PM मोदी, ट्रंप या पुतिन, किसके प्लेन में आती है शाही फीलिंग, सोने से मढ़े हैं बाथरूम और सिंहासन जैसी हैं सीटें

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PM मोदी, ट्रंप या पुतिन, किस प्लेन में आती है शाही फीलिंग, कौन है सबसे ताकतवर

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आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जिस प्‍लेन से पांच देशों की छह दिवसीय यात्रा के लिए रवाना हुए हैं, वह इंडिया वन एयरक्राफ्ट है. यह एयरक्राफ्ट दुनिया के उन प्‍लेन्‍स में शामिल है, जिसकी गिनती दुनिया के दूसरे सबसे ताकतवर एयरक्राफ्ट के तौर पर होगी है. इसके अलावा, रूस और जर्मनी के राष्‍ट्राध्‍यक्षों के कैसे हैं एयरक्राफ्ट, आइए जानते हैं. 

ये हैं दुनिया के पांच सबसे ताकतवर एयरक्राफ्ट. इनकी गिनती अभेद्य किले के तौर पर होती है.

Best PM-President Plane: दुनिया के ताकतवर नेता जिन प्लेन में सफर करते हैं, वे महज प्लेन नहीं होते, बल्कि उड़ते हुए किले, चलते-फिरते महल और आसमान में उड़ते कमांड सेंटर की तरह होते हैं. कोई प्लेन सिक्योरिटी में दुनिया भर में अव्वल है, तो कोई अपनी शाही सजावट के लिए मशहूर है. अमेरिका का एयर फोर्स वन न्यूक्लियर हमले के बाद भी उड़ने की ताकत रखता है, जबकि रूस का फ्लाइंग क्रेमलिन सोने से बने बाथरूम और संगमरमर के फर्श के साथ एक उड़ता हुआ राजमहल है. भारत का इंडिया वन आधुनिक तकनीक और संतुलित सुविधाओं के लिए जाना जाता है, तो सऊदी अरब का रॉयल फ्लीट 24 कैरेट सोने से जड़ा हुआ है. जर्मनी और ब्रिटेन ने अपने प्लेन में किफायत और सादगी को तरजीह दी है.

अगर सिक्योरिटी की बात करें, तो अमेरिका का एयर फोर्स वन दुनिया का सबसे सिक्योर प्लेन है. इसमें ईएमपी शील्डिंग और मिसाइल जैमिंग जैसी सैन्य तकनीकें लगी हैं, जो इसे लगभग अजेय बनाती हैं. वहीं, रूस का फ्लाइंग क्रेमलिन किसी बादशाह के महल जैसा है. इसमें सोने के नल, क्रिस्टल झाड़-फानूस और राजसी सिंहासन जैसी सीटें हैं. भारत का इंडिया वन नई LAIRCM मिसाइल डिफेंस जैसी तकनीक से लैस है और लंबी दूरी की उड़ानों में माहिर है. सऊदी अरब का प्लेन विलासिता की बेहतरीन नमूना है. इसके हर कोना सोने और संगमरमर से सजा है. जर्मनी का एयरबस A350 सबसे फ्यूल एफिशिएंट और एनवायरमेंट फ्रेंडली है, जबकि ब्रिटेन का वॉयेजर खुद हवा में दूसरे प्लेन को रिफ्यूलिंग की क्षमता रखता है. चलिए, अब हर एक प्लेन के बारे में विस्तार से समझते हैं.

अमेरिका का एयर फोर्स वन (बोइंग VC-25A)

