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ऑनलाइन डेटिंग की दुनिया में एक नया ट्रेंड तेजी से फैल रहा है, जिसमें लोग अपनी असली नहीं बल्कि “परफेक्ट” दिखने वाली नकली छवि पेश कर रहे हैं. पहली नजर में सब कुछ शानदार लगता है, लेकिन बाद में सामने आती है ऐसी सच्चाई जो रिश्तों में बड़ा झटका दे सकती है. आइए जानते हैं नए टर्म पफर-फिशिंग के बारे में…
पफर-फिशिंग में लोग कैसे बनाते हैं रिश्ता.
आजकल मोबाइल और सोशल मीडिया ने रिश्तों का तरीका पूरी तरह बदल दिया है. पहले लोग आमने-सामने मिलकर एक-दूसरे को समझते थे, लेकिन अब ज्यादातर पहचान ऑनलाइन होने लगी है. इसी ऑनलाइन दुनिया में हर कुछ समय बाद रिश्तों से जुड़ा कोई नया चलन सामने आता है. अब एक नया नाम तेजी से चर्चा में है “पफर-फिशिंग”. सुनने में यह शब्द थोड़ा अलग लग सकता है, लेकिन इसका संबंध लोगों के दिखावे और झूठी छवि से जुड़ा है.
क्या होती है पफर-फिशिंग?
पफर-फिशिंग का मतलब है खुद को असलियत से ज्यादा बेहतर, आकर्षक या सफल दिखाना. कई लोग सोशल मीडिया या रिश्ते बनाने वाले ऐप्स पर अपनी ऐसी तस्वीरें डालते हैं जो बहुत ज्यादा बदली हुई होती हैं. कुछ लोग अपनी जिंदगी को जरूरत से ज्यादा शानदार दिखाते हैं, ताकि सामने वाला उनसे प्रभावित हो जाए. इसका नाम एक खास मछली “पफर फिश” से लिया गया है. यह मछली खतरा महसूस होने पर खुद को फुलाकर बड़ा दिखाने लगती है. ठीक उसी तरह कुछ लोग भी ऑनलाइन दुनिया में खुद को असली से ज्यादा खास दिखाने की कोशिश करते हैं.
लोग ऐसा क्यों करते हैं?
आजकल हर कोई चाहता है कि लोग उसे पसंद करें और उसकी तारीफ करें. इसी वजह से कई लोग अपनी कमियों को छिपाकर सिर्फ अच्छी बातें दिखाते हैं. कुछ लोगों को डर होता है कि अगर वे अपनी असली तस्वीर या असली जिंदगी दिखाएंगे तो शायद कोई उन्हें पसंद नहीं करेगा. सोशल मीडिया पर दूसरों की चमकदार जिंदगी देखकर भी लोग खुद को वैसा ही दिखाने की कोशिश करने लगते हैं. धीरे-धीरे यह आदत बन जाती है और लोग अपनी असली पहचान से दूर होने लगते हैं.
रिश्तों पर क्या असर पड़ता है?
शुरुआत में यह सब सामान्य लग सकता है, लेकिन बाद में सच्चाई सामने आने पर रिश्तों में परेशानी शुरू हो जाती है. जब सामने वाला व्यक्ति असलियत देखता है, तो उसे धोखा महसूस हो सकता है. इससे भरोसा टूटने लगता है और रिश्ता कमजोर पड़ जाता है. कई बार लोग अपनी तस्वीर, नौकरी, आदतें या जीवनशैली तक बढ़ा-चढ़ाकर बताते हैं. लेकिन सच ज्यादा दिन तक छिप नहीं पाता और यही चीज रिश्तों में दूरी पैदा कर देती है.
क्या यह पूरी तरह झूठ है?
पफर-फिशिंग में लोग पूरी तरह नकली पहचान नहीं बनाते, बल्कि अपनी असली छवि को जरूरत से ज्यादा सजाकर दिखाते हैं. यानी इंसान असली होता है, लेकिन उसकी ऑनलाइन छवि काफी बदली हुई होती है. यही वजह है कि कई लोग इसे छोटा झूठ मानते हैं, लेकिन इसका असर रिश्तों पर बड़ा पड़ सकता है. रिश्तों में सबसे जरूरी चीज सच्चाई और भरोसा होता है. खुद को अच्छा दिखाना गलत नहीं है, लेकिन जरूरत से ज्यादा दिखावा आगे चलकर परेशानी बन सकता है. इसलिए हमेशा अपनी असली पहचान के साथ लोगों से जुड़ना बेहतर माना जाता है.
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विविधा सिंह इस समय News18 हिंदी के डिजिटल मीडिया में सब एडिटर के तौर पर काम कर रही हैं. वह लाइफस्टाइल बीट में हेल्थ, फूड, ट्रैवल, फैशन और टिप्स एंड ट्रिक्स जैसी स्टोरीज कवर करती हैं. कंटेंट लिखने और उसे आसान व …और पढ़ें
