नई दिल्ली (CJP vs Jharkhand Student Movement). जब देश के युवाओं का भरोसा परीक्षा कराने वाली संस्थाओं और सिस्टम पर डगमगाने लगता है, तब सड़कों पर जनआंदोलनों का जन्म होता है. हाल ही में दिल्ली के जंतर-मंतर पर नीट पेपर लीक और धांधली के खिलाफ कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के बैनर तले विशाल छात्र आंदोलन देखने को मिला. अब ठीक वैसी ही हलचल झारखंड की राजधानी रांची में देखने को मिल रही है, जहां स्टूडेंट्स जेपीएससी (JPSC) और जेएसएससी (JSSC) भर्ती परीक्षाओं में हुई गड़बड़ियों के खिलाफ आर-पार की लड़ाई लड़ रहे हैं.
झारखंड में क्यों और कब से हो रहा है आंदोलन?
सीजेपी vs झारखंड छात्र आंदोलन: क्या हैं मुख्य मांगें?
दोनों ही आंदोलन युवाओं के हक की लड़ाई हैं, लेकिन इनकी मांगें अपने-अपने स्तर पर तय की गई हैं:
सीजेपी (CJP) आंदोलन की 3 मुख्य मांगें:
- शिक्षा मंत्री का इस्तीफा: नीट और अन्य राष्ट्रीय परीक्षाओं में हुई धांधली की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए केंद्रीय शिक्षा मंत्री पद छोड़ें.
- छात्रों के लिए मुआवजा: परीक्षा रद्द होने और मानसिक तनाव में जान गंवाने वाले अभ्यर्थियों के परिवारों को 1 करोड़ रुपये का मुआवजा.
- पारदर्शी कानून और संस्थागत सुधार: राष्ट्रीय स्तर पर एनटीए (NTA) जैसी एजेंसियों में पूरी पारदर्शिता और सख्त कानून लाया जाए.
झारखंड (JPSC-JSSC) आंदोलन की मुख्य मांगें:
- 14वीं JPSC PT परीक्षा रद्द हो: जब तक निष्पक्षता न हो, तब तक 14वीं जेपीएससी पीटी परीक्षा को तुरंत रद्द किया जाए.
- CBI और ED की जांच: JPSC, JSSC-CGL और टेंडर लेने वाली TDPL एजेंसियों की सीबीआई और ईडी से उच्चस्तरीय जांच कराई जाए.
- OMR शीट सार्वजनिक हो: मुख्य परीक्षा और पीटी परीक्षा की OMR शीट और उत्तर कुंजी सार्वजनिक की जाएं.
- परीक्षा कैलेंडर का सख्ती से पालन: भर्ती परीक्षाओं में हो रही देरी को खत्म कर टाइम बाउंड प्रक्रिया लागू हो.
आंदोलन के मुख्य चेहरे: किसने संभाली कमान?
सीजेपी के मुख्य चेहरे: दिल्ली के आंदोलन को मुख्य रूप से अभिजीत दीपके (CJP संस्थापक) और उनके साथी छात्र नेताओं ने दिशा दी. इस आंदोलन की नैतिक रीढ़ पर्यावरणविद और सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक बने, जिन्होंने 26 दिनों तक उपवास और सत्याग्रह करके केंद्र सरकार का ध्यान खींचा था.
झारखंड आंदोलन के मुख्य चेहरे: रांची में चल रहे आंदोलन का सबसे बड़ा चेहरा छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो बनकर उभरे हैं, जिन्होंने मांगों को लेकर आमरण अनशन शुरू किया. हाल ही में सोनम वांगचुक और अभिजीत दीपके से वीडियो कॉल पर बातचीत और समर्थन मिलने के बाद उन्होंने अपना निर्जल उपवास खत्म किया, लेकिन सत्याग्रह जारी है. इसके अलावा मनोज यादव, योगेश चंद्र भारती, रियाज अहमद और त्रिलोचन महतो जैसे 7 प्रमुख छात्र चेहरे इस आंदोलन की अगुवाई कर रहे हैं.
दोनों आंदोलनों में क्या समानताएं हैं?
- अहिंसक सत्याग्रह और अनशन: दोनों ही आंदोलनों ने अपनी बात मनवाने के लिए भूख हड़ताल, मशाल जुलूस और शांतिपूर्ण सत्याग्रह का रास्ता चुना.
- नेशनल कनेक्ट और समर्थन: सोनम वांगचुक और सीजेपी की टीम ने दिल्ली से लेकर रांची तक, दोनों आंदोलनों को एक सूत्र में पिरो दिया है.
- सिस्टम से भरोसा टूटना: दोनों जगह युवाओं की सबसे बड़ी पीड़ा यह है कि सालों की मेहनत के बाद भी एजेंसियां निष्पक्ष परीक्षा कराने में नाकाम साबित हो रही हैं.
दोनों आंदोलनों के रास्ते कहां अलग हैं?
- दायरा: सीजेपी का आंदोलन राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं (जैसे नीट) और केंद्रीय नीतियों पर केंद्रित था. वहीं, झारखंड का आंदोलन राज्य स्तरीय चयन आयोगों (JPSC/JSSC) और स्थानीय युवाओं के रोजगार से जुड़ा है.
- जांच का तरीका: सीजेपी मुख्य रूप से सिस्टम में सुधार और नैतिक जिम्मेदारी (इस्तीफे) पर जोर दे रही थी. वहीं झारखंड के छात्र धांधली करने वाली एजेंसियों पर CBI-ED की एफआईआर और जेल भेजने की मांग कर रहे हैं.
