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Ghaziabad News: साल 2010 में बुक किए गए फ्लैट का कब्जा 2012 में मिलना था, लेकिन 15 साल बाद भी प्रोजेक्ट पूरा नहीं हुआ. आखिरकार दिल्ली हाईकोर्ट ने खरीदारों के पक्ष में फैसला देकर उन्हें बड़ी राहत और मुआवजे का अधिकार दिलाया. जानिए पूरा मामला.
कोर्ट से दो परिवार को मिली राहत.
गाजियाबाद: सोचिए आप अपने पूरे जीवन की कमाई एक घर लगाने में लगा तो और वो घर भी न मिले तो क्या होगा. कुछ ऐसा ही गाजियाबाद के दो परिवारों के साथ हो रहा था. उन्होंने साल 2010 में एक फ्लैट बुक किया और 15 साल बाद भी प्रोजेक्ट पूरा नहीं हुआ. आखिरकार परिवारों को कानूनी लड़ाई लड़नी पड़ी और आज उनकी जीत हुई है.
क्या है पूरा मामला?
साल 2010 में दो परिवारों ने ने गाजियाबाद के राजनगर एक्सटेंशन स्थित पाम वुड रेजिडेंसी परियोजना में फ्लैट बुक किए थे. बिल्डर ने वादा किया था कि 2012 तक फ्लैटों का कब्जा दे दिया जाएगा, लेकिन ऐसा नहीं हुआ. खरीदारों को अगले 15 साल तक इंतजार करना पड़ा. इस दौरान परियोजना का काम बार-बार रुका और आखिरकार बिल्डर कंपनी गंभीर वित्तीय संकट में फंस गई. स्थिति इतनी खराब हो गई कि खरीदारों को अपना घर मिलने की उम्मीद लगभग खत्म होती दिखने लगी.
खरीदारों ने क्या किया?
फ्लैट खरीदारों ने पहले RERA (रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी) का दरवाजा खटखटाया. RERA ने बिल्डर पर जुर्माना लगाया और खरीदारों को मुआवजा देने का आदेश दिया. लेकिन बिल्डर ने इन आदेशों का पालन नहीं किया. इसके बाद मामला दिल्ली हाईकोर्ट पहुंचा. खरीदारों ने अदालत को बताया कि उन्होंने अपनी जीवनभर की कमाई इस परियोजना में लगा दी, लेकिन उन्हें न घर मिला और न ही पैसे वापस मिले.
हाईकोर्ट ने क्या कहा?
दिल्ली हाईकोर्ट ने बिल्डर के रवैये पर कड़ी नाराजगी जताई. अदालत ने कहा कि नागरिकों को डेवलपर्स के भरोसे यूं ही नहीं छोड़ा जा सकता. बिल्डर की लापरवाही और देरी के कारण खरीदारों को भारी मानसिक, आर्थिक और सामाजिक नुकसान झेलना पड़ा है. हाईकोर्ट ने खरीदारों के पक्ष में फैसला सुनाते हुए उन्हें मुआवजा (Compensation) देने का आदेश दिया. कोर्ट ने यह भी कहा कि बिल्डर की वजह से हुए नुकसान की भरपाई की जानी चाहिए और खरीदारों के अधिकारों की रक्षा जरूरी है.
क्यों है यह फैसला अहम?
यह फैसला सिर्फ पाम वुड रेजिडेंसी के खरीदारों के लिए ही नहीं, बल्कि देशभर के उन लाखों लोगों के लिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है जो वर्षों से अधूरी हाउसिंग परियोजनाओं में फंसे हुए हैं. अदालत ने साफ संदेश दिया है कि बिल्डर परियोजनाओं में देरी करके खरीदारों के साथ मनमानी नहीं कर सकते और उन्हें जवाबदेह ठहराया जाएगा. घर खरीदारों की ओर से पेश हुए वकील सर्वेश रॉय ने कहा, यह फैसला एक साफ़ संदेश देता है कि डेवलपर्स आम नागरिकों के सपनों और जीवन भर की बचत को हल्के में नहीं ले सकते.
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Kavya Mishra is working with News18 Hindi as a Senior Sub Editor in the regional section (Uttar Pradesh, Uttarakhand, Haryana and Himachal Pradesh). Active in Journalism for more than 7 years. She started her j…और पढ़ें
