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दिल्ली हाईकोर्ट ने 17 साल के बेटे को पिता को लीवर दान करने की अनुमति दी. नाबालिग होने की वजह से अस्पताल ने लीवर डोटेन की प्रक्रिया से इंकार कर दिया.इसके बाद मामला हाई कोर्ट पहुंचा. जहां से लीवर डोनेट करने की अनुमति दी गयी. इससे व्यक्ति को नई जिंदगी मिल गयी.
दिल्ली हाईकोर्ट के अपने फैसले ने लीवर बीमारी से जूझ रहे व्यक्ति को बड़ी राहत दी है.
नई दिल्ली. दिल्ली हाईकोर्ट के एक फैसले ने लीवर बीमारी से जूझ रहे व्यक्ति को बड़ी राहत दी है. तीन महीने चली कानूनी लड़ाई के बाद कोर्ट ने नाबालिग बेटे को लीवर का हिस्सा दान देने का फैसला किया है. बेटे की उम्र 17 साल है. इसके बाद अब ट्रांसप्लांट का रास्ता साफ हो गया है.
कोलकाता के रहने वाले 52 साल के उत्तम कुमार शॉ पिछले छह महीने से लीवर की गंभीर बीमारी से जूझ रहे हैं. उनका इलाज दिल्ली के इंस्टीट्यूट ऑफ लिवर एंड बिलियरी साइंसेज (आईएलबीएस) में चल रहा है. वह कभी राज्य स्तर के क्रिकेट खिलाड़ी रहे हैं और कोलकाता में इलेक्ट्रिकल सामान की दुकान चलाते थे.
परिजनों के अनुसार जनवरी में अचानक खून की उल्टी होने के बाद उनकी तबीयत तेजी से खराब होने लगी.
पहले कोलकाता और फिर हैदराबाद के अस्पतालों में इलाज के दौरान डॉक्टरों ने साफ कर दिया कि उनकी जान बचाने के लिए लीवर ट्रांसप्लांट ही एकमात्र विकल्प है. बाद में आईएलबीएस में भी यही सलाह दी गई.
जांच में पता चला कि परिवार में सिर्फ उनका 17 साल का बेटा ही लीवर डोनेट कर सकता है. इस पर अस्पताल ने ट्रांसप्लांट से इनकार नहीं किया था. क्योंकि उसक उम्र 17 साल है. इस कानून की वजह से प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ पाई.
मानव अंग प्रत्यारोपण कानून के तहत 18 वर्ष से कम उम्र का कोई भी जीवित अंगदाता नहीं बन सकता. ऐसे मामलों में अदालत या सक्षम प्राधिकरण की अनुमति जरूरी होती है. इसी वजह से मार्च में बेटे ने अपनी मां के माध्यम से दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दायर की. सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार और राष्ट्रीय अंग एवं ऊतक प्रत्यारोपण संगठन (NOTTO) ने भी अदालत को बताया कि विशेष परिस्थितियों में नाबालिग को अंगदान की अनुमति दी जा सकती है. इसके बाद 29 जून को हाईकोर्ट ने बेटे को पिता के लिए लीवर का हिस्सा दान करने की मंजूरी दे दी.
परिवार का कहना है कि इलाज पर अब तक 20 लाख रुपये से ज्यादा खर्च हो चुके हैं. उत्तम परिवार के इकलौते कमाने वाले सदस्य हैं. वहीं बेटे ने 10वीं बोर्ड परीक्षा के बाद पढ़ाई भी छोड़ दी, ताकि वह पिता के इलाज में परिवार का साथ दे सके.
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करीब 20 साल का पत्रकारिता का अनुभव है. नेटवर्क 18 से जुड़ने से पहले कई अखबारों के नेशनल ब्यूरो में काम कर चुके हैं. रेलवे, एविएशन, रोड ट्रांसपोर्ट और एग्रीकल्चर जैसी महत्वपूर्ण बीट्स पर रिपोर्टिंग की. कैंब्रिज…और पढ़ें
