नल खोलते ही आती है बदबू! ज्ञान खंड-3 में दूषित पानी से हाहाकार, लोग बोले- 'पानी में आ रही गंदगी, दिखाई दे रहा सीवर जैसा रंग

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Ghaziabad News: गाजियाबाद के इंदिरापुरम स्थित ज्ञान खंड-3 में पिछले एक हफ्ते से करीब 350 परिवार दूषित पानी की समस्या से जूझ रहे हैं. निवासियों का आरोप है कि नलों से सीवर जैसा बदबूदार और मटमैला पानी आ रहा है, जिससे संक्रमण का खतरा बढ़ गया है. शिकायत के बावजूद प्रशासन केवल औपचारिक जांच कर पल्ला झाड़ लेता है. भीषण गर्मी में लोग बोतलबंद पानी खरीदने को मजबूर हैं, जिससे उन पर आर्थिक बोझ भी बढ़ रहा है.

नलों से आता बदबूदार और मटमैला पानी, क्या यही है स्मार्ट सिटी का सपना? (फोटो-AI)

गाजियाबाद: भीषण गर्मी के इस मौसम में जहां पानी की एक-एक बूंद कीमती है, तो वहीं गाजियाबाद के पॉश इलाके इंदिरापुरम के ज्ञान खंड-3 के निवासी ‘जहरीले’ पानी के साये में जीने को मजबूर हैं. इलाके के करीब 350 परिवारों के लिए नल खोलना किसी दुःस्वप्न से कम नहीं है, क्योंकि वहां नल से पीने का पानी नहीं बल्कि, सीवर जैसी गंदगी और बदबू आ रही है. पिछले एक हफ्ते से जारी इस समस्या ने स्थानीय निवासियों का जीना मुहाल कर दिया है.

सीवर जैसा रंग और असहनीय बदबू
ज्ञान खंड-3 के प्लॉट संख्या 138 और 82 के आसपास के करीब 150 से अधिक घरों में स्थिति सबसे ज्यादा खराब है. स्थानीय निवासियों का आरोप है कि पानी का रंग बिल्कुल सीवर जैसा काला और मटमैला है. यह पानी पीना तो दूर, नहाने या खाना बनाने के लायक भी नहीं बचा है. निवासियों का कहना है कि जैसे ही मोटर चलाई जाती है, नलों से बदबूदार और गंदा पानी आने लगता है, जिससे पूरी पानी की टंकी भी प्रदूषित हो रही है.

बच्चों और बुजुर्गों पर मंडरा रहा संक्रमण का खतरा
गंदे पानी की सप्लाई के कारण इलाके में बीमारियों के फैलने का डर पैदा हो गया है. आरडब्ल्यूए के महासचिव उदय सिंह ने चिंता जताते हुए कहा कि दूषित पानी की वजह से बच्चों और बुजुर्गों में संक्रमण फैलने का भारी खतरा बना हुआ है. गर्मी में पानी की मांग बढ़ जाती है, लेकिन स्वच्छ जल न मिलने से लोग शारीरिक और मानसिक रूप से परेशान हो रहे हैं.

जेब पर बढ़ रहा आर्थिक बोझ
सरकारी सप्लाई का पानी इस्तेमाल के लायक न होने के कारण मजबूरी में लोगों को बाहर से बोतलबंद पानी खरीदना पड़ रहा है. स्थानीय निवासी गुरप्रीत सिंह और नाजिफ अकरम ने बताया कि आए दिन गंदा पानी आने से आरओ के फिल्टर भी हर दूसरे-तीसरे महीने खराब हो रहे हैं, जिन्हें बार-बार बदलवाना पड़ता है. इससे मध्यमवर्गीय परिवारों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ बढ़ रहा है.

अधिकारियों का वही पुराना रवैया
हैरानी की बात यह है कि इतनी गंभीर समस्या होने के बावजूद प्रशासन केवल ‘खानापूर्ति’ में लगा है. निवासियों का कहना है कि जब भी शिकायत की जाती है, विभाग के लोग केवल औपचारिक जांच कर मामला शांत कर देते हैं, लेकिन स्थाई समाधान आज तक नहीं हुआ. दूसरी ओर, जलकल विभाग के सहायक अभियंता मयंक मिश्रा का कहना है कि उनके पास अभी तक ऐसी कोई शिकायत नहीं आई है, हालांकि उन्होंने आश्वासन दिया है कि निरीक्षण कर समस्या दूर की जाएगी. निवासियों ने अब मांग की है कि प्रशासन जल्द से जल्द पाइपलाइन की लीकेज की जांच करे और उसे ठीक कर इलाके में साफ पानी की आपूर्ति सुनिश्चित करे.

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Rahul Goel

राहुल गोयल न्यूज़ 18 हिंदी में हाइपरलोकल (यूपी, उत्तराखंड, हरियाणा और हिमाचल प्रदेश) के लिए काम कर रहे हैं. मीडिया इंडस्ट्री में उन्हें 16 साल से ज्यादा का अनुभव है, जिसमें उनका फोकस हमेशा न्यू मीडिया और उसके त…और पढ़ें

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