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ब्रिटिश दौर की विरासत माने जाने वाले दिल्ली जिमखाना क्लब को खाली करने के नोटिस के बाद राजधानी की चर्चित क्लब संस्कृति फिर बहस के केंद्र में आ गई है. लुटियंस दिल्ली में स्थित यह प्रतिष्ठित क्लब सिर्फ मनोरंजन का केंद्र नहीं, बल्कि सत्ता, राजनीति, नौकरशाही और सामाजिक प्रभाव का प्रतीक भी माना जाता रहा है. केंद्र सरकार ने रक्षा और सुरक्षा जरूरतों का हवाला देते हुए क्लब को पांच जून तक परिसर खाली करने का निर्देश दिया है. इसके बाद दिल्ली के कई ऐतिहासिक क्लबों और सांस्कृतिक संस्थानों की भूमिका पर चर्चा तेज हो गई है.
दिल्ली जिमखाना क्लब: तीन जुलाई 1913 को ‘इंपीरियल दिल्ली जिमखाना क्लब’ के नाम से शुरू हुआ यह संस्थान ब्रिटिश अधिकारियों और सैन्य अफसरों के लिए बनाया गया था. आजादी के बाद इसके नाम से ‘इंपीरियल’ शब्द हटा दिया गया, लेकिन इसकी शाही पहचान बरकरार रही. सफदरजंग रोड स्थित इस क्लब की इमारतें 1930 के दशक में तैयार हुई थीं. लंबे समय तक यह क्लब देश के बड़े नेताओं, अफसरों, उद्योगपतियों और प्रभावशाली लोगों का पसंदीदा ठिकाना माना जाता रहा है.
दिल्ली गोल्फ क्लब: दिल्ली गोल्फ क्लब की शुरुआत ब्रिटिश शासन के दौरान 1930 के दशक में हुई थी. इसका मकसद अंग्रेज अधिकारियों और उच्च पदस्थ कर्मचारियों को मनोरंजन और खेल की सुविधा देना था. समय के साथ यह देश के सबसे प्रतिष्ठित गोल्फ क्लबों में शामिल हो गया. यहां सिर्फ खेल नहीं, बल्कि बड़े कारोबारी और राजनीतिक नेटवर्क भी तैयार होते रहे हैं. राजधानी की हाई-प्रोफाइल सोशल लाइफ में इस क्लब की अलग पहचान मानी जाती है.
प्रेस क्लब ऑफ इंडिया: संसद भवन के पास स्थित प्रेस क्लब ऑफ इंडिया की स्थापना 1957 में प्रसिद्ध संपादक दुर्गा दास ने की थी. यह क्लब देशभर के पत्रकारों और मीडिया पेशेवरों के लिए एक महत्वपूर्ण मंच बन गया. यहां कई ऐतिहासिक प्रेस कॉन्फ्रेंस, राजनीतिक बहसें और मीडिया से जुड़े बड़े फैसले हुए हैं. दिल्ली की पत्रकारिता संस्कृति में इस क्लब की खास जगह है और इसे मीडिया जगत की सबसे प्रभावशाली संस्थाओं में गिना जाता है.
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