  1. न्यूक्लियर हमला से भी सिक्योर: यह प्लेन दुनिया का इकलौता ऐसा प्रेसिडेंट प्लेन है जो न्यूक्लियर विस्फोट के बाद आने वाली विद्युत चुंबकीय तरंगों से पूरी तरह सिक्योर है. इसके तारों और इलेक्ट्रॉनिक्स को इस तरह तैयार किया गया है कि अगर दुश्मन न्यूक्लियर बम गिरा भी दे, तब भी यह प्लेन हवा में रहेगा और प्रेसिडेंट दुनिया को कमांड जारी करते रहेंगे.
  2. हवा में हो सकती है रिफ्यूलिंग: एयर फोर्स वन को हवा में ही रिफ्यूलिंग की जा सकती है. मतलब, अगर प्रेसिडेंट चाहें तो यह प्लेन लगातार तीन दिन, तीन रात या एक हफ्ते तक बिना उतरे उड़ सकता है. इसकी रेंज अनलिमिटेड है. दुनिया में कहीं भी कोई इमरजेंसी हो, यह बिना किसी देश की परमिशन के लैंड किए वहां पहुंच सकता है. यह क्षमता केवल अमेरिका और ब्रिटेन के पास ही है.
  3. बेहतरीन मिसाइल डिफेंस: इस प्लेन में लेजर जैमर, फ्लेयर्स और चॉफ सिस्टम लगे हैं. अगर कोई दुश्मन मिसाइल इस पर दागता है, तो यह सिस्टम तुरंत एक्टिव हो जाता है. फ्लेयर्स मिसाइल को गर्मी का फेक टारगेट दिखाते हैं, जबकि चॉफ रडार को चकमा देते हैं. यानी दुश्मन की मिसाइलें एयर फोर्स वन से टकराने की जगह कहीं और जा गिरेंगी. यह तकनीक लड़ाकू प्लेन में लगती है, लेकिन एयर फोर्स वन एक बड़ा प्लेन होने के बावजूद यह क्षमता रखता है.
  4. प्लेन में है ऑपरेशन थिएटर: एयर फोर्स वन के अंदर एक पूरा हॉस्पिटल है. इसमें दो डॉक्टरों के लिए अलग जगह है, एक ऑपरेशन टेबल है, दिल की सर्जरी करने वाली मशीनें हैं और एक मिनी वेंटिलेटर भी है. अगर प्रेसिडेंट को बीच उड़ान में दिल का दौरा पड़ जाए या कोई एक्सीडेंट हो जाए, तो हवा में ही उनका ऑपरेशन किया जा सकता है. यह सुविधा किसी और प्रेसिडेंट प्लेन में इतनी एडवांस नहीं है.
  5. 85 फोन लाइनें और सिक्योर कम्युनिकेशन: इस प्लेन में 85 अलग-अलग टेलीफोन लाइनें हैं. इनमें से कुछ साधारण हैं, लेकिन कुछ ऐसी एन्क्रिप्टेड लाइनें हैं जिन्हें दुनिया का कोई हैकर हैक नहीं कर सकता है. प्रेसिडेंट इस प्लेन से दुनिया के किसी भी देश के नेता से बात कर सकते हैं, सेनाओं को ऑर्डर दे सकते हैं, यहां तक न्यूक्लियर हमले का आदेश भी जारी कर सकते हैं. इसे उड़ता हुआ मिनी व्हाइट हाउस कहा जाता है.

भारत- एयर इंडिया वन (बोइंग 777-300ER)

  1. दुनिया की सबसे एडवांस मिसाइल डिफेंस: इंडिया वन में लार्ज एयरक्राफ्ट इंफ्रारेड काउंटरमेशर्स (LAIRCM) सिस्टम लगा है. यह कोई साधारण जैमर नहीं है, बल्कि यह लेजर से दुश्मन की हीट-सीकिंग मिसाइलों के सेंसर को अंधा कर देता है. भारत ने यह सिस्टम अमेरिका से 190 मिलियन डॉलर (लगभग 1,500 करोड़ रुपये) में खरीदा था. यह वही सिस्टम है जो अमेरिकी एयर फोर्स वन में लगता है. यानी सिक्योरिटी के मामले में इंडिया वन अमेरिका के बाद दूसरे नंबर पर है.
  2. सेल्फ प्रोटेक्शन सूट: इस प्लेन में एक खास एसपीएस सिस्टम लगा है, जो दुश्मन के रडार सिग्नल्स को पकड़ता है और उन्हें जाम कर देता है. यानी अगर कोई दुश्मन देश इस प्लेन को अपने रडार पर ट्रैक कर रहा है, तो यह सिस्टम उसके रडार पर जाम कर देता है. प्लेन या तो रडार से गायब हो जाता है या फिर उसकी गलत लोकेशन दिखाई देती है.
  3. लंबी दूरी की शानदार क्षमता: बोइंग 777-300ER दुनिया के सबसे भरोसेमंद लंबी दूरी के प्लेन में से एक है. यह लगातार 17 घंटे तक उड़ सकता है और करीब 17,500 किलोमीटर की दूरी तय कर सकता है. इसी वजह से पीएम मोदी दिल्ली से सीधे वाशिंगटन, लंदन या टोक्यो बिना कहीं रुके जा सकते हैं. इससे समय की बचत होती है और सिक्योरिटी भी बढ़ जाती है, क्योंकि बीच में किसी दूसरे देश में लैंडिंग नहीं करनी पड़ती.
  4. आधुनिक इंटीरियर: फाइव स्टार होटल जैसा: इंडिया वन के अंदर आपको सोने के नल नहीं मिलेंगे, लेकिन यह बेहद स्टाइलिश और आरामदायक है. इसमें हल्के रंगों की लकड़ी की पॉलिश, मुलायम लेदर की सीटें और सॉफ्ट लाइटिंग है. पीएम मोदी के लिए एक प्राइवेट सुइट है, जहां वह आराम कर सकते हैं. इसके अलावा एक कॉन्फ्रेंस रूम है, जहां मंत्रियों के साथ बैठक होती है. सब कुछ बेहद प्रोफेशनल और बैलेंस्‍ड है, न ज्यादा दिखावा है, न ज्यादा सादगी है.
  5. वीवीआईपी सिक्योरिटी और मेडिकल सुविधा: इस प्लेन में एक छोटा लेकिन पूरा मेडिकल सूट है. इसमें एक बेड, एक वेंटिलेटर, एक ईसीजी मशीन और जरूरी दवाइयां रखी जाती हैं. एक डॉक्टर और एक पैरामेडिक हमेशा उड़ान में साथ रहते हैं. अगर पीएम को बीमारी हो जाए या कोई अटैक आए, तो प्राथमिक इलाज हवा में ही हो सकता है. साथ ही, पूरे प्लेन में एडवांस सैटेलाइट फोन और इंटरनेट है, ताकि पीएम दुनिया के किसी भी कोने से कमांड दे सकें.

