केजरीवाल ने जस्टिस स्वर्णकांता को पत्र में क्या लिखा, बता सत्याग्रह शुरू किया, वहीं स्वाति बोली- ड्रामा है सब

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केजरीवाल ने जस्टिस स्वर्णकांता को पत्र में क्या लिखा, बता सत्याग्रह शुरू किया

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अरविंद केजरीवाल ने दिल्ली हाईकोर्ट की जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा को चार पन्नों का पत्र लिखा है. इस पत्र में उन्होंने कोर्ट के सामने खुद या अपने वकील के जरिए पेश न होने की बात कही है. केजरीवाल ने इस कदम को ‘सत्याग्रह’ का नाम दिया है.

केजरीवाल पार्टी के अन्य नेताओं के साथ राजघाट पहुंचे

नई दिल्ली. आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने दिल्ली हाईकोर्ट की जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा को चार पन्नों का पत्र लिखा है. इस पत्र में उन्होंने कोर्ट के सामने खुद या अपने वकील के जरिए पेश न होने की बात कही है. केजरीवाल ने इस कदम को ‘सत्याग्रह’ का नाम दिया है. केजरीवाल अपनी पार्टी के अन्य नेताओं के साथ राजघाट पहुंचे. यहां उन्होंने महात्मा गांधी को पुष्पांजलि अर्पित की. उनके साथ दिल्ली विधानसभा की नेता प्रतिपक्ष आतिशी, पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया, संजीव झा और अन्‍य आप नेता भी मौजूद थे.

मीडिया से बात करते हुए केजरीवाल ने कहा, ‘यह मामला अदालत का है. हम देश की अदालत और न्याय व्यवस्था का पूरा सम्मान करते हैं. इसी न्याय प्रणाली ने हमें बेल दिलाई और आरोपों से मुक्त किया. आज हम आजाद घूम रहे हैं तो यह न्याय व्यवस्था की वजह से ही संभव हुआ है. लेकिन कुछ परिस्थितियां ऐसी बन गई हैं कि हमें सत्याग्रह करना पड़ रहा है. जो कुछ भी कहना था, वह हमने जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा को लिखे पत्र में बता दिया है. चूंकि यह बेहद संवेदनशील मामला है, इसलिए अभी मीडिया में ज्यादा कुछ नहीं कहना चाहते.’केजरीवाल ने अपने पत्र में लिखा कि न्याय सिर्फ होना चाहिए, बल्कि होता हुआ दिखना भी चाहिए.

उन्होंने अपनी अंतरात्मा की आवाज सुनकर यह फैसला लिया है और कोर्ट के किसी भी फैसले या नतीजे का सामना करने के लिए पूरी तरह तैयार रहने की बात कही है. मनीष सिसोदिया के साथ मिलकर लिखे गए इस पत्र में दोनों नेताओं ने जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा की अदालत में पेशी से इनकार कर दिया है. आप ने इसे महात्मा गांधी की परंपरा में ‘सत्याग्रह’ बताया है.

दूसरी ओर आप की पूर्व नेता और राज्यसभा सांसद स्वाति मालीवाल ने केजरीवाल के इस कदम की तीखी आलोचना की. स्वाति ने कहा, ‘केजरीवाल को ड्रामा करने की आदत है. राजघाट पहुंचे हैं तो थोड़ा चिंतन कर लें. संवैधानिक संस्थाओं पर हमला करना कैसी राजनीति है? इसी वजह से मैं उस जगह को छोड़कर आई हूं.’

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Sharad Pandeyविशेष संवाददाता

करीब 20 साल का पत्रकारिता का अनुभव है. नेटवर्क 18 से जुड़ने से पहले कई अखबारों के नेशनल ब्‍यूरो में काम कर चुके हैं. रेलवे, एविएशन, रोड ट्रांसपोर्ट और एग्रीकल्चर जैसी महत्वपूर्ण बीट्स पर रिपोर्टिंग की. कैंब्रिज…और पढ़ें

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