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महिलाओं की निजता और गरिमा की रक्षा के लिए राष्ट्रीय स्तर पर दिशानिर्देश बनाने की मांग को सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया है. यह याचिका मासिक धर्म के दौरान महिलाओं के साथ भेदभाव और अपमानजनक घटनाओं को लेकर दायर की गई थी.
सप्रीम कोर्ट ने बार एसोसिएशन की याचिका को खारिज कर दिया है. (फाइल फोटो)
Supreme Court: महिलाओं की निजता और गरिमा से जुड़े एक अहम मामले में सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रीय स्तर पर दिशानिर्देश बनाने की मांग वाली याचिका को खारिज कर दिया है. यह याचिका सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन की ओर से दायर की गई थी. याचिका में देशभर के संस्थानों में महिलाओं के अधिकारों की रक्षा के लिए तत्काल न्यायिक हस्तक्षेप की मांग की गई थी.
याचिका में कहा गया था कि कई जगहों पर महिलाओं की गरिमा, निजता और शारीरिक स्वायत्तता का गंभीर उल्लंघन हो रहा है. खासकर मासिक धर्म के दौरान. इस संदर्भ में कुछ घटनाओं का हवाला देते हुए कोर्ट से अपील की गई थी कि महिलाओं की निजता की सुरक्षा के लिए एक समान राष्ट्रीय गाइडलाइन बनाई जाए. इस मामले का मुख्य आधार हरियाणा के रोहतक स्थित महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय की एक घटना थी.
आरोप था कि वहां तीन महिला सफाई कर्मचारियों को यह साबित करने के लिए मजबूर किया गया कि वे मासिक धर्म से गुजर रही हैं. इसके लिए उनसे कथित तौर पर अपने सैनिटरी पैड की तस्वीरें भेजने को कहा गया, जिससे उनकी निजता और गरिमा को ठेस पहुंची. हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने इस याचिका को खारिज करते हुए कहा कि इस तरह के मुद्दों के समाधान के लिए पहले से ही कानूनी प्रावधान मौजूद हैं.
कोर्ट ने संकेत दिया कि हर मामले में अलग-अलग तथ्यों के आधार पर कार्रवाई की जानी चाहिए और इसके लिए एक समान राष्ट्रीय गाइडलाइन जरूरी नहीं है.
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Anoop Kumar Mishra is associated with News18 Digital for the last 6 years and is working on the post of Assistant Editor. He writes on Health, aviation and Defence sector. He also covers development related to …और पढ़ें
