बीजेपी में विलय का ऐलान कर फंस गए राघव चड्ढा? कपिल सिब्बल ने निकाला पेच, अब उसी पर खेलेंगे अरविंद केजरीवाल

आम आदमी पार्टी (AAP) अपने सात राज्यसभा सांसदों के बगावत कर बीजेपी में शामिल होने के बाद अब पूरी तरह एक्शन मोड में नजर आ रही है. पार्टी इस पूरे मामले को संसद से लेकर संवैधानिक स्तर तक ले जाने की तैयारी में है. सूत्रों के मुताबिक, आप नेतृत्व राज्यसभा के सभापति और उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन और राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से अलग-अलग मुलाकात कर इन सांसदों के खिलाफ कार्रवाई की मांग करेगा.

आप के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने साफ कहा है कि पार्टी इस मुद्दे पर चुप नहीं बैठेगी. उन्होंने ऐलान किया कि वह राज्यसभा अध्यक्ष को पत्र लिखकर सातों बागी सांसदों की सदस्यता खत्म करने की मांग करेंगे. उनका कहना है कि यह पूरा घटनाक्रम ‘असंवैधानिक और संसदीय नियमों के खिलाफ’ है और किसी भी संख्या के आधार पर इसे वैध नहीं ठहराया जा सकता.

राष्ट्रपति तक पहुंचेगा मामला

सिर्फ संसद ही नहीं, आप इस विवाद को राष्ट्रपति भवन तक ले जाने की भी तैयारी में है. पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने भी राष्ट्रपति से मुलाकात का समय मांगा है. पार्टी की योजना है कि पंजाब से चुने गए छह सांसदों को ‘रिकॉल’ करने की मांग उठाई जाए. हालांकि संवैधानिक विशेषज्ञों का साफ कहना है कि भारतीय संविधान में ‘राइट टू रिकॉल’ जैसी कोई व्यवस्था मौजूद नहीं है.

बगावत की अगुवाई और बड़ा झटका

इस पूरे सियासी घटनाक्रम की अगुवाई राघव चड्ढा ने की, जिन्होंने शुक्रवार को घोषणा की कि आप के 10 में से 7 राज्यसभा सांसद पार्टी छोड़कर बीजेपी में जा रहे हैं. इस कदम ने पार्टी को बड़ा झटका दिया है, खासकर ऐसे वक्त में जब पंजाब विधानसभा चुनाव करीब हैं. बागी सांसदों में चड्ढा के अलावा अशोक मित्तल, संदीप पाठक, राजेंद्र गुप्ता, विक्रम साहनी, हरभजन सिंह और स्वाति मालीवाल शामिल हैं.

कपिल सिब्बल ने क्या निकाला कानूनी पेच?

बागी गुट का दावा है कि वे दो-तिहाई संख्या में हैं, इसलिए उनका बीजेपी में विलय वैध है. लेकिन आप और कई कानूनी विशेषज्ञ इस तर्क से सहमत नहीं हैं. वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल का कहना है कि किसी भी विलय के लिए पहले पार्टी स्तर पर औपचारिक प्रस्ताव जरूरी होता है, न कि सिर्फ सांसदों का फैसला. वहीं हिन्दुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, पूर्व लोकसभा महासचिव पीडीटी आचारी भी कहते हैं कि ये सांसद अयोग्यता से पूरी तरह सुरक्षित नहीं हैं.

आप का क्या आरोप?

आप ने इस पूरे घटनाक्रम के पीछे केंद्रीय एजेंसियों के इस्तेमाल का आरोप लगाया है. संजय सिंह ने दावा किया कि अशोक मित्तल के ठिकानों पर ED की छापेमारी के बाद ही हालात बदलने लगे. वहीं दिल्ली आप अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज ने भी कहा कि विपक्ष को कमजोर करने के लिए एजेंसियों का इस्तेमाल किया जा रहा है और कार्यकर्ताओं का मनोबल तोड़ने की कोशिश हो रही है.

बीजेपी का पलटवार

वहीं बीजेपी ने आप के आरोपों को खारिज कर दिया है. दिल्ली बीजेपी अध्यक्ष वीरेंद्र सचदेवा ने कहा कि आप के नेता हताशा में इस तरह के बयान दे रहे हैं. उनके मुताबिक, ये सभी सांसद लंबे समय से पार्टी में घुटन महसूस कर रहे थे और अंततः उन्होंने अपनी अंतरात्मा की आवाज सुनी.

अब नजर इस बात पर है कि राज्यसभा अध्यक्ष और राष्ट्रपति स्तर पर आप की शिकायतों पर क्या रुख अपनाया जाता है. साथ ही, यह भी देखना दिलचस्प होगा कि क्या यह मामला अदालत तक पहुंचता है और आने वाले समय में पंजाब की राजनीति पर इसका कितना असर पड़ता है.

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