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Ghaziabad ki local : ये घटना इंदिरापुरम अभयखंड-1 की है. घर के बाहर नगर निगम की ओर से खोदे गए नाले में 70 वर्षीय बुजुर्ग लड़खड़ाकर गिर गईं. करीब आधे घंटे तक अंदर फंसी रहीं. हाथ, पैर, कमर और कंधे में गंभीर चोटें आई हैं. घर के बाहर नाला निर्माण के लिए 15 दिन पहले नगर निगम ने रैंप तोड़ दिया था. नाला गहरा होने के कारण बुजुर्ग खुद से बाहर नहीं निकल पाईं. नगर निगम की लापरवाही पर सवाल उठ रहे हैं.
गाजियाबाद के इसी नाले में गिरीं बुजुर्ग.
गाजियाबाद. दिल्ली से सटे यूपी के गाजियाबाद स्थिति इंदिरापुरम अभयखंड-1 में नगर निगम की जानलेवा लापरवाही देखने को मिली है. घर के बाहर नगर निगम की ओर से खोदे गए नाले में 70 वर्षीय बुजुर्ग सीता देवी गिर गईं. पैर फिसलने से नाले में गिरीं बुजुर्ग करीब आधे घंटे तक अंदर फंसी रहीं. शोर सुनकर पहुंचे पड़ोसियों ने बांस की सीढ़ी लगाकर उन्हें बाहर निकाला. हादसे में सीता देवी के हाथ, पैर, कमर और कंधे में गंभीर चोटें आई हैं. परिजन उन्हें अस्पताल ले गए. घटना शनिवार सुबह करीब 11 बजे की है. बुजुर्ग की बहू स्वाती ने बताया कि उनकी सास रोज की तरह मंदिर में पूजा के लिए घर से निकल रही थीं. घर के बाहर सीसी नाला निर्माण के लिए 15 दिन पहले नगर निगम ने खुदाई की थी और रैंप तोड़ दिया था.
कड़ी मशक्कत के बाद निकाल पाए बाहर
घर से निकलते ही उनका पैर फिसल गया और वह खुले नाले में जा गिरीं. नाले में गिरते ही उन्होंने शोर मचाया. आवाज सुनकर स्वाती और आसपास के लोग घरों से बाहर निकले. नाला गहरा होने के कारण बुजुर्ग खुद से बाहर नहीं निकल पा रहीं थीं. करीब आधे घंटे की मशक्कत के बाद पड़ोसियों की मदद से बांस की सीढ़ी के जरिए उन्हें बाहर निकाला गया. स्वाती ने बताया कि बाहर निकालते ही उनकी स्वास्थ्य जांच कराई गई. बुजुर्ग के हाथ, पैर के साथ ही कमर और कंधे में चोट आई है. कंधे में फ्रैक्चर की आशंका के चलते डॉक्टरों ने एक्स-रे कराने को कहा है.
गुरुग्राम में भी ऐसा ही हादसा
ऐसा ही हादसा पिछले दिनों हरियाणा के गुरुग्राम में देखने को मिला था. गुरुग्राम के सुशांत लोक-1 के गलेरिया रोड पर एक महिला प्रोफेसर की कार अचानक सड़क पर बने एक गहरे गड्ढे में गिर गई. आसपास मौजूद लोगों ने उन्हें सुरक्षित बाहर निकाल लिया. बाद में JCB की मदद से कार को निकाला गया. यह गड्ढा कोई नया नहीं था, बल्कि करीब 15 दिनों से खुला पड़ा था. यहां नाले का काम चल रहा था लेकिन न तो कोई चेतावनी बोर्ड लगाया गया था और न ही कोई सुरक्षा इंतजाम किया गया था. हादसे के अगले ही दिन इस गड्ढे को भर दिया गया.
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प्रियांशु गुप्ता बीते 10 साल से भी ज्यादा समय से पत्रकारिता में सक्रिय हैं. 2015 में भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC), दिल्ली से जर्नलिज्म का ककहरा सीख अमर उजाला (प्रिंट, नोएडा ऑफिस) से अपने करियर की शुरुआत की. य…और पढ़ें
