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Ramgarh Upchunav 2024 Ground Report: रामगढ़ के छाता गांव में लोकल 18 की टीम से बातचीत करते हुए ग्रामीणों ने विकास और शिक्षा जैसे मुद्दों पर असंतोष जाहिर किया. ग्रामीणों का कहना है कि पिछले कुछ वर्षों में क्षेत्र में विकास के काम हुए हैं, लेकिन यह पर्याप्त नहीं है. खासकर शिक्षा के क्षेत्र में कोई महत्वपूर्ण पहल नहीं की गई है.
कैमूर. आगामी विधानसभा उपचुनाव को लेकर रामगढ़ विधानसभा क्षेत्र में चुनावी सरगर्मी चरम पर है. 13 नवंबर को होने वाले मतदान को लेकर राजनीतिक दल सक्रिय है और जनता भी इस बार बदलाव की उम्मीद कर रही है. राजद के प्रदेश अध्यक्ष जगदानंद सिंह के बेटे, सुधाकर सिंह, जो पहले इस सीट से विधायक रह चुके हैं, बक्सर लोकसभा से सांसद बनने के बाद इस सीट से हट गए हैं. इस स्थिति में जगदानंद सिंह ने अपने छोटे पुत्र अजीत सिंह को मैदान में उतारने का फैसला लिया है, लेकिन जनता ने इस पर मिली-जुली प्रतिक्रिया दी है.
रामगढ़ विधानसभा क्षेत्र पर राजद की पारंपरिक पकड़ रही है, खासकर सुधाकर सिंह के कार्यकाल में जनता ने उन्हें वोट देकर विधानसभा में भेजा, लेकिन इस बार उनकी अनुपस्थिति और किसी नए चेहरे की उम्मीद के बावजूद जगदानंद सिंह ने अपने छोटे बेटे को चुनावी मैदान में उतारने का ऐलान कर दिया. इसका परिणाम यह हुआ कि ग्रामीण क्षेत्रों में राजद समर्थकों के बीच नाराजगी का माहौल देखने को मिल रहा है. रामगढ़ के छाता गांव में लोकल 18 की टीम से बातचीत करते हुए ग्रामीणों ने विकास और शिक्षा जैसे मुद्दों पर असंतोष जाहिर किया.
विकास पर जनता की राय
ग्रामीणों का कहना है कि पिछले कुछ वर्षों में क्षेत्र में विकास के काम हुए हैं, लेकिन यह पर्याप्त नहीं है. खासकर शिक्षा के क्षेत्र में कोई महत्वपूर्ण पहल नहीं की गई है. सरकारी विद्यालयों में शिक्षा का स्तर बेहतर करने के लिए सरकार ने कई योजनाएं चलाई हैं, लेकिन उनका असर अभी पूरी तरह से देखने को नहीं मिला. सिंचाई और बिजली की स्थिति में सुधार हुआ है, परंतु कुछ ग्रामीण इलाकों में सड़कों की स्थिति अभी भी खराब है. गांव वालों का कहना है कि उन्होंने कई वर्षों तक राजद को समर्थन दिया, लेकिन इस बार वे बदलाव की उम्मीद कर रहे हैं.
बदलाव का बन रहा माहौल
छाता गांव के मुनीम यादव ने लोकल 18 से बातचीत में इस बार बसपा को समर्थन देने की बात कही, उन्होंने बताया कि वर्षों से राजद को वोट देने के बाद अब समय आ गया है कि जनता कुछ नया चुने. रामगढ़ में स्पष्ट रूप से बदलाव की लहर देखी जा रही है और यह लहर न केवल राजद को प्रभावित कर रही है, बल्कि दूसरे दलों को भी मौका दे रही है. खासतौर से प्रशांत किशोर की पार्टी ‘जन सुराज’ ने इस बदलाव के माहौल में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई है.
जन सुराज की बढ़ती सक्रियता
हालांकि, अभी तक जन सुराज पार्टी ने अपने उम्मीदवार का नाम घोषित नहीं किया है, लेकिन पार्टी के कार्यकर्ता गांव-गांव जाकर बदलाव की बात कर रहे हैं और लोगों के बीच चर्चा का विषय बन गए हैं. जनता में यह उम्मीद देखी जा रही है कि जन सुराज एक नया और बेहतर विकल्प बन सकता है. गांवों में हो रही इस चर्चा के आधार पर यह कहा जा सकता है कि इस बार का चुनाव राजद के लिए चुनौतीपूर्ण हो सकता है.
कौन जीतेगा रामगढ़?
रामगढ़ विधानसभा क्षेत्र में चुनावी माहौल को देखते हुए यह स्पष्ट है कि इस बार का चुनाव काफी रोचक होगा, जहां एक ओर राजद अपनी परंपरागत सीट बचाने की कोशिश में है, वहीं दूसरी ओर बसपा और जन सुराज जैसे नए दल इस बदलाव की लहर का फायदा उठाने की पूरी कोशिश कर रहे हैं. जनता में बदलाव की उम्मीदें जगी हैं और इसका असर चुनावी परिणामों पर साफ नजर आ सकता है. अब यह देखना होगा कि 13 नवंबर को होने वाले मतदान में किस पार्टी को रामगढ़ की जनता का समर्थन मिलता है.
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