Last Updated:
Delhi Designers Success Story: उत्तर प्रदेश के मोहम्मद आलम ने दिल्ली में दर्जी की छोटी सी दुकान से शुरुआत की जिसे बाद में उनके बेटों ने ज्वॉइन कर लिया. आज वे शहर के बड़े डिजाइनर्स में शामिल हो चुके हैं और पिता संग दो पुत्रों की ये तिकड़ी साल में करोड़ों का टर्नओवर कर रही है.
दिल्ली: भारत देश में अलग-अलग तरह की ऐसी सफलता की कहानियां हैं, जो आपको हैरान भी कर देंगी और उत्साह से भी भर देंगी. ऐसी ही एक कहानी उत्तर प्रदेश से आकर दिल्ली में बसे एक पिता और उनके दो बेटों की है, जिन्हें दर्जी का काम करते हुए कई पीढ़ियां हो गई थीं. लेकिन फिर उन्होंने अपने घर में पीढ़ियों से चलते आ रहे इस काम में ऐसी महारत हासिल की कि अब देश-विदेश के बड़े डिजाइनर जैसे सब्यसाची और अन्य कई लोग उनके काम को देखकर दंग रह जाते हैं. वहीं पिता और पुत्रों की यह फैशन डिजाइनर्स की तिकड़ी इस वक्त देश-विदेश के टॉप डिजाइनर्स की सूची में अपना नाम दर्ज करा चुकी है. आइए आपको आगे विस्तार से इनकी पूरी कहानी बताते हैं.
पीढ़ियों से कर रहे हैं दर्जी का काम, 1985 में दिल्ली आकर शुरू की थी दुकान
मोहम्मद आलम ने हमें बताया कि वह उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं और उनकी कई पीढ़ियां शुरुआत से ही दर्जी का काम करती आ रही हैं. वह जिस बिरादरी से आते हैं, उन्हें दर्जी ही कहा जाता है और वह इसी काम से जुड़े रहे हैं. इसलिए उन्होंने अपने दादाजी से इस काम को सीखना शुरू किया था और फिर 1985 में दिल्ली आकर दर्जी का काम शुरू किया.
उनका कहना था कि उन्होंने पहले कई बड़े ब्रांड के लिए यहां दिल्ली में रहकर फैब्रिक बनाना शुरू किया था, जिसके बाद उन्होंने जनकपुरी इलाके में एक छोटी सी दर्जी की दुकान खोली. इसके बाद उनके पास कई ग्राहक अलग-अलग तरह के सूट बनवाने आने लगे.
धीरे-धीरे उनका काम चल पड़ा और वह थोड़े बहुत प्रसिद्ध भी हो गए. उनका कहना था कि इसी पहचान के बाद उन्हें एक बार राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद जी के कपड़े बनाने का ऑर्डर मिला और फिर उन्होंने उनके लिए कई कपड़े बनाए. उनका यह भी कहना था कि इसके अलावा भी कई बड़े नेता और सेलिब्रिटीज उनसे उस समय कपड़े बनवाते थे.
बेटों ने संभाला काम, फिर ₹2300 से करोड़ों तक पहुंचा टर्नओवर
मोहम्मद आलम के बड़े बेटे शाहबाज आलम ने बताया कि उन्होंने अपने पिता का काम दिल्ली की पर्ल अकादमी से फैशन डिजाइनिंग सीखने के बाद संभाल लिया था. इसके बाद उनके पिता ने उन्हें इस काम को आगे बढ़ाने और इसे बड़ा ब्रांड बनाने के लिए कहा. फिर उन्होंने जनकपुरी की छोटी सी गली से निकलकर जनकपुरी के मुख्य बाजार में ‘ हाउस ऑफ आलम’ के नाम से बड़ा शोरूम बनाया.
शाहबाज का कहना था कि यहीं से चीजें बदलनी शुरू हुईं. फिर उनका छोटा भाई फैजान आलम, जिसने निफ्ट से फैशन डिजाइनिंग का कोर्स किया और बाद में लंदन जाकर फैशन डिजाइनिंग की पढ़ाई की, वापस भारत लौटा और उसने इस ब्रांड को और भी बड़ा बना दिया.
सेलिब्रिटीज पहनने लगे कपड़े
उनका कहना था कि इसके बाद मनोज बाजपेयी से लेकर नील नितिन मुकेश और कई बड़े सेलिब्रिटीज ने उनके कपड़े पहनने शुरू किए. यहां तक कि लैक्मे फैशन वीक में भी कई सेलिब्रिटी उनके डिजाइन किए कपड़े पहनकर रैंप पर चलते नजर आए. इसके बाद उनका ब्रांड काफी बड़ा बन चुका है. हालांकि जहां यह बड़े सेलिब्रिटीज के लिए महंगे कपड़े डिजाइन करते हैं, वहीं मध्यम वर्ग के लोगों के लिए भी इनके पास अच्छी-खासी रेंज मौजूद है. यही वजह है कि सेलिब्रिटीज के अलावा आम लोग भी इनके पास अपने कपड़े बनवाने आते हैं.
करोड़ों में टर्नओवर
हम आपको यह भी बता दें कि देश-विदेश के कई बड़े डिजाइनर्स के बीच अब इन दोनों भाइयों और उनके पिता का नाम भी लिया जाता है. अंत में जब हमने शाहबाज से पूछा कि उनके पिता कितने रुपये में एक सूट तैयार कर दिया करते थे और अब उनका क्या टर्नओवर है, तो उनका कहना था कि पिता के समय में ₹2300 में एक अच्छा-खासा सूट तैयार हो जाया करता था, लेकिन अब चीजें महंगी हो गई हैं और उसी हिसाब से उनके इस ब्रांड का टर्नओवर भी अब करोड़ों में पहुंच चुका है.
About the Author
बुंदेलखंड यूनिवर्सिटी से मास कम्यूनिकेशन एंड जर्नलिज़्म में मास्टर्स, गोल्ड मेडलिस्ट. पत्रकारिता का सफर दैनिक जागरण से शुरू हुआ, फिर प्रभात खबर और ABP न्यूज़ से होते हुए News18 Hindi तक पहुंचा. करियर और देश की …और पढ़ें
