दिल्ली की 'जय भीम योजना' में 145 करोड़ का स्कैम, 22000 स्टूडेंट्स के एडमिशन में फर्जीवाड़ा, ACB ने 9 को दबोचा

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दिल्ली की जय भीम योजना में 145 करोड़ का स्कैम, ACB ने 9 को किया गिरफ्तार

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एसीबी ने 29 अप्रैल को इस मामले में अपनी सबसे बड़ी कार्रवाई की है. जांच एजेंसी ने 9 आरोपियों को अरेस्ट किया है. गिरफ्तार लोगों में इंस्टिट्यूट के मालिक, डायरेक्टर और कई एसोसिएट्स शामिल हैं. 30 अप्रैल को सभी आरोपियों को स्पेशल कोर्ट में पेश किया गया. कोर्ट ने इन सभी आरोपियों को 14 दिन की ज्यूडिशियल कस्टडी में भेज दिया है.

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सभी 9 आरोपियों को कोर्ट ने 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेज दिया है. (फाइल फोटो)

नई दिल्ली. दिल्ली सरकार की एंटी करप्शन ब्रांच ने दिल्ली की ‘जय भीम मुख्यमंत्री प्रतिभा विकास योजना’ में बड़े स्कैम का पर्दाफाश किया है, जिसमें पैनल में शामिल कोचिंग इंस्टिट्यूट पर आरोप है कि उन्होंने धोखाधड़ी के जाल में सरकारी फंड हड़प लिया, जिसमें डुप्लीकेट स्टूडेंट एंट्री, जाली एडमिशन और बेनिफिशियरी को स्टाइपेंड न देना शामिल है.

जांच से पता चला है कि इंस्टिट्यूट ने अलग बैंक अकाउंट रखने, कोचिंग को अनऑथराइज्ड लोकल सेंटर पर भेजने जैसे ज़रूरी नियमों को तोड़ा, और कई मामलों में FIR दर्ज होने के बाद ही स्टाइपेंड जारी किए, जबकि डिपार्टमेंट के अधिकारियों की लापरवाही की वजह से सरकारी फंड का गलत इस्तेमाल बिना रोक-टोक के चलता रहा. ACB को जांच के तहत संदिग्ध डिस्बर्समेंट अमाउंट 37.20 करोड़ मिला है. अनुमानित कुल स्कैम (जैसा कि आरोप है) लगभग 145 करोड़ का है.

दिल्ली की एंटी-करप्शन ब्रांच ने दिल्ली में कोचिंग इंस्टिट्यूट से जुड़े 9 ऐसे लोगों को गिरफ्तार किया है जिनमें मालिक/डायरेक्टर और एसोसिएट्स से जुड़े लोग हैं. इन इंस्टिट्यूट को 2018-19 में जय भीम मुख्यमंत्री प्रतिभा विकास योजना में शामिल किया गया था. 7 अगस्त 2025 को एसीबी/जीएनसीटीडी के साथ मामला एफआईआर संख्या 38/2025 दर्ज कराया था, जिसमें आरोप लगाया गया था कि अलग-अलग पैनलबद्ध कोचिंग संस्थान ने 2018-19 में ‘जय भीम मुख्यमंत्री प्रतिभा विकास योजना’ के तहत सरकारी खजाने से पैसे मांगने के लिए अवैधताएं की थीं.

जांच से पता चला कि यह योजना 2017 में कैबिनेट के निर्णय संख्या 2526 दिनांक 12.12.2017 के तहत शुरू की गई थी. प्रारंभिक अधिसूचना 09.01.2018 को जारी की गई थी. प्रतिस्पर्धी परीक्षाओं के लिए एससी वर्ग के छात्रों को कोचिंग प्रदान करने के लिए शुरू में 8 संस्थानों को सूचीबद्ध किया गया था. पहले चरण में लगभग 5000 छात्रों को नामांकित किया गया था 2019-20 में, इस योजना को कुछ बदलावों के साथ फिर से शुरू किया गया, यानी ST, OBC, EWS कैटेगरी भी जोड़ी गईं और इस बार 38 और इंस्टिट्यूट को पैनल में शामिल किया गया. दोनों फेज़ में कुल मिलाकर लगभग 22,000 स्टूडेंट्स ने एडमिशन लिया. जांच में यह भी पता चला कि इन इंस्टिट्यूट ने इस योजना के तहत 37.20 करोड़ रुपये लिए थे. सभी इंस्टिट्यूट के लिए इस योजना के लिए एक अलग बैंक अकाउंट रखना ज़रूरी था, लेकिन इसका बिल्कुल भी पालन नहीं किया गया.

जांच में यह भी पता चला कि इंस्टिट्यूट ने सरकारी खजाने से फंड लेने के लिए जो स्टूडेंट्स की लिस्ट जमा की थी, उसमें दो या उससे ज़्यादा इंस्टिट्यूट के कई स्टूडेंट्स के नाम थे. इसके बाद, बड़ी संख्या में स्टूडेंट्स को जांच में शामिल होने के लिए बुलाया गया. उन्होंने बताया कि उन्होंने किसी दूसरे इंस्टिट्यूट में एडमिशन नहीं लिया था, जिसका मतलब है कि इस योजना में स्टूडेंट्स के एडमिशन से जुड़े नकली डॉक्यूमेंट इंस्टिट्यूट ने सरकारी फंड लेने के लिए बनाए और दिखाए. DSCST अधिकारियों ने भी गलत हाथों में फंड जाने की जांच/रेगुलेट नहीं किया. यह भी पता चला कि कई मामलों में इंस्टिट्यूट को मिलने वाला स्टाइपेंड स्टूडेंट्स को नहीं दिया गया था.

जांच में यह भी पता चला कि कुछ इंस्टिट्यूट ने अपने स्टूडेंट्स को कोचिंग के लिए लोकल ट्यूशन सेंटर भेजा था, जो भी एक बड़ा वायलेशन था. लोकल ट्यूशन सेंटर के मालिकों/डायरेक्टर/प्रोप्राइटर/रनर्स को अपनी बात समझाने के कई मौके दिए गए, लेकिन वे कोई ठोस सबूत नहीं दे पाए. यहां तक कि कुछ इंस्टिट्यूट ने केस रजिस्टर होने के बाद स्टूडेंट्स के अकाउंट में स्टाइपेंड ट्रांसफर कर दिया. इस मामले में 29.04.2026 को 09 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है. 30.04.26 को उन सभी को स्पेशल कोर्ट में पेश किया गया और 14 दिन की JC में भेज दिया गया. इंस्टिट्यूट द्वारा DSCST को दिए गए इनकम सर्टिफिकेट और कास्ट सर्टिफिकेट की भी रेवेन्यू अथॉरिटी से जांच कराई जा रही है. दूसरे इंस्टिट्यूट और SC/ST डिपार्टमेंट के संबंधित अधिकारियों की भूमिका की अभी भी जांच चल रही है. आगे की जांच जारी है.

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