जानवर की तरह घसीटा, जी मिचलाने वाली हैवानियत… ताहिर हुसैन को उम्रकैद देते वक्‍त जज ने क्‍या कहा?

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जी मिचलाने वाली हैवानियत… ताहिर हुसैन को उम्रकैद देते वक्‍त जज ने क्‍या कहा?

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Tahir Hussain Judgment Judge Statement: हाथ में चाकू और गले में कपड़ा. IB अफसर अंकित शर्मा की हत्या के मामले में जब कड़कड़डूमा कोर्ट ने पूर्व आप पार्षद ताहिर हुसैन समेत 5 दोषियों को उम्रकैद सुनाई तो जज की टिप्पणियों ने पूरे देश को हिलाकर रख दिया. अदालत ने कहा कि जिस बर्बरता से 51 घाव देकर जानवरों की तरह शव को नाले में फेंका गया, वह जी मिचलाने वाली हैवानियत थी.

ताहिर हुसैन को उम्रकैद की सजा सुनाई गई.

यह हत्याकांड सिर्फ बर्बर नहीं बल्कि जी मिचलाने वाली हैवानियत थी.  2020 के उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों में इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) के जांबाज अफसर अंकित शर्मा की हत्या के मामले में कड़कड़डूमा कोर्ट ने जब पूर्व आप पार्षद ताहिर हुसैन समेत 5 दोषियों को उम्रकैद की सजा सुनाई तो फैसले में लिखे एक-एक शब्द ने उस काली रात की खौफनाक यादों को जिंदा कर दिया. एडिशनल सेशन जज प्रवीण सिंह ने अपने आदेश में दिल्ली के इस हत्याकांड पर सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि बेगुनाह अंकित शर्मा को केवल उनके धर्म के आधार पर निशाना बनाया गया, फिर एक उन्मादी भीड़ ने घेरकर उनके शरीर पर 51 गहरे वार किए. जब सांसें थम गईं तो उनके शव को इंसान नहीं बल्कि किसी जानवर की तरह घसीटते हुए गंदे नाले में फेंक दिया गया. न्याय की दहलीज पर खड़े होकर रहम की भीख मांग रहे दोषियों पर कोर्ट ने जरा भी दया नहीं दिखाई. जिन्होंने जुर्म करते वक्त अंकित शर्मा पर रत्ती भर दया नहीं दिखाई, उनपर कोर्ट ने कड़ा फैसला सुनाया.

जिस बर्बरता से हत्या की गई, वह घिनौना और जी मिचलाने वाला
अदालत ने हत्या के तरीके पर गहरी नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा कि जिस हैवानियत और दरिंदगी के साथ इस अपराध को अंजाम दिया गया, वह बेहद बर्बर और घिनौना (Nauseating and Sickening) है. अदालत ने स्पष्ट तौर पर कहा कि यह हत्याकांड पूरी तरह से केवल और केवल धार्मिक आधार पर किया गया था.

जानवरों की तरह घसीटा गया अंकित शर्मा का शव
कोर्ट ने अंकित शर्मा के साथ हुई हैवानियत का जिक्र करते हुए कहा कि हत्या के बाद पीड़ित के शव को एक जानवर की तरह घसीटा गया. अभियोजन पक्ष के अनुसार, अंकित के गले में कपड़ा बांधकर उनके शरीर को घसीटते हुए गंदे नाले में फेंक दिया गया था. उस वक्त उनके शरीर पर सिर्फ अंडरवेयर था और बाकी कपड़े फाड़ दिए गए थे.

51 घाव, फिर भी रहम की मांग?
मामले की सुनवाई के दौरान विशेष सरकारी वकील मधुकर पांडे ने दिल्ली पुलिस की ओर से फांसी की सजा की मांग की थी. कोर्ट में पेश पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट के मुताबिक अंकित शर्मा के शरीर पर 51 गंभीर चोटों और चाकू के निशान थे, जिनमें से 7 घाव इतने गहरे थे जो मौत का कारण बनने के लिए काफी थे. कोर्ट ने टिप्पणी की कि जो लोग आज अदालत में अपने लिए रहम की भीख मांग रहे हैं, उन्होंने अपराध करते वक्त जरा सी भी दया नहीं दिखाई थी.

पब्लिक सर्वेंट होकर निभाया नफरत का फर्ज
अदालत ने ताहिर हुसैन की भूमिका पर टिप्पणी करते हुए कहा कि अपराध के समय वह एमसीडी पार्षद और एक लोक सेवक थे. उनका संवैधानिक और नैतिक कर्तव्य अपने इलाके की जनता की रक्षा करना था लेकिन इसके उलट उन्होंने भीड़ की अगुवाई की और नफरत व साजिश का हिस्सा बने.

केवल धर्म के आधार पर निशाना बनाया गया
कड़कड़डूमा कोर्ट ने अपने आदेश में रेखांकित किया कि अंकित शर्मा निहत्थे थे. उन्हें एक उन्मादी भीड़ ने घेरा, लंबे समय तक उन पर जानलेवा हमला किया गया और केवल उनके धर्म के आधार पर टारगेट करके इस जघन्य हत्याकांड को अंजाम दिया गया.

सजा के बाद क्या बोला ताहिर हुसैन?
कोर्ट द्वारा उम्रकैद की सजा सुनाए जाने के बाद पूर्व पार्षद ताहिर हुसैन ने अपनी प्रतिक्रिया देते हुए सिर्फ इतना कहा, “देर है, अंधेर नहीं.”

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Sandeep GuptaChief Sub Editor

पत्रकारिता में 16 वर्षों से अधिक का सुदीर्घ अनुभव रखने वाले संदीप गुप्ता वर्तमान में News18 इंडिया में बतौर चीफ सब-एडिटर होम पेज पर जिम्‍मेदारी संभाल रहे हैं. जटिल और सामरिक विषयों को बेहद सरल भाषा में पाठकों त…

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