सीएम भजनलाल के दो प्लस पॉइंट, जिस वजह से बने आलाकमान की पहली पंसद, काम के चलते महनों नहीं जाते थे घर

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भजनलाल शर्मा सन् 2000 में पहली बार 27 साल की उम्र में अटारी गांव नदबई के सरपंच बने थे. वहीं से उनका राजनीति में प्रर्दापण हुआ और वही से राजनीति की बारिकियों को सीखते चलतें गए

पार्टी कार्यशाला के दौरान कार्यक्रम में बैठे भजनलाल शर्मा. 

अंकित राजपूत/जयपुर. राजस्थान के नए मुख्यमंत्री के रूप में भजनलाल शर्मा राजस्थान के 14वें मुख्यमंत्री के तौर पर 15 दिसंबर को सुबह 11 बजे जयपुर के अल्बर्ट हॉल के बाहर मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे. इससे पहले अल्बर्ट हॉल पर 2018 में पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने भी यह शपथ ली थी. भजनलाल शर्मा के शपथ ग्रहण समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा भी शामिल होंगे. साथ ही शपथ ग्रहण समारोह में कई मुख्यमंत्री और केंद्रीय मंत्री भी मौजूद रहेंगे. भजनलाल शर्मा के साथ ही दो नव नियुक्त उपमुख्यमंत्री दिया कुमारी और डॉ. प्रेमचंद बैरवा भी शपथ लेंगे. सांगानेर से कांग्रेस के प्रत्याशी पुष्पेन्द्र भारद्वाज को हराकर भजनलाल शर्मा पहली बार विधायक बने और पहली बार विधायक बनते ही वह मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे.

भजनलाल शर्मा सन् 2000 में पहली बार 27 साल की उम्र में अटारी गांव नदबई के सरपंच बने थे. वहीं से उनका राजनीति में प्रर्दापण हुआ और वही से राजनीति की बारिकियों को सीखते चलतें गए. गांव के विकास के सभी मुद्दों को बारिकी से सीखना और धीरे-धीरे उनका समाधान करना भजनलाल शर्मा ने बारिकी से सीखा. वह राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के साथ जुड़कर अनुशासन में काम करते रहें. यही दो प्लस पॉइंट भजनलाल शर्मा के सबसे बेहतरीन रहे और आज वह प्रदेश की राजनीति के सबसे बड़े पद तक पहुंच गए हैं. भजनलाल शर्मा की कार्यशैली जो दिल्ली के आलाकमान को भा गयी पार्टी के हर काम को उन्होंने अपना 100% देकर पुरा किया और अपना पूरा समय पार्टी को दिया जिससे वह आलाकमान की नजरों में आए.

साइलेंट परफॉर्मर बनकर काम करते रहें शर्मा
भजनलाल शर्मा के काम करने के तरीकों से प्रदेश के सभी नेता वाकिफ हैं. उन्होंने लगातार विपक्ष में रहते हुए पूरे 5 साल पार्टी के लिए मेहनत की और उसका फल उन्हें प्रदेश के सबसे बड़े पद पर बैठाकर दिया गया. भजनलाल शर्मा ने 4 प्रदेश अध्यक्षों से पार्टी और राजनीति का काम बारिकी से सीखा और पूरे समय उसमें लगे रहें. उन्होंने कभी किसी पद की लालसा नहीं की और ये ही उसकी सबसे बड़ी ताक़त बनी और उन्हें मुख्यमंत्री पद तक पहुंचा दिया.

पार्टी के काम के चलते महिनों तक नहीं जा पाते थे गांव
राजस्थान भाजपा के सभी प्रदेश अध्यक्ष उनके काम की हमेशा तारीफ किया करते थे. भजनलाल शर्मा पार्टी के कामों में इतना व्यस्त हो जाते थे कि वह महिनों तक अपने घर नहीं जा पाते थें. भजनलाल शर्मा पार्टी के सबसे अनुशासित और साइलेंट रूप में अपने काम करने वाले प्रदेश मंत्री थे. एक काम खत्म होते ही उन्हें दूसरा काम दिया जाता और वह बिना किसी से सवाल के उस काम में लग जाते थें. उन्होंने प्रदेश में पार्टी कार्यक्रमों के दौरान पूरे राजस्थान प्रदेश का दौरा भी किया. जिससे वह हर क्षेत्र के पार्टी कार्यकर्ताओं को अच्छे से जानते थे और लगातार प्रदेश के दौरों के दौरान उन्होंने कार्यकर्ताओं में अपनी अच्छी पकड़ भी बनाई.

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