Delhi Fire Safety: राजधानी दिल्ली में इमारतों की फायर सेफ्टी (आग से सुरक्षा) को लेकर दिल्ली सरकार ने एक बेहद बड़ा फैसला लिया है. सरकार ने ‘दिल्ली अग्निशमन सेवा (संशोधन) नियम, 2025’ का गजट नोटिफिकेशन जारी कर दिया है. इस नए नियम के लागू होने के बाद दिल्ली में फायर एनओसी (NOC) लेने की पूरी प्रक्रिया, सुरक्षा के इंतजाम और जुर्माना प्रणाली में बड़े बदलाव हुए हैं. सबसे अहम बदलाव यह है कि अब फायर एनओसी के लिए सिर्फ सरकारी दफ्तरों के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे, क्योंकि सरकार ने इस काम के लिए प्राइवेट एक्सपर्ट्स के रास्ते भी खोल दिए हैं.
नए गजट नोटिफिकेशन के अनुसार, दिल्ली की बिल्डिंगों में आग से सुरक्षा के इंतजामों की जांच करने के लिए अब प्राइवेट एक्सपर्ट्स या कंपनियों को भी अधिकृत किया गया है. इन्हें आधिकारिक तौर पर ‘अग्नि सुरक्षा ऑडिटर’ (Fire Safety Auditor) कहा जाएगा. ये ऑडिटर दिल्ली फायर सर्विस के डायरेक्टर के पास विधिवत रजिस्टर्ड होंगे. इनके द्वारा इमारत की बारीकी से जांच करने के बाद जारी किया गया ‘फायर एनओसी’ पूरी तरह से मान्य होगा. इससे लोगों को एनओसी मिलने में हो रही देरी से निजात मिलेगी.
दिल्ली को 5 नए फायर जोन
आग लगने की घटनाओं पर तुरंत और प्रभावी ढंग से काबू पाने के लिए दिल्ली के फायर मैनेजमेंट सिस्टम को नया रूप दिया गया है. पूरी दिल्ली को 5 बड़े फायर जोन्स (सेंट्रल, ईस्ट, वेस्ट, नॉर्थ और साउथ) में बांट दिया गया है. इन 5 जोन्स के अंतर्गत 13 से ज्यादा छोटे मंडल (डिवीजन) काम करेंगे. उदाहरण के लिए, वेस्ट मंडल में विकासपुरी और जनकपुरी जैसे इलाके होंगे, वहीं साउथ मंडल में छतरपुर और मालवीय नगर को शामिल किया गया है. इस विकेंद्रीकरण से दमकल गाड़ियों की आवाजाही ज्यादा तेज और सुगम होगी.
नियम तोड़ने पर जेब होगी ढीली
दिल्ली सरकार ने सुरक्षा से खिलवाड़ करने वालों पर सख्ती बरतने का भी पूरा इंतजाम कर दिया है. अगर कोई बिल्डिंग मालिक या व्यक्ति फायर सेफ्टी के नियमों का उल्लंघन करता है, तो उससे भारी जुर्माना वसूला जाएगा. छोटे अपराधों के लिए उप मुख्य अग्निशमन अधिकारी 10,000 रुपये से लेकर 50,000 रुपये तक का जुर्माना लगा सकते हैं. वहीं, बड़े मामलों में फायर सर्विस के डायरेक्टर को 50,000 रुपये से अधिक का जुर्माना लगाकर मामलों का निपटारा करने का अधिकार दिया गया है.
जान बचाने वाले हीरोज को 1 लाख तक का नकद इनाम
सरकार ने केवल सजा का ही नहीं, बल्कि प्रोत्साहन का भी प्रावधान किया है. आग जैसी भयंकर आपदा के दौरान अपनी जान जोखिम में डालकर दूसरों को बचाने वाले आम नागरिकों और फायर सर्विस के जांबाज कर्मचारियों को नकद इनाम देकर सम्मानित किया जाएगा. उत्कृष्ट कार्य के लिए डायरेक्टर द्वारा 1,00,000 रुपये तक और मुख्य अधिकारी द्वारा 75,000 रुपये तक का नकद पुरस्कार दिया जा सकता है. विशेष परिस्थितियों में सरकार की मंजूरी से यह इनाम 1 लाख रुपये से भी अधिक हो सकता है.
पेमेंट सिस्टम पूरी तरह ऑनलाइन
भ्रष्टाचार पर लगाम लगाने और प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए फायर डिपार्टमेंट से जुड़े किसी भी काम के लिए नकद (कैश) या ऑफलाइन पैसों का लेन-देन पूरी तरह से बंद कर दिया गया है. अब सरकारी फीस या शमन शुल्क केवल बैंक ड्राफ्ट, पे-ऑर्डर या ऑनलाइन पेमेंट गेटवे के जरिए ही जमा किए जा सकेंगे.
NOC के लिए ऑटोमैटिक मॉनिटरिंग सिस्टम
फायर सर्टिफिकेट की समय-सीमा और उसकी वैधता पर पैनी नजर रखने के लिए एक आधुनिक ऑटोमैटिक सिस्टम तैयार किया गया है. नए नियमों के अनुसार, हर साल ‘प्रपत्र क’ में जरूरी ऑनलाइन घोषणाएं जमा करने पर ही फायर सर्टिफिकेट मान्य रहेगा. संवेदनशील इमारतों के लिए ऑटोमैटिक सतत निगरानी प्रणाली और साइबर सुरक्षा प्रोटोकॉल का पालन करना अनिवार्य कर दिया गया है.
दिल्ली में नए नियमों के तहत अब फायर NOC कौन जारी कर सकेगा?
दिल्ली अग्निशमन सेवा (संशोधन) नियम, 2025 के तहत अब दिल्ली फायर सर्विस के डायरेक्टर के पास रजिस्टर्ड ‘अग्नि सुरक्षा ऑडिटर’ (प्राइवेट एक्सपर्ट्स और कंपनियां) भी फायर NOC जारी कर सकेंगे.
आग से बचाव के बेहतर प्रबंधन के लिए दिल्ली को कितने जोन में बांटा गया है?
आग लगने की घटनाओं पर तुरंत काबू पाने और बेहतर प्रबंधन के लिए पूरी दिल्ली को 5 बड़े फायर जोन (सेंट्रल, ईस्ट, वेस्ट, नॉर्थ, साउथ) और 13 मंडलों (डिवीजन) में बांटा गया है.
फायर सेफ्टी नियमों का उल्लंघन करने पर कितना जुर्माना लग सकता है?
नियमों का उल्लंघन करने पर उप मुख्य अग्निशमन अधिकारी ₹10,000 से ₹50,000 तक का जुर्माना लगा सकते हैं, जबकि बड़े मामलों में डायरेक्टर को ₹50,000 से अधिक का जुर्माना लगाने का अधिकार है.
आग में लोगों की जान बचाने वालों के लिए सरकार ने क्या इनाम रखा है?
जान जोखिम में डालकर लोगों को बचाने वाले आम नागरिकों और कर्मचारियों को सरकार उत्कृष्ट कार्य के लिए ₹75,000 से ₹1,00,000 तक का नकद इनाम देगी. विशेष परिस्थिति में यह राशि 1 लाख रुपये से अधिक भी हो सकती है.
