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New Compound Discovered For Malaria: दिल्ली के मिरांडा हाउस कॉलेज की टीम ने मलेरिया के इलाज के लिए नया कंपाउंड विकसित किया है. यह घातक बीमारी के खिलाफ असरदार साबित हो सकता है. हालांकि इसे बाजार में आने में अभी समय लगेगा.
दिल्ली. भारत में मलेरिया आज भी एक बड़ी सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौती बना हुआ है. वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन (WHO) की रिपोर्ट के अनुसार, हर साल दुनिया भर में करोड़ों मलेरिया के मामले सामने आते हैं, जिनमें भारत भी प्रमुख है. हालांकि पिछले कुछ वर्षों में इन मामलों में कमी आई है, लेकिन ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों में इसका खतरा अभी भी बना हुआ है. खासकर Plasmodium falciparum जैसे खतरनाक परजीवी के कारण मौत का जोखिम अधिक होता है.
मिरांडा हाउस में 10 साल की मेहनत से बनी नई खोज
दिल्ली विश्वविद्यालय के मिरांडा हाउस के रसायन विज्ञान विभाग में प्रोफेसर प्रियंवदा सिंह के नेतृत्व में पिछले 10 वर्षों से मलेरिया पर शोध किया जा रहा है. इस दौरान टीम ने एक नया गुआनिडीन आधारित कंपाउंड विकसित किया है, जो इलाज के क्षेत्र में नई उम्मीद बनकर सामने आया है.
क्यों जरूरी है नई दवा की खोज
डॉ. प्रियंवदा सिंह ने बताया कि मलेरिया, जिसे अक्सर सामान्य बुखार समझ लिया जाता है, दरअसल एक गंभीर और जानलेवा बीमारी है. यह मादा एनोफिलीज मच्छर के काटने से फैलता है और हर साल भारत सहित दुनिया भर में लाखों लोगों को प्रभावित करता है. खासतौर पर प्लास्मोडियम फाल्सीपेरम प्रजाति सबसे खतरनाक मानी जाती है, जिसका इलाज करना बेहद मुश्किल होता है. मौजूदा समय में क्लोरोक्विन और आर्टेमिसिनिन जैसी दवाओं का इस्तेमाल किया जाता है, लेकिन इन पर भी अब रेजिस्टेंस देखने को मिल रहा है, जो चिंता का विषय है.
क्या है इस कंपाउंड की खासियत
इस नए कंपाउंड की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह पूरी तरह नोवेल यानी नया है और आज की दवाओं से अलग तरीके से काम करता है. यह नॉन-टॉक्सिक है और परीक्षणों में सुरक्षित पाया गया है. सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि यह बहुत कम मात्रा में ही मलेरिया के अलग-अलग स्ट्रेन्स, यहां तक कि दवा-प्रतिरोधी (रेजिस्टेंट) स्ट्रेन्स पर भी काफी प्रभावी साबित हुआ है.
अंतरराष्ट्रीय सहयोग से आगे बढ़ रहा शोध
इस महत्वपूर्ण शोध में हंसराज कॉलेज के प्रोफेसर बृजेश राठी, नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ इम्यूनोलॉजी के प्रोफेसर अगम प्रसाद सिंह और सिंगापुर स्थित MIT SMART के प्रोफेसर जूलियन लेस्कर भी शामिल हैं. यह एक मजबूत अंतरराष्ट्रीय कंसोर्टियम है, जिसका लक्ष्य मलेरिया के खिलाफ प्रभावी समाधान विकसित करना है. इसके अलावा डॉ. प्रियंवदा ने मिरांडा हाउस की प्रिन्सिपल प्रो. बिजयलक्ष्मी नंदा का भी आभार व्यक्त किया.
बाजार तक पहुंचने में लगेगा समय
यह कंपाउंड अभी शुरुआती स्टेज में है, इसलिए इसे बाजार में आने में समय लगेगा. पहले लैब और जानवरों पर इसकी जांच होती है, फिर लोगों पर अलग-अलग चरणों में ट्रायल किए जाते हैं, ताकि इसकी सेफ्टी और असर को परखा जा सके. इन सभी टेस्ट के बाद ही दवा को मंजूरी मिलती है. पूरी प्रक्रिया में कई साल लग सकते हैं, लेकिन वैज्ञानिकों को उम्मीद है कि यह आगे चलकर मलेरिया के इलाज में मददगार साबित होगा.
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बुंदेलखंड यूनिवर्सिटी से मास कम्यूनिकेशन एंड जर्नलिज़्म में मास्टर्स, गोल्ड मेडलिस्ट. पत्रकारिता का सफर दैनिक जागरण से शुरू हुआ, फिर प्रभात खबर और ABP न्यूज़ से होते हुए News18 Hindi तक पहुंचा. करियर और देश की …और पढ़ें
