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Ghaziabad News: गाजियाबाद में एक ऐसा मंदिर भी है, जहां श्रद्धालु इलाज के लिए अस्पताल नहीं, बल्कि आस्था का दरवाजा खटखटाते हैं. पटेल नगर स्थित करीब 100 साल पुराने केसरी माता मंदिर में पेट की नाप उतारने की अनोखी परंपरा आज भी जारी है. आइए इस खास मंदिर और यहां की आस्था के बारे में जानते हैं.
गाजियाबाद: पेट दर्द, गैस या पेट से जुड़ी परेशानी होने पर लोग आमतौर पर डॉक्टर के पास जाते हैं, लेकिन गाजियाबाद में एक ऐसा मंदिर भी है जहां श्रद्धालु इलाज के लिए अस्पताल नहीं बल्कि आस्था का दरवाजा खटखटाते हैं. पटेल नगर स्थित करीब 100 साल पुराने केसरी माता मंदिर में पेट की नाप उतारने की अनोखी परंपरा आज भी जारी है. यहां धागे से नाप लेने के बाद पैर पर एक पुराने हथौड़े से प्रहार कर नाप उतारी जाती है. दावा है कि इस प्रक्रिया से लोगों को राहत मिलती है. यही वजह है कि हर सप्ताह गाजियाबाद ही नहीं, बल्कि दिल्ली, नोएडा, मेरठ और बुलंदशहर से भी सैकड़ों लोग इस मंदिर में पहुंचते हैं.
ऐसे ली जाती है शरीर की नाप
100 साल पुराने गाजियाबाद के इस मंदिर में उपचार की प्रक्रिया बेहद अनोखी है. सबसे पहले व्यक्ति की शरीर की नाप धागे से ली जाती है. इसके बाद एक विशेष हथौड़े की मदद से पैर पर हल्का प्रहार कर नाप उतारी जाती है. मंदिर आने वाले श्रद्धालुओं का मानना है कि इस प्रक्रिया के बाद उन्हें राहत महसूस होती है. यही वजह है कि हर सप्ताह सैकड़ों लोग यहां पहुंचते हैं.
इस मंदिर की एक और खास पहचान वह पुराना हथौड़ा है, जिसका उपयोग नाप उतारने की प्रक्रिया में किया जाता है. बताया जाता है कि यह हथौड़ा लगभग 50 वर्ष पुराना है और पिछले पांच दशकों से लगातार इसी कार्य में इस्तेमाल हो रहा है. मंदिर पुजारी का कहना है कि यह सिर्फ एक औजार नहीं, बल्कि वर्षों से चली आ रही परंपरा का हिस्सा है.
सदियों पुरानी परंपरा का आज भी निर्वहन
मंदिर के महंत अंकित गिरी ने बताया कि केसरी माता मंदिर लगभग एक सदी पुराना है और यहां लोगों की आस्था बेहद मजबूत है. उनका कहना है कि श्रद्धालु माता के दर्शन के लिए दूर-दूर से आते हैं और उनकी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं. नाप उतारने की यह परंपरा उनके दादा के समय से चली आ रही है. सबसे पहले उनके दादा ने यह कार्य शुरू किया, फिर ताऊजी और पिता ने इसे आगे बढ़ाया और अब वह खुद इस जिम्मेदारी को निभा रहे हैं.
मंदिर में लगती है जमकर भीड़
महंत के अनुसार, मंदिर में किसी भी जाति, धर्म या समुदाय के लोगों का स्वागत है. गाजियाबाद के अलावा दिल्ली, नोएडा, मेरठ, बुलंदशहर और आसपास के कई जिलों से श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं. विशेष रूप से मंगलवार और शनिवार को मंदिर में काफी भीड़ रहती है. नाप उतारने के अलावा मंदिर में झाड़ा लगाने की परंपरा भी प्रचलित है. श्रद्धालु माता रानी को बताशे और प्रसाद अर्पित कर अपनी मनोकामनाएं मांगते हैं. महंत अंकित गिरी का कहना है कि यह किसी चमत्कार का दावा नहीं है, बल्कि लोगों की आस्था, विश्वास और माता की कृपा का परिणाम है, जो वर्षों से इस मंदिर को श्रद्धा का प्रमुख केंद्र बनाए हुए हैं.
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आर्यन ने नई दिल्ली के जामिया मिलिया इस्लामिया से पत्रकारिता की पढ़ाई की और एबीपी में काम किया. उसके बाद नेटवर्क 18 के Local 18 से जुड़ गए.
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