'अब समझ आया कि कैसे गई युवराज मेहता की जान', खुले नाले में गिरे पूर्व वैज्ञानिक ने नोएडा प्राधिकरण पर उठाए सवाल

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Noida News: नोएडा में हुए युवराज मेहता मौत मामले के बाद भी नोएडा प्राधिकरण की आंख नहीं खुली. अब ताजा मामला सेक्टर 122 से सामने आया, जहां एक वैज्ञानिक गहरे नाले में गिर गए. गलीमत रही कि आसपास खड़े लोगों ने उन्हें बाहर निकाल लिया. वैज्ञानिक ने बातचीत के दौरान अपनी स्थिति के बारे में बताया.

नोएडा: बीते करीब 6 महीना पहले नोएडा प्राधिकरण की लापरवाही की भेंट एक युवक युवराज मेहता चढ़ गया था, जिस घटना ने पूरे देश को हिलाकर दिया था. वैसा ही हादसा होते-होते बचा है और नोएडा प्राधिकरण की एक बड़ी लापरवाही सामने आई है. सेक्टर 122 में रहने वाले पूर्व वैज्ञानिक अपनी पत्नी और बेटी के साथ टहलने निकले. पॉश मार्केट में शुमार सेक्टर की मार्केट के बाहर स्ट्रीट लाइट न जलने और नाला न ढका होने के कारण वह गहरे नाले में गिर गए. काफी देर बाद वहां से गुजर रहे राहगीरों ने उनका रेस्क्यू कर जान बचाई. लोकल 18 की टीम ने उनसे खास बातचीत की सुनिए, उनकी इस हादसे के बाद की जुवानी.

घूमने के लिए निकले थे पूर्व वैज्ञानिक
डॉ. आर एस शर्मा ने बताया कि वो रविवार के दिन शाम को करीब साढ़े 8 बजे घूमने निकले, तभी सेक्टर 122 के ही मार्केट में एक बैंक एटीएम के सामने वो गहरे नाले में अचानक गिर गए और पूरी तरह अंदर चले गए. नाला इतना गहरा था कि उसमें वो पूरी तरह डूब गए, लेकिन उन्हें तैरना आता था, इसलिए ऐसे तैसे नाले में गंदे पानी से बाहर की तरफ आ गए. गिरते हुए उनकी बेटी ने देख लिया और वहां से गुजर रहे राहगीरों की मदद ली और उन्हें नाले से बाहर निकाला. इसके बाद उन्होंने सरकारी तंत्र और जिम्मेदारों पर भारी नाराजगी जताई है.

राहगीरों और परिवार की वजह से बची जान
उन्होंने बताया कि मैं नाले में इतना नीचे चला गया कि मेरे पैर नीचे जमीन से टच नहीं हुए. मै तैरना जानता था, तो किसी तरह ऊपर आ गया. मेरी बेटी, पत्नी और ड्राइवर ने चिल्लाया और तब राहगीरों की मदद से बाहर आया. सबसे बड़ी खामी उन्होंने यह बताई कि नोएडा प्राधिकरण जीएफआर का वायलेशन कैसे कर सकती है, क्योंकि मैंने इसमें काम किया है और इसके नियम मुझे अच्छे से पता है.

नोएडा प्राधिकरण ने कॉन्क्रीट का नाला बना दिया, तो ढकना कैसे भूल गए. यह तो पूरी तरह जीएफआर का उल्लंघन है. आपने लोगों के मारने की तैयारी कर रखी है. अगर काम पूरा नहीं हुआ तो उसे यूं कैसे छोड़ा जा रहा है और वहां कोई साइन बोर्ड क्यों नहीं लगाया गया.

पॉश मार्केट में था अंधेरा
डॉ. शर्मा ने बताया कि उस समय सिर्फ एटीएम के अंदर की लाइट जल रही थी. स्ट्रीट लाइट सब बंद थी, वहां कुछ दिखाई नहीं दे रहा था. कुछ इसी तरह आज से 6 महीने पहले सेक्टर 150 में हुई घटना ने युवराज मेहता का जीवन छीन लिया और इसी लापरवाही की वजह से मैं नाले में जा गिरा. अगर वहां मेरा परिवार और राहगीर नहीं होते, तो मेरी भी जीवन लीला समाप्त हो सकती थी.

रिटायर्डमेंट के बाद दिल्ली छोड़कर हम नोएडा आए, इसलिए यहां बेहतर और सुरक्षित जीवन मिलेगा. लेकिन प्राधिकरण की ये लापरवाही लोगों पर भारी पड़ रही है. मेरे साथ ये घटना घटी और जब मैं नाले के अंदर था, तब मुझे सेक्टर 150 वाली घटना और युवराज मेहता याद आ गए कि कैसे गई होगी उनकी जान.

जीवन में किए हैं ये महत्वपूर्ण काम
ये जो सरकारी तंत्र नोएडा में काम कर रहा है, उनकी जिम्मेदारी का नतीजा है कि मैं भी सरकार का आदमी रहा हूं. मैं भी टेंडर प्रक्रिया में शामिल रहा हूं. कोई कैसे इस तरह के टेंडर अधूरा छोड़ सकता है. अगर अधूरा है तो उसे ओपन नहीं करना चाहिए. सुनने में आया कि मेरे गिरने के दूसरे दिन ही स्लैब से नाला ढक दिया है.
आपको बता दें कि डॉ. आर एस शर्मा एक पूर्व वैज्ञानिक ही नहीं हैं, इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च के डिप्टी डायरेक्टर जनरल भी रहे हैं. इसके साथ ही उन्होंने बताया कि उन्होंने देश के लिए कई ऐसे महत्वपूर्ण और बड़े काम किए हैं. कोविड 19 में देशभर में डाइग्नोसिस लैब बनाना, सरोगेसी का बिल बनाना और तमाम महत्वपूर्ण काम किए हैं.

About the Author

आर्यन सेठ

आर्यन ने नई दिल्ली के जामिया मिलिया इस्लामिया से पत्रकारिता की पढ़ाई की और एबीपी में काम किया. उसके बाद नेटवर्क 18 के Local 18 से जुड़ गए.

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