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यमुना के फ्लडप्लेन में आने वाली कई कॉलोनियों और गांवों में लगे ओ-जोन बोर्ड के बाद लोगों को अपने घरों डर सताने लगा है. वहीं दूसरी चेतावनी दी जा रही है कि यही इलाके बाढ़ के लिहाज से सबसे संवेदनशील हैं. पिछले 10 वर्षों में दिल्ली कई बार बाढ़ और भारी जलभराव का सामना कर चुकी है. ऐसे में एक दशक के बीच दिल्ली के कौन-कौन से इलाके बाढ़ की चपेट में आए, आइए आपको कुछ पुरानी तस्वीरों के जरिए बताते हैं.
2017 में मानसून के दौरान यमुना का जलस्तर काफी ऊपर आ गया था. नदी किनारे बसे इलाकों जैसे खादर, उस्मानपुर, गढ़ी मांडू और मजनू का टीला में रहने वाले लोगों को प्रशासन ने सतर्क रहने को कहा था. उस समय बड़ी बाढ़ तो नहीं आई, लेकिन यमुना का बढ़ा हुआ जलस्तर यह एहसास करा गया कि अगर पानी थोड़ा और बढ़ जाता तो हालात बहुत बिगड़ सकते थे. कुछ जगहों पर झुग्गी-बस्तियों को हटाने की तैयारी भी कर ली गई थी.
2018 में यमुना से ज्यादा परेशानी बारिश ने दी. आईटीओ, मिंटो ब्रिज, कश्मीरी गेट, रिंग रोड और पूर्वी दिल्ली के कई इलाकों में सड़कों पर पानी भर गया. कई जगहों पर गाड़ियां फंस गईं और लोगों को घंटों जाम में खड़ा रहना पड़ा. कुछ कॉलोनियों और दुकानों तक में पानी घुस गया था.
2019 में मानसून के दौरान यमुना का जलस्तर तेजी से बढ़ा. यमुना बाजार, मजनू का टीला, वजीराबाद और खादर इलाके प्रशासन की खास निगरानी में रहे. नदी किनारे रहने वाले लोगों को सावधानी बरतने और जरूरत पड़ने पर सुरक्षित जगह जाने की सलाह दी गई थी. हालांकि इस बार भी बड़ी बाढ़ टल गई.
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2020 में जब दिल्ली कोरोना महामारी से जूझ रही थी, उसी दौरान भारी बारिश ने मुश्किलें और बढ़ा दीं. द्वारका, रोहिणी, जनकपुरी, बदरपुर और पूर्वी दिल्ली के कई इलाकों में सड़कें पानी से भर गईं. कई अंडरपास बंद करने पड़े. यमुना का पानी भी बढ़ा, लेकिन स्थिति नियंत्रण में रही.
2021 में हुई अच्छी बारिश अपने साथ परेशानी भी लाई. गीता कॉलोनी, उस्मानपुर, वजीराबाद और मयूर विहार खादर जैसे इलाकों में पानी भरने की खबरें सामने आईं. कई सड़कों पर ट्रैफिक प्रभावित हुआ. प्रशासन ने एहतियात के तौर पर राहत शिविरों की तैयारी भी रखी थी.
2022 में लगातार बारिश के कारण बदरपुर, जामिया नगर, ओखला, मयूर विहार और यमुनापार के कई इलाकों तक पानी पहुंच गया. कई सड़कें पानी में डूबी रहीं. लोगों का जनजीवन बुरी तरह से प्रभावित हो गया.
जुलाई 2023 में दिल्ली ने कई सालों की सबसे भयानक बाढ़ देखी. यमुना का पानी रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच गया. मजनू का टीला, यमुना बाजार, राजघाट, आईटीओ, गीता कॉलोनी, मयूर विहार खादर और कई अन्य इलाके पानी में डूब गए. हजारों लोगों को घर छोड़कर राहत शिविरों में जाना पड़ा. सड़कें, बाजार, दफ्तर और अंडरपास तक जलमग्न हो गए थे.
2025 में यमुना का पानी एक बार फिर खतरे के निशान से ऊपर पहुंच गया. मजनू का टीला, निगमबोध घाट, बेला रोड, गीता कॉलोनी और यमुना बाजार जैसे इलाकों में पानी घुस गया. हालांकि हालात 2023 जितने खराब नहीं हुए, लेकिन लोगों के मन में उस बड़ी बाढ़ की याद फिर ताजा हो गई.
2026 में अभी तक दिल्ली में 2023 जैसी बाढ़ नहीं आई है, लेकिन O-Zone विवाद ने बाढ़ के खतरे को फिर चर्चा में ला दिया है. यमुना के फ्लडप्लेन में बसे गांवों और कॉलोनियों के लोग अपने भविष्य को लेकर परेशान हैं. सवाल यह है कि अगर आने वाले वर्षों में फिर बड़ी बाढ़ आई तो सबसे ज्यादा असर किन इलाकों पर पड़ेगा.
