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मशहूर आर्किटेक्ट अतुल गुप्ता ने फायर सेफ्टी के जरूरी नियम बताए हैं. उनके अनुसार घर में निकासी के एक से अधिक रास्ते होने चाहिए. आग लगने पर डिजिटल लॉक और छत का ताला जान का दुश्मन बन जाता है. घरों में आग बुझाने के उपकरण जरूर रखें. रिहायशी इलाकों में व्यावसायिक गतिविधियों पर रोक लगनी चाहिए.
नई दिल्ली: देश के अलग-अलग हिस्सों में हाल के दिनों में आग लगने की कई बड़ी और दर्दनाक घटनाएं सामने आई हैं. दिल्ली के मालवीय नगर के एक होटल में लगी आग में जहां 21 लोगों की मौत हो गई, वहीं लखनऊ के एक कोचिंग सेंटर में 15 बच्चों को अपनी जान गंवानी पड़ी. दिल्ली के ग्रेटर कैलाश के एक घर में लगी आग ने भी लोगों को सोचने पर मजबूर कर दिया है कि आखिर घर, होटल या शॉपिंग कॉम्प्लेक्स का निर्माण किस तरह किया जाए, ताकि ऐसी दुर्घटनाओं के समय सुरक्षित बाहर निकला जा सके.
देश के जाने-माने मशहूर आर्किटेक्ट अतुल गुप्ता के अनुसार आजकल जो घर बन रहे हैं, वे ‘फायर सेफ्टी’ के नजरिए से नहीं, बल्कि सिर्फ चोरी और अपराधियों से सुरक्षा को ध्यान में रखकर बनाए जा रहे हैं. डिजिटल लॉक से लेकर कंस्ट्रक्शन की कई कमियां आपातकाल में लोगों की जान पर भारी पड़ रही हैं.
घर या होटल बनवाते समय इन बातों का रखें ख्याल
मशहूर आर्किटेक्ट अतुल गुप्ता ने बताया कि किसी भी इमारत का निर्माण करते समय निम्नलिखित बातों का विशेष ध्यान रखना चाहिए:
- निकासी के हों एक से अधिक रास्ते: घर या कॉम्प्लेक्स में बाहर निकलने का सिर्फ एक रास्ता नहीं होना चाहिए. हमेशा दो या तीन एग्जिट पॉइंट रखें. जैसे एक मुख्य दरवाजा, दूसरा छत का रास्ता और तीसरा एक बैक गेट (पीछे का दरवाजा).
- डिजिटल लॉक बन रहा जान का दुश्मन: आजकल घरों में डिजिटल लॉक लगाने का ट्रेंड बढ़ा है, लेकिन आग लगने की स्थिति में ये सबसे पहले ब्लॉक (फ्रीज) हो जाते हैं. इससे लोग अंदर ही कैद हो जाते हैं. इसलिए आसान और सामान्य लॉक का इस्तेमाल करें.
- छत के दरवाजे पर न लगाएं ताला: लोग अक्सर सुरक्षा के नाम पर छत के दरवाजे पर ताला लगा देते हैं. आग लगने पर लोग ऊपर भागते हैं और ताला बंद होने के कारण फंस जाते हैं. इसे हमेशा अंदर से कुंडी या साधारण लॉक लगाकर रखें, जिसे तुरंत खोला जा सके.
आग से बचाव के उपकरण हैं बेहद जरूरी
आर्किटेक्ट अतुल गुप्ता ने कहा कि घरों, रेस्टोरेंट और शॉपिंग कॉम्प्लेक्स में सबसे बड़ी कमी यह दिखती है कि लोग वहां आग बुझाने वाले उपकरण (फायर एक्स्टिंग्विशर) नहीं रखते. इस लापरवाही के कारण शुरुआत में ही आग पर काबू नहीं पाया जा पाता और वह पूरी इमारत में फैल जाती है.
रिहायशी इलाकों में कमर्शियल एक्टिविटी पर लगे रोक
उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि रेजिडेंशियल (रिहायशी) क्षेत्रों में कमर्शियल (व्यावसायिक) गतिविधियों पर पूरी तरह पाबंदी लगनी चाहिए. रिहायशी इलाकों में व्यावसायिक काम होने से बिजली का लोड बढ़ता है और शॉर्ट सर्किट या आग लगने की घटनाएं होने की संभावना सबसे ज्यादा रहती है.
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मीडिया में 6 साल का अनुभव है. करियर की शुरुआत ETV Bharat (बिहार) से बतौर कंटेंट एडिटर की थी, जहां 3 साल तक काम किया. पिछले 3 सालों से Network 18 के साथ हूं. यहां बिहार और झारखंड से जुड़ी खबरें पब्लिश करता हूं.
