Meditation Strengthens Brain: योग भारत की प्राचीन चिकित्सा पद्धति है. यह न केवल रोगों को दूर भगाने की अचूक दवा है बल्कि शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य के लिए संजीवनी की तरह है. देश के योग विशेषज्ञ अक्सर मेंटल हेल्थ के लिए योगासन और प्राणायाम की सलाह देते हैं, साथ ही ध्यान करने के लिए भी कहते हैं, लेकिन अक्सर लोग इसके वैज्ञानिक आधार को लेकर सवाल उठाते रहते हैं. ऐसे में एम्स नई दिल्ली की ध्यान और ब्रेन पर की गई रिसर्च ऐसे लोगों के सवालों के बेहतर जवाब दे सकती है.
एम्स नई दिल्ली ने ध्यान और उसके ब्रेन पर पड़ने वाले प्रभावों को लेकर किए गए रिसर्च में कई चौंकाने वाली बातें सामने आई हैं. वैसे तो ध्यान और मेडिटेशन को सदियों से शांति, भावनात्मक संतुलन और मानसिक स्वास्थ्य से जोड़ा जाता है, लेकिन अब AIIMS, नई दिल्ली के नए अध्ययन ने इसके वैज्ञानिक प्रमाण पेश कर दिए हैं. स्टडी कहती है कि नियमित किया गया ध्यान मस्तिष्क के आंतरिक नेटवर्क को और अधिक कुशल बनाता है, जिससे फोकस, एकाग्रता और मानसिक नियंत्रण में सुधार होता है.
दिल्ली एम्स के न्यूरोलॉजी विभाग की ओर से किया गया यह अध्ययन SAGE Open Medicine जर्नल में प्रकाशित हुआ है. इस अध्ययन में उन्नत ब्रेन इमेजिंग तकनीक का उपयोग किया गया. शोधकर्ताओं ने पाया कि जिन लोगों ने लंबे समय से ध्यान का अभ्यास किया था, उनके मस्तिष्क के विभिन्न हिस्सों के बीच संचार ज्यादा मजबूत और व्यवस्थित पाया गया.
इस बारे में एम्स के न्यूरोलॉजी विभाग की प्रमुख प्रो. मंजरी त्रिपाठी ने कहा, “मानव मस्तिष्क जटिल कनेक्शन्स के नेटवर्क के जरिए काम करता है. ध्यान इन नेटवर्क्स की कुशलता बढ़ाता है और मस्तिष्क के अलग-अलग हिस्सों को बेहतर तरीके से जुड़ने में मदद करता है, जिससे ब्रेन अपनी पूरी दक्षता और क्षमता से काम करता है.”
अध्ययन में “स्मॉल-वर्ल्ड ब्रेन नेटवर्क” नाम के एक विशेष पैटर्न के बारे में बताते हुए उन्होंने कहा कि यह पैटर्न मस्तिष्क को लोकल प्रोसेसिंग और लंबी दूरी के संचार के बीच संतुलन बनाए रखने में मदद करता है, जिससे जटिल कार्यों को तेजी से संभालना संभव होता है. शोधकर्ताओं ने मेग्नेटोएन्सेफेलोग्राफी (MEG) तकनीक का इस्तेमाल कर ध्यान के दौरान मस्तिष्क की गतिविधि को मापा. इसमें एडवांस्ड मेडिटेटर्स, बिगिनर्स और बिना ध्यान अभ्यास वाले लोगों को शामिल किया गया था.
ब्रेन के तीन प्रमुख ब्रेन नेटवर्क्स पर हुआ शोध
- डिफॉल्ट मोड नेटवर्क (आत्म-चिंतन और आंतरिक विचारों से जुड़ा)
- फ्रंटो-पैरिएटल नेटवर्क (निर्णय लेने और संज्ञानात्मक नियंत्रण के लिए)
- अटेंशन नेटवर्क (एकाग्रता बनाए रखने के लिए)
इस रिसर्च के नतीजे बताते हैं कि एडवांस्ड मेडिटेटर्स में अटेंशन नेटवर्क की दक्षता खासतौर पर बेहतर थी, खासकर बीटा फ्रीक्वेंसी रेंज में जो सतर्कता और फोकस से जुड़ी है. शुरुआती अभ्यास करने वालों में भी फ्रंटो-पैरिएटल नेटवर्क में सकारात्मक बदलाव दिखे, जो यह संकेत देता है कि ध्यान के फायदे जल्दी शुरू हो सकते हैं.
प्रो. त्रिपाठी आगे कहती हैं कि ये निष्कर्ष ध्यान जैसी प्रथाओं के बारे में वैज्ञानिक समझ देते हैं. ब्रेन नेटवर्क्स के बीच बेहतर कनेक्टिविटी ध्यान, भावनात्मक नियंत्रण और मानसिक तनाव प्रबंधन में मदद करती है.”
ऐसे में रिसचर्स का मानना है कि ध्यान केवल अस्थायी शांति नहीं देता, बल्कि मस्तिष्क की कार्यप्रणाली को स्थायी रूप से बेहतर बनाता है. हालांकि, ये प्रभाव अभ्यास की अवधि, अनुभव के स्तर और ध्यान की विधि पर निर्भर करते हैं.
यह अध्ययन आधुनिक जीवन की भागदौड़ और तनाव के बीच ध्यान को एक वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित उपकरण के रूप में स्थापित करता है. व्यस्त दिनचर्या में रोज सिर्फ 10-15 मिनट का ध्यान भी मस्तिष्क को स्वस्थ और कुशल रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है.