रूस- इल्यूशिन Il-96-300PU (फ्लाइंग क्रेमलिन)

  1. 24 कैरेट सोने से मढ़े हैं बाथरूम: रूस के इस प्लेन में शौचालय जाना भी शाही फीलिंग वाला है. यहां के नल, साबुनदानी, तौलिया रखने वाले होल्डर, यहां तक कि टॉयलेट सीट तक 24 कैरेट के असली सोने से मढ़ी गई हैं. फर्श पर इतालवी संगमरमर लगा है. यानी पूरी जारशाही महल जैसी फीलिंग इस प्लेन में मिली है. यह दुनिया का सबसे कीमती प्लेन है.
  2. राजसी सिंहासन जैसी सीटें: प्रेसिडेंट पुतिन जिस सीट पर बैठते हैं, वह एक सिंहासन की तरह है. इस सिंहासन पर मखमल का कपड़ा लगा है. उस पर सोने के धागों से बेलबूटे कढ़े गए हैं और आर्मरेस्ट में हाथी दांत की लकड़ी लगी है. यह प्लेन रूस की पुरानी जारशाही की ताकत को दिखाता है.
  3. क्रिस्टल झाड़-फानूस और संगमरमर के फर्श: आमतौर पर क्रिस्टल झाड़-फानूस (चांडेलियर्स) किसी महल या फाइव स्टार होटल के लाउंज में लगते हैं. लेकिन पुतिन के प्लेन की छत पर बेल्जियम के क्रिस्टल के झाड़-फानूस लटकते हैं, जो रोशनी में सात रंग बिखेरते हैं. फर्श पर संगमरमर लगा है, दीवारों पर सोने की पत्तरें चढ़ी हैं. यह कोई हवाई जहाज नहीं, बल्कि सच में उड़ता हुआ क्रेमलिन महल है.
  4. जिम और बार और हवा में पूरा रिज़ॉर्ट: 40,000 फीट की ऊंचाई पर उड़ते हुए इस प्लेन के अंदर एक पूरा जिम है, जहां पुतिन कसरत कर सकते हैं. एक लकड़ी का रूसी सौना है, जहां बैठकर वह तनाव दूर कर सकते हैं. इस प्लेन में एक छोटा सा बार भी है जहां दुनिया की सत्ता पर चर्चा करते हुए शाम की व्हिस्की पी जाती है. कोई दूसरा प्रेसिडेंट प्लेन इतनी मौज-मस्ती वाला नहीं है.
  5. न्यूक्लियर कमांड सिस्टम: यह प्लेन सिर्फ आलीशान नहीं है, बल्कि यह रूस की न्यूक्लियर ताकत का कमांड सेंटर भी है. इसमें ‘चेगेट’ नाम का न्यूक्लियर ब्रीफकेस सिस्टम लगा है. अगर रूस पर किसी ने हमला किया या क्रेमलिन तबाह हो गया, तो पुतिन इसी प्लेन से हवा में बैठे-बैठे न्यूक्लियर मिसाइलें दागने का आदेश दे सकते हैं. यह शाही ठाठ के साथ-साथ खतरनाक ताकत भी है.

