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अर्वेना का योग सफर काफी दिलचस्प रहा है. करीब आठ साल पहले उन्होंने टीवी पर योग कार्यक्रम देखते हुए इसकी शुरुआत की थी. शुरुआत में उनका उद्देश्य खुद को फिट रखना था, लेकिन धीरे-धीरे योग उनके जीवन का अहम हिस्सा बन गया. नियमित अभ्यास और कठिन योगासनों पर लगातार मेहनत ने उन्हें राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर का खिलाड़ी बना दिया.
महज तीन साल में छह गोल्ड मेडल जीतने वाली अर्वेना जाटोलिया
मेहनत अगर नेट पर हो… तो मेडल मंच पर मिलता है. दिल्ली पुलिस के एक एसीपी की बेटी ने योग की दुनिया में ऐसा कमाल किया है, जिसने देश का सिर गर्व से ऊंचा कर दिया है. महज तीन साल में छह गोल्ड मेडल जीतने वाली अर्वेना जाटोलिया ने अब विश्व योगासन चैंपियनशिप में गोल्ड मेडल जीतकर भारत का परचम लहराया है.
अर्वेना का योग सफर काफी दिलचस्प रहा है. करीब आठ साल पहले उन्होंने टीवी पर योग कार्यक्रम देखते हुए इसकी शुरुआत की थी. शुरुआत में उनका उद्देश्य खुद को फिट रखना था, लेकिन धीरे-धीरे योग उनके जीवन का अहम हिस्सा बन गया. नियमित अभ्यास और कठिन योगासनों पर लगातार मेहनत ने उन्हें राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर का खिलाड़ी बना दिया.
साल 2023 में अर्वेना ने पहली बार किसी योगासन प्रतियोगिता में हिस्सा लिया और अपने पहले ही प्रयास में गोल्ड मेडल जीत लिया. इसके बाद उन्होंने लगातार सफलता की नई ऊंचाइयों को छुआ. वर्ष 2024 और 2025 में भी उन्होंने राज्य स्तरीय प्रतियोगिताओं में स्वर्ण पदक जीतकर अपनी प्रतिभा साबित की.
अप्रैल 2026 में आयोजित एशियन योगासन चैंपियनशिप में अर्वेना ने दो गोल्ड मेडल जीतकर शानदार प्रदर्शन किया. इसके बाद जुलाई 2026 में गुजरात के अहमदाबाद में आयोजित चौथी विश्व योगासन चैंपियनशिप में उन्होंने दुनिया भर के खिलाड़ियों को पीछे छोड़ते हुए गोल्ड मेडल अपने नाम कर लिया.
अर्वेना अपनी इस सफलता का श्रेय अपने माता-पिता को देती हैं. उनका कहना है कि परिवार का भरोसा और हर कदम पर मिला सहयोग ही उनकी सबसे बड़ी ताकत रहा है.
अर्वेना ने कहा, ‘मैंने हमेशा मेहनत पर विश्वास किया है. मेरे माता-पिता ने हर परिस्थिति में मेरा साथ दिया. आगे भी देश के लिए ज्यादा से ज्यादा पदक जीतना चाहती हूं.’
युवा योग खिलाड़ी का मानना है कि योग केवल शारीरिक फिटनेस का माध्यम नहीं है, बल्कि यह मानसिक संतुलन, आत्मविश्वास और अनुशासन भी सिखाता है. यही वजह है कि वह युवाओं को योग को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाने की सलाह देती हैं.
लगातार अभ्यास, परिवार का समर्थन और देश के लिए कुछ कर दिखाने का जुनून ही अर्वेना जाटोलिया की सफलता की सबसे बड़ी कहानी है. अब उनकी नजर आगामी अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं पर है, जहां वह भारत के लिए और पदक जीतने का लक्ष्य लेकर तैयारी कर रही हैं.
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साद बिन उमर को पत्रकारिता के क्षेत्र में 15 साल से अधिक का अनुभव है, जिनमें से 12 साल उन्होंने डिजिटल पत्रकारिता को दिए है. न्यूज़18 के साथ जुड़ने से पहले उन्होंने आज तक, एनडीटीवी, पीटीआई और नया इंडिया जैसे प्र…और पढ़ें
