19 की उम्र में मिला नौकरी का ऑफर, बीच में छोड़ दिया आईआईटी, पहुंच गए माइक्रोसॉफ्ट

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Ashish Kumar Verma IIT Delhi Dropout Microsoft: आईआईटी में एडमिशन मिल पाना आसान नहीं है. कई स्टूडेंट्स तो सालों की मेहनत के बाद भी आईआईटी में एडमिशन के लिए तरसते रह जाते हैं. वहीं 19 साल के आशीष कुमार वर्मा ने माइक्रोसॉफ्ट में नौकरी के लिए आईआईटी दिल्ली की पढ़ाई बीच में ही छोड़ दी.

Ashish Kumar Verma Microsoft: आशीष कुमार वर्मा ने आईआईटी की डिग्री का मोह नहीं रखा

नई दिल्ली (Ashish Kumar Verma Story). आपने ऐसी कई कहानियां पढ़ी होंगी, जिनमें आईआईटी, आईआईएम या एम्स में एडमिशन न मिल पाने के कारण स्टूडेंट्स आंसू बहाते हैं. भारत के एजुकेशन सिस्टम में इन टॉप संस्थानों को सफलता की सीढ़ी माना जाता है. लाखों युवा इसे अपने जीवन का सबसे बड़ा सपना बना लेते हैं. जब यह पूरा नहीं होता तो उनका दिल टूट जाता है. इन दिनों सोशल मीडिया पर आशीष कुमार वर्मा की कहानी वायरल हो रही है. उन्होंने इस बने-बनाए ढर्रे को तोड़कर नई मिसाल पेश की.

आशीष कुमार वर्मा ने देश के सबसे टॉप कॉलेज ‘IIT दिल्ली’ में एडमिशन तो लिया, लेकिन पढ़ाई बीच में ही छोड़ दी. महज 19 साल की उम्र में उन्हें दुनिया की सबसे बड़ी टेक कंपनियों में शामिल माइक्रोसॉफ्ट में नौकरी मिल गई. आशीष की कहानी लिंक्डइन और कई सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर वायरल हो रही है. उन्होंने साबित कर दिया कि अगर आपके पास हुनर है और करियर गोल्स को लेकर स्पष्ट हैं तो कामयाबी के लिए किसी कॉलेज की डिग्री का इंतजार करने की जरूरत नहीं है. पढ़िए सक्सेस स्टोरी.

IIT छोड़कर बने माइक्रोसॉफ्ट के स्टार इंजीनियर

आशीष ने अपने सफर को बेहद ‘अनकन्वेंशनल’ (लीक से हटकर) बताया है. उन्होंने लिखा कि वह कानूनी रूप से शराब पीने की उम्र के भी नहीं हुए थे, तभी माइक्रोसॉफ्ट में कदम रख दिया था. वह कॉलेज स्टूडेंट्स को 2 कैटेगरी में रखते हैं. पहले वो, जो कॉलेज में एक्सप्लोर करने जाते हैं कि उनका इंटरेस्ट किस चीज में है- ऐसे लोगों के लिए IIT जैसे संस्थान बेस्ट हैं. दूसरे वो, जिन्हें पहले से पता होता है कि उन्हें क्या करना है और वे बहुत छोटी उम्र से ही चीजें बनाना शुरू कर देते हैं. आशीष खुद को दूसरी कैटेगरी का मानते हैं.

18 की उम्र में वर्ल्ड रिकॉर्ड और पीएम मोदी से मुलाकात

आशीष कुमार वर्मा कोई आम स्टूडेंट नहीं थे. महज 18 साल की उम्र में वह दुनिया के सबसे युवा ‘Google Developer Expert’ बन चुके थे. इसके अलावा, वह जापान के मशहूर ‘साकुरा साइंस प्रोग्राम’ (Sakura Science Programme) का हिस्सा रह चुके हैं. वह भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सामने खुद का बनाया हुआ एक ऐप प्रेजेंट कर चुके हैं. आशीष कुमार वर्मा का मानना है कि इन उपलब्धियों से उनका विजन और कॉन्फिडेंस, दोनों बहुत मजबूत हुए.

सीखने की आजादी के लिए पहुंचे माइक्रोसॉफ्ट

आशीष कुमार वर्मा ने बड़े ब्रांड के टैग या रुतबे के लिए माइक्रोसॉफ्ट जॉइन नहीं किया था, बल्कि इसलिए चुना कि यहां उन्हें एक्सपेरिमेंट करने की आजादी मिल रही थी. वह जिस भी रॉकस्टार इंजीनियर से कुछ सीखना चाहते थे, वह उनसे सिर्फ एक मेसेज की दूरी पर था. उन्होंने बताया कि एंप्लॉई के तौर पर वह C#, Typescript और क्यूब इंजन के क्रिएटर्स से सीधे बात कर सकते हैं और वो आइडियाज ले सकते हैं, जो इंटरनेट पर भी मौजूद नहीं हैं.

नए डेवलपर्स को सलाह: सिस्टम को दोष देना बंद करो

आशीष ने युवाओं को एक मेसेज दिया है- अगर आप कुछ बनाना चाहते हैं तो बस शुरू हो जाइए. LLM और एआई टेक्नोलॉजी आपसे यह नहीं पूछेगी कि नॉलेज तक पहुंचने के लिए आपके पास बैचलर्स, मास्टर्स या पीएचडी की डिग्री है या नहीं. उन्होंने इस बात को खारिज कर दिया कि लीक से हटकर चलने वालों को सपोर्ट नहीं मिलता. आशीष कहते हैं, यह कहना कि ‘सिस्टम लीक से हटकर चलने वालों के लिए नहीं बना’ बहुत बड़ा झूठ है. सिस्टम को दोष देना बंद करो, बाहर निकलो और नए-नए एक्सपेरिमेंट करो.

आशीष कुमार वर्मा की कहानी Gen Z युवाओं की बदलती सोच दर्शाती है. वे किताबी ज्ञान या बड़ी डिग्रियों के पीछे भागने के बजाय प्रैक्टिकल एक्सपीरियंस और क्रिएटिव आजादी को ज्यादा अहमियत दे रहे हैं.

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Deepali PorwalSenior Sub Editor

Deepali Porwal is a seasoned bilingual journalist with 11 years of experience in the media industry. She currently works with News18 Hindi, focusing on the Education and Career desk. She is known for her versat…और पढ़ें

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