जर्मनी- कॉनराड आडेनॉयर (एयरबस A350)

  1. दुनिया का सबसे फ्यूल एफिशिएंट प्रेसिडेंट प्लेन: यह प्लेन एयरबस की सबसे नई और एडवांस A350 सीरीज पर बना है. यह पुराने प्लेन की तुलना में 25% कम फ्यूल कंज्यूम करता है. इससे 25% कम कार्बन एमिशन होता है. जर्मनी ने इसे इसलिए चुना क्योंकि वह एनवायरमेंट के प्रति जागरूक देश है. दूसरे प्रेसिडेंट प्लेन जहां फ्यूल को लगभग सोखते हैं, यह कम से कम धुआं उड़ाता है. यानी यह ग्रीन और सस्ता प्लेन है.
  2. यूरोपियन मिनिमलिस्ट डिजाइन: जहां रूस और सऊदी में सोने के नल लगे हैं, वहीं जर्मनी के इस प्लेन में सादगी को तरजीह दी गई है. इसके अंदर साफ-सुथरे रंग, हल्की लकड़ी की पॉलिश और आरामदायक मगर कम दिखावटी फर्नीचर है. यह किसी यूरोपियन लग्जरी होटल के कमरे जैसा लगता है, न कि महल जैसा. जर्मनी मानता है कि पैसे की बचत और वर्क एफिशिएंसी ज्यादा जरूरी है.
  3. मॉडर्न मिसाइल डिफेंस सिस्टम: हालांकि जर्मनी अमेरिका की तरह न्यूक्लियर वॉर की तैयारी नहीं करता, फिर भी इस प्लेन में नवीनतम मिसाइल डिफेंस लगी है. इसमें लेजर जैमर, इंफ्रारेड काउंटरमेशर्स और बेहतरीन रडार वॉर्निंग सिस्टम है. यह दुश्मन की गर्मी से चलने वाली या रडार से चलने वाली मिसाइलों को बेअसर कर सकता है. यह एयरक्राफ्ट पूरी तरह से सेल्फ-रिलायंट सिक्योरिटी कवच है.
  4. लंबी दूरी की बिना रुके उड़ान: एयरबस A350 की रेंज 18,000 किलोमीटर से ज्यादा है. यानी यह बिना रुके बर्लिन से टोक्यो या बर्लिन से सिडनी सीधी उड़ान भर सकता है. इसकी उड़ान अवधि करीब 18-19 घंटे लगातार है. इसे बिच में किसी दूसरे देश में उतरने की जरूरत नहीं पड़ती.
  5. हैकप्रूफ कम्‍युनिकेशन सिस्‍टम: जर्मनी के चांसलर इस प्लेन से दुनिया के किसी भी कोने से अपनी गवर्नमेंट और सेना से सिक्योर बात कर सकते हैं. इसमें एडवांस एन्क्रिप्शन लगी है, जिसे आज तक कोई हैकर नहीं तोड़ पाया. यह यूरोपीय सिक्योरिटी नेटवर्क से जुड़ी है और इसमें सैटेलाइट फोन भी लगे हैं. यानी दुश्मन चाहे कितनी भी कोशिश कर ले, वे चांसलर की बातें नहीं सुन सकते हैं.

सऊदी अरब- बोइंग 747 (रॉयल फ्लीट)

