UPSC टॉपर्स की स्मार्ट ट्रिक: एक उत्तर को कितना दें समय? साथ ही यह रहा पेपर हल करने का आसान तरीका

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Paper Solve Tips: यूपीएससी के इस बार के टॉपर ने बताया कि किस तरह से प्रीलिम्स का पेपर देने के लिए हर एक आंर्स को कितना टाइम देना है और वही मेंस में एक प्रश्न के उत्तर के लिए कितना समय देना होता है. और पेपर को हल करने की क्या स्ट्रेटजी होनी चाहिए.

दिल्ली: हमारे देश में यूपीएससी सिविल सर्विसेज एग्जाम देने के लिए छात्र कितने ज्यादा उत्साहित रहते हैं. इसका अंदाजा आप इसी से लगा सकते हैं कि यूपीएससी के पेपर का फॉर्म अप्लाई करने के लिए लगभग 10 से 11 लाख के करीब छात्रों की संख्या होती है, जिसमें से फिर यूपीएससी का पहला प्रीलिम्स एग्जाम 5 से 6 लाख छात्र देते हैं.

ऐसे में यह आंकड़े देख कर तो आपको इस बात का अंदाजा लग गया होगा कि छात्रों में इस एग्जाम की अहमियत कितनी ज्यादा है, लेकिन यह एग्जाम जितना सब्जेक्टिव है, लेकिन छात्रों का कहना है कि उतना ही यह एग्जाम स्ट्रैटेजिक भी होता है. इसलिए इसके लिए स्ट्रेटजी बनानी भी जरूरी है. इसी स्ट्रेटजी को लेकर जब हमने इस बार के 415वीं रैंक हासिल करने वाले शादाब अली खान से बात की तो आइए आपको बताते हैं. उन्होंने क्या कुछ कहा.

प्रीलिम्स में एक प्रश्न को दें इतना टाइम
शादाब ने कहा कि जैसे ही उनके सामने क्वेश्चन पेपर आता है तो वह पहले 5 मिनट में ओएमआर शीट को भरते हैं और उसके बाद वह 10 से 15 मिनट पूरे क्वेश्चन पेपर को पढ़ने में लगाते हैं. इसमें वह यह भी देख लेते हैं कि कौन से प्रश्नों के उत्तर उन्हें सटीक तरीके से आते हैं और वह कौन से प्रश्नों के उत्तर जल्दी दे सकते हैं. वह कहते हैं कि वह उन्हें टिक कर लेते हैं और फिर उसके बाद वह सीधा रीडिंग कंप्रीहेंशन वाले पार्ट पर चले जाते हैं जो कि सी सेट में आता है.

उनका कहना था कि वह रीडिंग कंप्रीहेंशन को 40 से 45 मिनिट्स देते हैं और उसे सबसे पहले सॉल्व करते हैं और उसके बाद उन्होंने जिन्हें आंसर्स को टिक लगाया है, वह उन्हें सॉल्व करते हैं. उनका यह भी कहना था कि प्रीलिम्स में नेगेटिव मार्किंग भी होती है. इसलिए जो जवाब आपको नहीं आता है उसे आपको छोड़ देना चाहिए. वहीं सी सेट को लेकर उन्होंने सीधा कहा कि आपको सी सेट सिर्फ पास करना है. उसके मार्क्स कहीं भी ऐड नहीं होते हैं इसलिए पासिंग मार्क का सी सेट करके आप जल्दी से पेपर को खत्म कीजिए और यह सिंपल स्ट्रेटजी आप प्रीलिम्स के लिए रखिए.

मैंस के एग्जाम में हर उत्तर को दें सिर्फ इतना वक्त
शादाब ने कहा कि मेंस में पहले ऐसे पेपर अलग होता है. ऑप्शनल अलग होता है और जनरल सब्जेक्ट वाला पेपर अलग होता है. इसलिए आपको हर एक के लिए टाइम के हिसाब से अलग स्ट्रेटजी बनानी है. उनका आगे कहना था कि इन सब पेपर्स में 10 मार्क्स वाले क्वेश्चन अलग होते हैं और 15 मार्क्स वाले अलग, इसलिए आपको 10 मार्क्स वाले क्वेश्चन को 5 से 6 मिनट देने हैं और 15 मार्क्स वाले क्वेश्चन को 10 से 12 मिनट ही देने हैं.

उनका यह भी कहना था कि आपको वर्ड लिमिट का भी ध्यान रखना है क्योंकि 10 मार्क्स वाले क्वेश्चन में आप डेढ़ सौ शब्द से ज्यादा नहीं लिख सकते हैं और वहीं आपको 15 मार्च वाले क्वेश्चन में भी वर्ड लिमिट 250 से ज्यादा नहीं करनी है. अंत में उनका यह भी कहना था कि क्योंकि इस पेपर के मार्क्स काफी ज्यादा अहम होते हैं. इसलिए आपको यह कोशिश जरूर करनी है कि आप सभी प्रश्नों के उत्तर दे पाए ताकि जो प्रश्न का आपको सटीक उत्तर नहीं भी पता है तब भी आप उसमें कुछ ना कुछ लिखें, जिससे आपको कुछ मार्क्स तो मिल जाए.

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Mohd Majid

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