चेहरे पर पहले क्या लगाएं, सेरामाइड, नियासिनामाइड या हायलूरोनिक एसिड? ग्लास स्किन के लिए जरूर करें ये काम

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आजकल स्किन केयर में सेरामाइड, नियासिनामाइड और हायलूरोनिक एसिड का खूब इस्तेमाल हो रहा है, लेकिन कई लोग यह नहीं जानते कि इन्हें कैसे लगाना चाहिए और क्या तीनों को एक साथ इस्तेमाल किया जा सकता है. सही तरीके से उपयोग करने पर ये त्वचा को नमी देने, दाग-धब्बों को कम करने और स्किन बैरियर को मजबूत बनाने में मदद कर सकते हैं.

स्किन केयर के लिए जरूरी टर्म्स.

आजकल स्किन केयर प्रोडक्ट्स में सेरामाइड, नियासिनामाइड और हायलूरोनिक एसिड जैसे नाम खूब सुनने को मिलते हैं. कई लोग इन्हें अपनी स्किन केयर रूटीन में शामिल तो कर लेते हैं, लेकिन अक्सर यह समझ नहीं पाते कि इन्हें कैसे लगाना चाहिए और क्या तीनों को एक साथ इस्तेमाल किया जा सकता है. सोशल मीडिया से लेकर ब्यूटी स्टोर्स तक इनकी खूब चर्चा होती है. लेकिन कई लोगों को यह समझ नहीं आता कि इनमें क्या अंतर है और त्वचा की किस समस्या के लिए कौन-सा तत्व ज्यादा फायदेमंद हो सकता है.

अगर आप भी इसी उलझन में हैं, तो पहले यह जानना जरूरी है कि इन तीनों का काम अलग-अलग होता है और सही तरीके से इस्तेमाल करने पर ये त्वचा को बेहतर नमी, चमक और सुरक्षा देने में मदद कर सकते हैं. आइए जानते हैं डिटेल में…

सेरामाइड का क्या काम है?
हेल्थलाइन की रिपोर्ट के अनुसार, सेरामाइड एक प्रकार का प्राकृतिक वसा तत्व है जो हमारी त्वचा में पहले से मौजूद होता है. इसका मुख्य काम त्वचा की बाहरी परत को मजबूत बनाए रखना और नमी को त्वचा के अंदर लॉक करके रखना है. बढ़ती उम्र, प्रदूषण, तेज धूप और कुछ कठोर स्किन केयर उत्पादों के कारण त्वचा में सेरामाइड की मात्रा कम हो सकती है. जब त्वचा में सेरामाइड कम हो जाता है, तो त्वचा रूखी, खुरदरी और संवेदनशील महसूस हो सकती है. ऐसे में सेरामाइड युक्त मॉइस्चराइजर त्वचा की नमी बनाए रखने और उसकी प्राकृतिक सुरक्षा परत को मजबूत करने में मदद कर सकते हैं. रूखी और संवेदनशील त्वचा वाले लोगों के लिए इसे विशेष रूप से उपयोगी माना जाता है.

नियासिनामाइड का चेहरा के लिए क्या काम?
नियासिनामाइड विटामिन बी3 का एक रूप है, जिसे त्वचा की कई समस्याओं के लिए उपयोगी माना जाता है. यह त्वचा में अतिरिक्त तेल बनने की प्रक्रिया को नियंत्रित करने में मदद कर सकता है. यही कारण है कि तैलीय त्वचा वाले लोग इसे काफी पसंद करते हैं. इसके अलावा नियासिनामाइड त्वचा के रंग को एक समान दिखाने, हल्के दाग-धब्बों को कम करने और बड़े दिखाई देने वाले रोमछिद्रों को छोटा दिखाने में भी मदद कर सकता है. मुंहासों की समस्या से जूझ रहे लोगों के लिए भी यह एक लोकप्रिय तत्व माना जाता है क्योंकि यह त्वचा को शांत रखने में सहायक हो सकता है.

हायलूरोनिक एसिड क्यों जरूरी
हायलूरोनिक एसिड का सबसे बड़ा फायदा इसकी नमी बनाए रखने की क्षमता है. यह अपने वजन से कई गुना अधिक पानी को पकड़कर रख सकता है. इसी वजह से इसे त्वचा को गहराई से हाइड्रेट करने वाला तत्व माना जाता है. अगर त्वचा बेजान, रूखी या खिंची-खिंची महसूस होती है, तो हायलूरोनिक एसिड युक्त उत्पाद काफी मददगार साबित हो सकते हैं. यह त्वचा को भरा हुआ, मुलायम और ताजा दिखाने में सहायता करता है. गर्मी हो या सर्दी, हर मौसम में इसका उपयोग किया जा सकता है.

चमकदार और यंग त्वचा के लिए कैसे यूज करें ये तीनों चीज
सेरामाइड, नियासिनामाइड और हायलूरोनिक एसिड को एक साथ भी इस्तेमाल किया जा सकता है, लेकिन सही क्रम का ध्यान रखना जरूरी है. चेहरे को साफ करने के बाद सबसे पहले हल्की नम त्वचा पर हायलूरोनिक एसिड लगाएं, क्योंकि यह त्वचा में नमी बनाए रखने में मदद करता है. इसके बाद नियासिनामाइड सीरम लगाया जा सकता है, जो एक्स्ट्रा तेल, दाग-धब्बों और बड़े पोर्स की समस्या को कम करने में मदद करता है. आखिर में सेरामाइड युक्त मॉइस्चराइजर लगाएं, जो त्वचा की सुरक्षा परत को मजबूत बनाता है और नमी को लॉक करने का काम करता है. अगर सुबह के समय यह रूटीन अपनाते हैं, तो मॉइस्चराइजर के बाद सनस्क्रीन लगाना भी जरूरी है.

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Vividha SinghSub Editor

विविधा सिंह इस समय News18 हिंदी के डिजिटल मीडिया में सब एडिटर के तौर पर काम कर रही हैं. वह लाइफस्टाइल बीट में हेल्थ, फूड, ट्रैवल, फैशन और टिप्स एंड ट्रिक्स जैसी स्टोरीज कवर करती हैं. कंटेंट लिखने और उसे आसान व …और पढ़ें

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