Chilli Gardening: बालकनी या किचन में भी मिर्च उगाने के लिए किस साइज का ग्रो बैग है बेस्ट? जानिए मिट्टी और धूप का सही गणित

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Chilli Gardening: शहरों में सीमित जगह और महंगे सब्जियों के बीच अब लोग घर पर ही मिर्च उगाने की ओर तेजी से बढ़ रहे हैं. भारत में किचन गार्डनिंग का यह नया ट्रेंड ग्रो बैग की मदद से और भी आसान हो गया है. हल्के, सस्ते और पोर्टेबल इन ग्रो बैग्स में बिना जमीन के भी मिर्च की भरपूर खेती संभव है. सही मिट्टी मिश्रण, धूप और नियमित देखभाल के साथ कोई भी शख्स बालकनी, छत या छोटे से आंगन में ताजी हरी मिर्च उगा सकता है. आज हम बता रहे हैं ग्रो बैग से जुड़ी आसान गार्डनिंग टिप्स.

Chilli Gardening: मिर्च भारतीय किचन का एक जरूरी हिस्सा है, जो किसी भी डिश में तुरंत तीखापन और स्वाद जोड़ देती है. बाजार के चक्कर लगाने से बचने के लिए, आप हमारी हरी भरी पतली और तीखी मिर्चियों को घर पर आसानी से उगाई जा सकती हैं और मजे की बात यह है कि आप इसे किचन में भी उगा सकते हैं. अगर आपको ताजी और तीखी मिर्च से खाना बनाना पसंद है लेकिन आपके पास बड़ा गार्डन नहीं है तो ग्रो बैग में मिर्च उगाना सबसे अच्छा तरीका है. ग्रो बैग हल्के, सस्ते और अच्छी ड्रेनेज वाले होते हैं, जो मिर्च के पौधों को बहुत पसंद आते हैं. ग्रो बैग में मिर्च उगाने से ना सिर्फ जगह की बचत होती है, बल्कि पौधों को ज्यादा फल देने के लिए बेहतरीन माहौल भी मिलता है. साथ ही बाजार में केमिकल वाली मिर्च से भी बच सकते हैं. यहां कुछ आसान स्टेप्स दिए गए हैं, जिनसे आप घर पर ग्रो बैग में हरी मिर्च उगा सकते हैं:

सही ग्रो बैग और मिर्च की किस्म चुनें – एक मिर्च के पौधे के लिए कम से कम 20 लीटर क्षमता वाला ग्रो बैग लें या एक बैग में तीन छोटे पौधे भी लगा सकते हैं. ध्यान रखें कि उसमें अच्छे ड्रेनेज होल्स हों, ताकि पानी जमा ना हो पाए. मिर्च उगाने की लिए, ऐसे पौधे चुनें जो कंटेनर में अच्छे से बढ़ते हैं, जैसे न्यूमैक्स ट्वाइलाइट, जलापेनो या थाई ग्रीन. अगर आपको तीखा खाना पसंद है तो भूत जोलोकिया या रेड चिली ट्राई करें. अगर आप पहली बार किचन में मिर्च उगाना चाहते हैं तो ग्रीन चिली या जलापेनो सबसे आसान और लगातार फल देने वाली मिर्च की किस्म होती हैं. इन तरह की किस्म को आसानी से गर्मियों के मौसम में भी उगाई जा सकती हैं.

ग्रो बैग के लिए सही मिट्टी तैयार करें – मिर्च को हल्की, पानी जल्दी निकलने वाली मिट्टी पसंद है, जो नम रहे लेकिन गीली ना हो. 50% गार्डन सॉयल, 30% कंपोस्ट या कोकोपीट और 20% वर्मीक्यूलाइट या पर्लाइट मिलाएं, जिससे पानी और हवा दोनों अच्छे से मिलें. अंडे के छिलके पीसकर मिलाएं, जिससे कैल्शियम और फॉस्फोरस मिलेगा, जो फल बढ़ाने और कीड़ों से बचाने में मदद करता है. आप इसमें अच्छी तरह सड़ी हुई गोबर की खाद या किचन वेस्ट कंपोस्ट भी मिला सकते हैं, जिससे पौधों को ज्यादा पोषण मिलेगा. ग्रो बैग को ऊपर से 3-4 इंच खाली छोड़ें, ताकि पानी देने की जगह रहे.

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धूप और पानी का ध्यान रखें – मिर्च के पौधों को रोजाना 6-8 घंटे की सीधी धूप चाहिए, इसलिए ग्रो बैग को धूप वाली छत, किचन, बालकनी या दक्षिण दिशा की खिड़की के पास रख दें. मिर्च को पानी देने के लिए सुबह की धूप सबसे अच्छी होती है, जिससे पौधे झुलसते नहीं है. जब मिट्टी की ऊपरी सतह सूखी लगे तब पानी देना चाहिए, आमतौर पर हर एक या दो दिन में पानी देते रहें. अगर चिलचिलाती गर्मी है तो सुबह और शाम को धूप देना अच्छा रहेगा.

रेगुलर रूप से कंपोस्ट डालते रहें – मिर्च के पौधों में सही मात्रा में कंपोस्ट या खाद डालना ना भूलें. अगर आप लिक्विड किचन वेस्ट फर्टिलाइजर या पोटैशियम वाली टमाटर खाद का इस्तेमाल कर सकते हैं. मिर्च के पौधे में हर 15 दिन में कंपोस्ट को हल्के से मिट्टी में मिलाएं, जड़ों को बिना हिलाए. जब फूल आने लगें तो हाई-पोटाश फर्टिलाइजर डालें, जिससे ज्यादा से ज्यादा फल आएंगे.

अधिक पैदावार के लिए छंटाई और कटाई करें – मिर्च के छोटे पौधे की नीचे की पत्तियां और शाखाएं काटते रहें, सिर्फ ऊपर की दो शाखाएं रखें, जिससे पौधा घना और मजबूत बना रहेगा. कुछ ऊंची किस्मों को सहारे के लिए बांस की छड़ी या ट्रेलिस की जरूरत पड़ सकती है. जब मिर्च मनचाहे आकार और रंग की हो जाए तो कैंची से काट दें. लेकिन ध्यान रखें कि खींचकर ना तोड़ें, ऐसा करना आपके लिए नुकसानदायक हो सकता है. मिर्च के पौधे की जितनी ज्यादा कटाई करेंगे, पौधा उतनी ही ज्यादा मिर्च देगा.

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