव मिलती है बस. गिरी कहते हैं कि कैसा दुर्भाग्य है कि असल में जो अंबेडकर जयंती से जुड़े हैं, उन्हें ही अंबेडकर जयंती की छुट्टी नहीं मिलती.
- . गिरी कहते हैं कि हरियाणा में कम से कम 5 त्यौहारी 5 छुट्टी देने का नियम कागजों में है लेकिन सरकार भी नहीं देती है, बाकी की तो छोड़ ही दीजिए.
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Priya Gautam is an accomplished journalist currently working with Hindi.News18.com with over 14 years of extensive field reporting experience. Previously worked with Hindustan times group (Hindustan Hindi) and …और पढ़ें
