एयरपोर्ट पर लेने भी कोई नहीं आता, चैंपियन खिलाड़ी का छलका दर्द, थॉमस कप की जीत IPL की चकाचौंध में गुम हो गई

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भारत के थॉमस कप में कांस्य पदक जीतना बेहद शानदार प्रदर्शन था और टीम को इससे कहीं ज्यादा सराहना मिलनी चाहिए थी. चीनी ताइपे जैसी मजबूत टीम को हराना, जिसके खिलाड़ी रैंकिंग में ऊपर हैं, काबिले-तारीफ था लेकिन चुनावी माहौल और आईपीएल की चकाचौंध के बीच बैडमिंटन की यह बड़ी उपलब्धि कहीं खो सी गई.

थॉमस कप में शानदार प्रदर्सन करने वाली बैडमिंटन टीम के चिराग शेट्टी का दर्द आया बाहर

नई दिल्ली. भारत में खेलों की दुनिया में चमकते सितारों की कमी नहीं है, लेकिन दुख तब होता है जब इन सितारों की रोशनी को सही पहचान नहीं मिलती. क्रिकेट के शोर-शराबे और चुनावी हलचल के बीच कई बार ऐसे ऐतिहासिक पल दब जाते हैं, जो देश के लिए गर्व का विषय होते हैं. हाल ही में थॉमस कप में भारतीय टीम का कांस्य पदक जीतना भी कुछ ऐसा ही पल था एक शानदार उपलब्धि, जिसे वह सम्मान और जश्न नहीं मिल पाया, जिसकी वह हकदार थी.
भारत के थॉमस कप में कांस्य पदक जीतना बेहद शानदार प्रदर्शन था और टीम को इससे कहीं ज्यादा सराहना मिलनी चाहिए थी. चीनी ताइपे जैसी मजबूत टीम को हराना, जिसके खिलाड़ी रैंकिंग में ऊपर हैं, काबिले-तारीफ था लेकिन चुनावी माहौल और आईपीएल की चकाचौंध के बीच बैडमिंटन की यह बड़ी उपलब्धि कहीं खो सी गई.

चैंपियन खिलाड़ी का छलका दर्द

चिराग ने कहा 2022 में जब हमने थॉमस कप जीता था, तब भी कोई नहीं आया था यह निश्चित रूप से दुख देता है भारत अभी भी एक खेल-प्रधान देश नहीं है ऐसा नहीं है कि हम हर दिन मेडल जीतते हैं, इसलिए जब जीतते हैं, तो उसे सेलिब्रेट किया जाना चाहिए. उनकी ये बातें कड़वी जरूर हैं, लेकिन सच्चाई भी हैं. सात्विकसाईराज रंकीरेड्डी और चिराग शेट्टी बैडमिंटन में उसी तरह के खिलाड़ी हैं, जैसे क्रिकेट में विराट कोहली और रोहित शर्मा. उनके नाम एशियन गेम्स का स्वर्ण, थॉमस कप का स्वर्ण और कांस्य, वर्ल्ड चैंपियनशिप का पदक और कई सुपर सीरीज खिताब हैं.

इसके बावजूद उन्हें अपनी पहचान के लिए आवाज उठानी पड़ रही है यह हम सभी के लिए सोचने वाली बात है. जब चिराग से थॉमस कप की अहमियत के बारे में पूछा गया , तो उन्होंने कहा, “यह मेरे करियर के सबसे खास पलों में से एक है. अगर मुझे अपने सबसे खुशी के पल बताने हों, तो वह थॉमस कप और एशियन गेम्स की जीत ही होंगे. 2022 का थॉमस कप जीतना हमारे खेल के लिए 1983 जैसा पल था, लेकिन देश में इसे उतना नहीं मनाया गया.

अब सवाल यह है कि आगे क्या?

क्या खिलाड़ी इसी तरह निराश होते रहेंगे, या इस स्थिति को बदला जा सकता है? वैसे जानकारों की माने तो इस खेल की मार्केटिंग पर और ज्यादा ध्यान देने की जरूरत है उदाहरण के तौर पर, इतने बड़े टूर्नामेंट में टीम के साथ कोई मीडिया मैनेजर क्यों नहीं होता?क्रिकेट में हमेशा एक मीडिया मैनेजर होता है, जो टीम और मीडिया के बीच पुल का काम करता है. थॉमस कप के बाद भी खिलाड़ियों और मीडिया के बीच तुरंत बातचीत कराई जानी चाहिए थी, लेकिन प्रेस कॉन्फ्रेंस तीन दिन बाद हुई तब तक खबर की गर्मी ठंडी पड़ चुकी थी. चिराग भी इस बात से सहमत नजर आए और उन्होंने कहा,“हां, इस खेल की मार्केटिंग बेहतर होनी चाहिए. हमने लगभग हर बड़ी उपलब्धि हासिल की है. आने वाली पीढ़ी के लिए जरूरी है कि हम अपनी आवाज उठाएं और खुद को सामने रखें. चिराग की ये बातें झकझोरने वाली थी, एक ऐसा सच, जो हमें आईना दिखाता हैअगर हम अपने खिलाड़ियों को समय पर सम्मान नहीं दे पाए, तो आने वाले कल में शायद हमारे पास गर्व करने के मौके भी कम हो जाएंगे.

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Rajeev MishraAssociate editor

मैं, राजीव मिश्रा, वर्तमान में नेटवर्क 18 में एसोसिएट स्पोर्ट्स एडिटर के रूप में कार्यरत हूँ. इस भूमिका में मैं डिजिटल स्पोर्ट्स कंटेंट की योजना, संपादकीय रणनीति और एंकरिंग की जिम्मेदारी निभाता हूँ. खेल पत्रका…और पढ़ें

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