  1. सचमुच का उड़ता हुआ महल: सऊदी के राजा का प्लेन दुनिया का सबसे दिखावटी प्लेन है. इसके अंदर के दरवाजों के हैंडल, अलमारियों के नॉब, लाइट्स के फ्रेम, यहां तक कि एसी के वेंट तक 24 कैरेट के सोने से मढ़े हुए हैं. इस प्लेन में चारों तरफ सोने की चमक दिखाई देती है. यह कोई हवाई जहाज नहीं, बल्कि एक उड़ता हुआ सोने का महल है.
  2. संगमरमर के फर्श और सीढ़ियां: आमतौर पर हवाई जहाज में फर्श हल्के कार्पेट का होता है, लेकिन सऊदी के प्लेन में इतालवी संगमरमर से फर्श बना है. इतना ही नहीं, इस प्लेन के अंदर ही संगमरमर की छोटी सीढ़ियां भी बनी हैं, ताकि एक लेवल से दूसरे लेवल तक जाने में तकलीफ न हो. यह उतना ही शानदार है जितना कोई शाही महल.
  3. राजसी थ्रोन रूम: इस प्लेन के अंदर एक खास कमरा है जिसे ‘थ्रोन रूम’ कहते हैं. इसमें एक विशाल सिंहासन (थ्रोन) लगा है, जो पूरी तरह सोने और लाल मखमल से बना है. सउदी प्रिंस जब इस पर बैठते हैं, तो उनके सामने सुनहरी मेज होती है, दीवारों पर सोने की नक्काशी होती है और क्रिस्टल के झाड़-फानूस झिलमिलाते हैं. यह कमरा ऐसा है जैसे अरब के किसी किस्से से निकला हो.
  4. प्लेन के अंदर लिफ्ट): इस विशाल बोइंग 747 में एक छोटा सा एलिवेटर लगा है, ताकि सीढ़ियां चढ़ने की जरूरत न पड़े. यह प्लेन के दो डेक को जोड़ता है. प्रिंस अपने सुइट से सीधे लिफ्ट में बैठते हैं और कॉन्फ्रेंस रूम या थ्रोन रूम में पहुंच जाते हैं. दुनिया के किसी और प्रेसिडेंट प्लेन में ऐसी सुविधा नहीं है.
  5. प्राइवेट मस्जिद, हॉस्पिटल और सिनेमा हॉल: सऊदी के इस प्लेन में प्राइवेट मस्जिद है, जहां वह आराम से नमाज पढ़ सकते हैं. एक छोटा लेकिन पूरा हॉस्पिटल है, जहां दो डॉक्टर और दो नर्स हमेशा तैनात रहते हैं. और मनोरंजन के लिए एक सिनेमा हॉल है, जहां बड़ी स्क्रीन पर फिल्में दिखाई जाती हैं. इसमें पांच शाही सुइट हैं, हर सुइट में सोने का बाथरूम और अलग लिविंग रूम है.

दुनिया का सबसे सिक्योर प्रेसिडेंट प्लेन कौन सा है और क्यों?
दुनिया का सबसे सिक्योर प्रेसिडेंट प्लेन अमेरिका का एयर फोर्स वन (VC-25A) है. इसकी सबसे बड़ी खासियत ईएमपी शील्डिंग है, यानी न्यूक्लियर हमले के बाद आने वाली विद्युत चुंबकीय तरंगें भी इसके इलेक्ट्रॉनिक्स को नुकसान नहीं पहुंचा सकतीं हैं. इसके अलावा, यह हवा में फ्यूल भर सकते हैं, जिससे इसकी रेंज अनलिमिटेड हो जाती है. इसमें लेजर जैमर, फ्लेयर्स और चॉफ जैसे एडवांस डिफेंस सिस्टम हैं, जो दुश्मन की किसी भी मिसाइल को बेअसर कर देते हैं. यह एक उड़ता हुआ किला है, जिसे भेद पाना लगभग नामुमकिन है.

सबसे मॉडर्न और नई तकनीक किस प्लेन में है?
सबसे मॉडर्न तकनीक के मामले में भारत का इंडिया वन (बोइंग 777) और जर्मनी का कॉनराड आडेनॉयर (एयरबस A350) दोनों काबिल हैं. भारत के प्लेन में LAIRCM नाम की अमेरिकी मिसाइल डिफेंस लगी है, जो सबसे एडवांस तकनीकों में से एक है. जर्मनी का A350 एयरबस की बिल्‍कुल नई सीरीज है, जिसमें कम फ्यूल, कम शोर और बेहतर रेंज जैसी सुविधाएं हैं. भारत का प्लेन 2020 में इंडक्ट हुआ और जर्मनी का 2022 में, इसलिए दोनों ही पुराने अमेरिकी एयर फोर्स वन से तकनीकी तौर पर नए हैं.

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Anoop Kumar MishraAssistant Editor

Anoop Kumar Mishra is currently serving as Assistant Editor at News18 Hindi Digital, where he leads coverage of strategic domains including aviation, defence, paramilitary forces, international security affairs…और पढ़ें

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