नई दिल्ली: नीट यूजी का जो एग्जाम 3 मई को हुआ था. वह अब पूरी तरह से रद्द किया जा चुका है. नीट 2026 अब 21 जून को होगा. नीट रद्द होने से लेकर इसकी नई तारीख के बीच जिन लाखों बच्चों ने इस एग्जाम को दिया था. वो भारी तनाव में चल रहे हैं. यही नहीं, स्टूडेंट्स सड़कों पर उतरकर प्रदर्शन कर रहे हैं और जगह-जगह अपना गुस्सा जाहिर कर रहे हैं. यह हालात भारत में पहली बार नहीं बने हैं, बल्कि आपको थोड़ा पीछे ले चलते हैं.
यह बात है 2015 की है. जब मेडिकल कॉलेज में एडमिशन लेने के लिए ऑल इंडिया प्री-मेडिकल टेस्ट (AIPMT) हुआ करता था. यह पेपर भी 2015 में लीक होने की वजह से रद्द हो गया था. उस वक्त इस एग्जाम में बैठे थे डॉक्टर शिविन चौधरी. उस वक्त जब पेपर रद्द होने से लाखों छात्रों के सपने डगमगा गए थे, उसी दौर से गुजरे डॉ. शिविन चौधरी ने हार मानने के बजाय अपनी तैयारी की रणनीति बदली और एक आसान सी ट्रिक अपनाकर दोबारा परीक्षा में शानदार रैंक हासिल की. डॉक्टर शिविन चौधरी ने लोकल 18 से खास बातचीत में अपने उस दौर के तनाव को साझा करते हुए कहा कि आज किस रणनीति को अपनाने की जरूरत नीट स्टूडेंट को है, यह भी खुलकर बताया.
पेपर रद्द होने से बढ़ गया था तनाव
डॉक्टर शिविन चौधरी ने बताया कि साल 2015 में जब ऑल इंडिया प्री-मेडिकल टेस्ट हुआ करता था. तब उन्होंने यह पेपर लिखा था. क्योंकि उनका सपना डॉक्टर बनने का था. जब वह पेपर देकर घर लौटे थे तो उन्होंने अपने नंबर जोड़कर देखा था तो उनके कुल नंबर 600 के करीब आ रहे थे. यह देखकर वह बेहद खुश हो गए थे. क्योंकि उनको पता था कि अब कोई ना कोई मेडिकल कॉलेज मिल जाएगा, लेकिन तभी कुछ वक्त बाद यह खबर मिली कि पेपर रद्द हो चुका है और एग्जाम की नई तारीखों की घोषणा जल्दी ही की जाएगी.
उस वक्त वह काफी डिप्रेशन में आ गए थे. तीन-चार दिन तो ऐसा लगा जैसे मानो दुनिया खत्म हो गई हो, लेकिन उसके बाद उन्होंने सोचा कि अब दोबारा फिजिक्स, बायोकेमेस्ट्री नहीं पढ़ी जाएगी. क्योंकि तैयारी के दौरान वह 17 से 18 बार इसकी तैयारी कर चुके थे तो उन्होंने अपनी रणनीति ही बदल दी.
पहले 600, बाद में आए 644 नंबर
डॉक्टर शिविन चौधरी ने बताया कि जब पहला पेपर उन्होंने दिया था तो उसमें उनके कुल नंबर 600 आ रहे थे, लेकिन जब पेपर रद्द हो गया और दोबारा उन्होंने पेपर दिया तो इनके कुल नंबर 644 आ गए थे, जिसने उन्हें 70वीं रैंक दिला दी थी. इस वजह से उन्हें देश का दूसरा बेस्ट मेडिकल कॉलेज यानी मौलाना आजाद मेडिकल कॉलेज मिल गया था. यहीं से उन्होंने अपनी एमबीबीएस की पढ़ाई पूरी की, लेकिन पेपर रद्द होने के बाद जी रणनीति को उन्होंने अपनाई उस पर बात करते हैं.
उन्होंने बताया कि जब पेपर रद्द हुआ था, 2015 में तो उन्होंने दोबारा किताबों को उठाकर नहीं पढ़ा था. बल्कि दिन में दो पेपर हल करने लगे थे. यानी मॉक टेस्ट के तौर पर और पिछले कई सालों के हर दिन दो पेपर हल करते थे. जब तक ऑल इंडिया प्री- मेडिकल टेस्ट की दूसरी नई तारीख आई, तब तक वह कई पेपर हल कर चुके थे और इसी से उन्हें काफी फायदा हुआ और आखिरकार उन्हें 644 नंबर मिला, जिस वजह से उनकी 70वीं भी रैंक बनी और मौलाना आजाद मेडिकल कॉलेज में एडमिशन मिल गया.
इस तरह करें तैयारी
डॉक्टर शिविन चौधरी ने बताया कि स्टूडेंट्स इस मौके को बर्बाद ना होने दें. बल्कि इसे अपना एक मॉक टेस्ट या प्रैक्टिकल समझ कर दे दें. खासतौर पर वह स्टूडेंट जिन्होंने ड्राप करने के बारे में इस बार सोचा था, क्या पता कि आपके अच्छे नंबर आ जाएं और इसी बार आपका सिलेक्शन हो जाए. जो स्टूडेंट गंभीरता से इस पेपर को इस बार लिख रहे थे. उनके लिए जरूरी है कि वह अब एक दिन में दो पेपर हल करना शुरू कर दें. और इसी रणनीति को अपनाते हुए 21 जून को होने वाले पेपर की तैयारी करें. फिर देखें कि उनके जो नंबर अभी बन रहे थे, उससे अच्छे नंबर आएंगे.
