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Greater Noida News : औद्योगिक क्षेत्र ईकोटेक-3 में बुनियादी सुविधाओं की कमी सिरदर्द बन चुकी है. पब्लिक टॉयलेट न होने से यहां काम करने वाली महिलाओं, नौकरी की तलाश में आने वाली युवतियों और श्रमिकों की परेशानी बढ़ा रही है. उद्यमी अमित उपाध्याय लोकल 18 से बताते हैं कि ईकोटेक-3 जैसे बड़े इंडस्ट्रियल एरिया में पब्लिक टॉयलेट जैसी बुनियादी सुविधा का अभाव बेहद चिंताजनक है. उद्यमी अजय राणा कहते हैं कि शौचालय जैसी सुविधा केवल सुविधा नहीं, बल्कि जरूरत है, जो हर व्यक्ति के लिए अनिवार्य है.
ग्रेटर नोएडा. गौतमबुद्ध नगर के औद्योगिक क्षेत्र ईकोटेक-3 में बुनियादी सुविधाओं की कमी एक गंभीर मुद्दा बनती जा रही है. खासकर पब्लिक टॉयलेट की अनुपलब्धता ने यहां काम करने वाली महिलाओं, नौकरी की तलाश में आने वाली युवतियों और बाहरी श्रमिकों के लिए बड़ी परेशानी खड़ी कर दी है. इस समस्या को लेकर स्थानीय उद्यमियों ने प्रशासन का ध्यान आकर्षित करने की कोशिश की है, लेकिन अब तक स्थिति में कोई ठोस सुधार नहीं दिखा है.
आईबीए के अध्यक्ष और उद्यमी अमित उपाध्याय लोकल 18 से बताते हैं कि ईकोटेक-3 जैसे बड़े इंडस्ट्रियल एरिया में पब्लिक टॉयलेट जैसी बुनियादी सुविधा का अभाव बेहद चिंताजनक है. यहां बड़ी संख्या में महिलाएं विभिन्न कंपनियों और फैक्ट्रियों में कार्यरत हैं. रोजाना कई लड़कियां इंटरव्यू के लिए भी इस क्षेत्र में आती हैं. ऐसे में शौचालय की व्यवस्था न होना उनके लिए असहज और मुश्किल भरा अनुभव बन जाता है.
सुधार हुए, लेकिन…
अमित कहते हैं कि बाहर से आने वाले श्रमिक और ग्राहक भी इस समस्या से जूझते हैं. खासकर महिलाएं और बुजुर्ग इस स्थिति में अधिक परेशान होते हैं. सड़क किनारे छोटे-छोटे कारोबार करने वाले रेहड़ी-पटरी विक्रेताओं की महिलाओं को भी इसी समस्या का सामना करना पड़ता है. कुछ समय पहले क्षेत्र के सीईओ एनजी रवि की ओर से उद्यमियों के साथ बैठक की गई थी, जिसमें उन्होंने आश्वासन दिया था कि इंडस्ट्रियल एरिया की सभी मूलभूत सुविधाओं को जल्द दुरुस्त किया जाएगा. श्रमिक सुविधा केंद्र का निर्माण कराया गया है, जो एक सकारात्मक कदम है, लेकिन पब्लिक टॉयलेट की समस्या अब भी बनी हुई है.
बुरा असर
उद्यमी अजय राणा कहते हैं कि ईकोटेक-3 करीब 25 साल पुराना इंडस्ट्रियल एरिया है और इसकी पहचान यहां के उद्योगों से है, लेकिन किसी भी क्षेत्र की असली पहचान उसके इंफ्रास्ट्रक्चर से भी होती है. यदि बुनियादी सुविधाएं ही उपलब्ध नहीं होंगी, तो इससे क्षेत्र की छवि पर भी असर पड़ता है. अजय के मुताबिक, शौचालय जैसी सुविधा केवल सुविधा नहीं, बल्कि जरूरत है, जो हर व्यक्ति के लिए अनिवार्य है. खासकर महिलाओं के लिए यह और भी महत्त्वपूर्ण हो जाती है. इसके बावजूद, इस मुद्दे पर सिर्फ चर्चाएं होती हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर काम नहीं दिखाई देता. इससे नए निवेश पर भी नकारात्मक असर पड़ सकता है.
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प्रियांशु गुप्ता बीते 10 साल से भी ज्यादा समय से पत्रकारिता में सक्रिय हैं. 2015 में भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC), दिल्ली से जर्नलिज्म का ककहरा सीख अमर उजाला (प्रिंट, नोएडा ऑफिस) से अपने करियर की शुरुआत की. य…और पढ़ें
