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Noida PGICH News : नोएडा का पोस्ट ग्रेजुएट इंस्टीट्यूट ऑफ चाइल्ड हेल्थ (PGICH) अस्पताल पूरे एनसीआर और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में गंभीर बीमारी से जूझ रहे बच्चों के लिए उम्मीद की आखिरी किरण की तरह है. यहां सिर्फ बच्चों की गंभीर बीमारियों का इलाज किया जाता है. सरकारी दरों पर महज 10 प्रतिशत खर्च में इलाज हो जाने की वजह से यहां विदेशों से भी माता-पिता अपने बच्चों को लेकर पहुंचते हैं. PGICH देश के उन चुनिंदा संस्थानों में है, जहां बच्चों के ब्लड कैंसर और रक्त संबंधी गंभीर बीमारियों का आधुनिक इलाज किया जाता है. उत्तर भारत में ऐसा करने वाला यह पहला संस्थान है.
नोएडा. सेक्टर-30 का पोस्ट ग्रेजुएट इंस्टीट्यूट ऑफ चाइल्ड हेल्थ (PGICH) नोएडा, पूरे एनसीआर और पश्चिमी उत्तर प्रदेश का ऐसा पहला अस्पताल है, जहां सिर्फ बच्चों की गंभीर बीमारियों का इलाज किया जाता है. यहां सरकारी दरों पर महज 10 प्रतिशत खर्च में इलाज उपलब्ध होने के कारण देश के अलग-अलग राज्यों के साथ-साथ विदेशों से भी माता-पिता अपने बच्चों को लेकर पहुंचते हैं. ब्लड कैंसर, रक्त संबंधी जटिल बीमारियों और दूसरे गंभीर रोगों से जूझ रहे सैकड़ों बच्चों के लिए यह अस्पताल उम्मीद की किरण बन चुका है.
महीनों से सालों चलता इलाज
पीजीआईसीएच के पीडियाट्रिक हेमेटोलॉजी एवं ऑन्कोलॉजी विभाग की एडिशनल प्रोफेसर और विभागाध्यक्ष (इंचार्ज) डॉ. नीता राधाकृष्ण पिछले 15 वर्षों से बच्चों की जिंदगी बचाने के मिशन में जुटी हैं. वह रोजाना करीब 50 से 60 बच्चों को देखती हैं. अस्पताल में कई बच्चे ऐसे हैं जिनका इलाज महीनों नहीं, बल्कि वर्षों तक चलता है. इस दौरान डॉक्टर और मरीज के बीच सिर्फ इलाज का नहीं, एक भावनात्मक रिश्ता बन जाता है. लोकल 18 से डॉ. नीता बताती हैं कि जब कोई बच्चा गंभीर बीमारी को हराकर स्वस्थ होकर मुस्कुराते हुए घर लौटता है, तो वह पल किसी भी पुरस्कार से बड़ा होता है. यही एहसास उन्हें हर दिन नई ऊर्जा देता है.
इनके लिए वरदान से कम नहीं
पीजीआईसीएच देश के उन चुनिंदा संस्थानों में शामिल है, जहां बच्चों के ब्लड कैंसर और रक्त संबंधी गंभीर बीमारियों का आधुनिक इलाज किया जाता है. उत्तर भारत में इस तरह की विशेष सुविधाओं वाला यह पहला संस्थान माना जाता है. यहां आने वाले मरीज सिर्फ उत्तर प्रदेश या दिल्ली-एनसीआर तक सीमित नहीं हैं, बल्कि राजस्थान, बिहार, मध्य प्रदेश, उत्तराखंड, हरियाणा समेत देश के लगभग हर राज्य और कई विदेशी देशों से भी परिवार अपने बच्चों के इलाज के लिए पहुंचते हैं. आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए यह अस्पताल किसी वरदान से कम नहीं है, क्योंकि यहां निजी अस्पतालों की तुलना में बेहद कम खर्च में उच्च स्तरीय चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध हैं.
बच्चों का इलाज क्यों इतना अलग
डॉ. नीता कहती हैं कि बचपन से ही घर के माहौल के कारण उनका सपना डॉक्टर बनने का था. एमबीबीएस के दौरान जब उनकी पोस्टिंग पीडियाट्रिक्स विभाग में हुई, तभी उन्होंने तय कर लिया कि वह बच्चों की डॉक्टर बनेगी. उनका मानना है कि बच्चों और वयस्कों के इलाज में बड़ा अंतर होता है. बच्चे इलाज के बाद जल्दी बदलाव दिखाते हैं और उनकी एक छोटी-सी मुस्कान डॉक्टर की सारी थकान मिटा देती है. गंभीर बीमारियों से जूझ रहे बच्चों के इलाज में डॉक्टर, बच्चा और उसके माता-पिता एक टीम की तरह बीमारी के खिलाफ लंबी लड़ाई लड़ते हैं. यही कारण है कि समय के साथ डॉक्टर और परिवार के बीच ममता और विश्वास का रिश्ता बन जाता है.
इलाज सिर्फ मेडिकल साइंस नहीं
अपनी अच्छी सेवाओं के लिए डॉ. नीता राधाकृष्ण को लगातार कई वर्षों तक डॉक्टर्स डे पर सम्मानित किया जा चुका है. पहले वर्ष उन्हें रोटरी क्लब और दूसरे वर्ष रोटरैक्ट क्लब की ओर से सम्मान मिला. उन्हें उनकी संस्था की ओर से बेस्ट टीचर अवॉर्ड भी प्रदान किया गया है. डॉ. नीता कहती हैं कि बचपन की गंभीर बीमारी का इलाज सिर्फ मेडिकल साइंस नहीं, बल्कि धैर्य, भरोसे और भावनात्मक जुड़ाव की भी परीक्षा होती है. जब महीनों और वर्षों की मेहनत के बाद कोई बच्चा स्वस्थ होकर अपने पैरों पर घर लौटता है, तो डॉक्टर के लिए वह किसी अपनी संतान के स्वस्थ होने जैसा सुखद एहसास होता है. यही वजह है कि पीजीआईसीएच आज हजारों परिवारों के लिए सिर्फ एक अस्पताल नहीं, बल्कि उम्मीद और विश्वास का दूसरा नाम बन चुका है.
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प्रियांशु गुप्ता बीते 10 साल से भी ज्यादा समय से पत्रकारिता में सक्रिय हैं. 2015 में भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC), दिल्ली से जर्नलिज्म का ककहरा सीख अमर उजाला (प्रिंट, नोएडा ऑफिस) से अपने करियर की शुरुआत की. य…और पढ़ें
