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मोदीनगर के दिल्ली-मेरठ रोड (एनएच-58) पर स्थित लक्ष्मी नारायण मंदिर, जिसे मोदी मंदिर के नाम से भी जाना जाता है, आस्था और भव्यता का अनूठा केंद्र है. वर्ष 1963 में राय बहादुर गुजर मल मोदी और दयावती मोदी द्वारा निर्मित यह विशाल मंदिर लगभग 15 एकड़ क्षेत्र में फैला हुआ है और कलिंग शैली की लाल बलुआ पत्थर की वास्तुकला के लिए प्रसिद्ध है. मंदिर परिसर में भगवान लक्ष्मी नारायण के साथ-साथ माता दुर्गा और शिव-पार्वती सहित कई देवी-देवताओं के आठ छोटे मंदिर भी स्थित हैं.
गाजियाबाद. दिल्ली-मेरठ रोड (एनएच-58) पर स्थित मोदीनगर का प्रसिद्ध मोदी मंदिर जिसे लक्ष्मी नारायण मंदिर के नाम से जाना जाता है, आज भी आस्था, भव्यता और इतिहास का अनोखा संगम बना हुआ है. शहर की भीड़भाड़ से हटकर बना यह मंदिर न सिर्फ श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक सुकून देता है. बल्कि अपनी विशालता और खूबसूरती से हर आने वाले को मंत्रमुग्ध भी कर देता है. यही वजह है कि यह मंदिर सिर्फ एक धार्मिक स्थल नहीं बल्कि लोगों के लिए शांति और विश्वास का केंद्र बन चुका है. इस भव्य मंदिर का निर्माण साल 1963 में देश के प्रसिद्ध उद्योगपति राय बहादुर गुजर मल मोदी और उनकी पत्नी दयावती मोदी ने करवाया था. करीब 15 एकड़ में फैला यह विशाल मंदिर परिसर अपने आप में एक अलग ही दुनिया जैसा लगता है. लाल बलुआ पत्थर से निर्मित इस मंदिर की वास्तुकला कलिंग शैली पर आधारित है जो इसे पारंपरिक भारतीय मंदिरों में खास पहचान दिलाती है.
पूरे परिसर में करीब आठ छोटे मंदिर
मंदिर के गर्भगृह में भगवान लक्ष्मी नारायण की आकर्षक प्रतिमा स्थापित है. इस मंदिर में माता दुर्गा और भगवान शिव-पार्वती की भव्य मूर्तियां भी विराजमान हैं. इसके अलावा पूरे परिसर में करीब आठ छोटे मंदिर बने हुए हैं, जहां अलग-अलग देवी-देवताओं की पूजा की जाती है. जैसे ही श्रद्धालु मंदिर परिसर में प्रवेश करते हैं वहां का शांत वातावरण और घंटियों की मधुर ध्वनि मन को तुरंत सुकून देती है. मंदिर परिसर सिर्फ पूजा तक सीमित नहीं है, यहां बने खूबसूरत फव्वारे, हरे-भरे पार्क और खुले स्थान इसे एक आदर्श धार्मिक पर्यटन स्थल भी बनाते हैं. परिवार और दोस्तों के साथ आने वाले लोग यहां समय बिताकर आध्यात्मिकता के साथ-साथ प्रकृति का भी आनंद लेते हैं.
खास बात यह है कि इसी परिसर में राय बहादुर गुजर मल मोदी और दयावती मोदी की समाधि भी मौजूद है जो इस मंदिर के इतिहास को और भी खास बनाती है. मंदिर के पुजारी लीलानंद बताते हैं कि यह मंदिर दशकों से श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र बना हुआ है. दिल्ली-एनसीआर के अलावा राजस्थान और गुजरात से भी बड़ी संख्या में भक्त यहां दर्शन करने आते हैं. वहीं हरिद्वार और बद्रीनाथ की यात्रा पर जाने वाले श्रद्धालु भी इस मंदिर में रुककर आशीर्वाद लेना नहीं भूलते. अपनी भव्यता, धार्मिक महत्व और ऐतिहासिक पहचान के कारण यह मंदिर उत्तर भारत के प्रमुख मंदिरों में गिना जाता है. यह जगह सिर्फ दर्शन का नहीं बल्कि मन को शांति और विश्वास से भर देने वाला एक ऐसा अनुभव है जो हर किसी को यहां बार-बार आने के लिए मजबूर कर देता है.
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नमस्ते मेरा नाम मोनाली है, पेशे से पत्रकार हूं, ख़बरें लिखने का काम है. लेकिन कैमरे पर समाचार पढ़ना बेहद पसंद है. 2016 में पत्रकारिता में मास्टर्स करने के बाद पांच साल कैमरे पर न्यूज़ पढ़ने के साथ डेस्क पर खबरे…और पढ़ें
