57 बार केस ल‍िस्‍ट, सुनवाई से पहले मर गई मरीज…अब CJI सूर्यकांत ने खुद लिया केस का संज्ञान, कही ये अहम बात

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57 बार केस ल‍िस्‍ट, मर गई मरीज…अब CJI सूर्यकांत ने लिया स्‍वत: संज्ञान

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केरल हाईकोर्ट में 4 साल से लंबित ब्रेस्ट कैंसर दवा मामले पर CJI सूर्यकांत ने फटकार लगाई है. साथ ही इस केस का स्‍वत: संज्ञान लेने के बाद केंद्र सरकार और स्‍वास्‍थ्‍य मंत्रालय को नोट‍िस भेजने की बात कही है. इस केस को 57 बार ल‍िस्‍ट क‍िया गया था लेक‍िन सुनवाई नहीं हुई. और उससे पहले ही मरीज की मौत हो गई.

केरल हाईकोर्ट में चार साल से लंब‍ित एक मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट के सीजेआई ने स्‍वत: संज्ञान ल‍िया है .

केरल हाईकोर्ट में चार साल से लंबित एक मामले का अब सीजेआई सूर्यकांत ने स्‍वत: संज्ञान ल‍िया है. इस मामले में 57 बार केस लिस्ट होने के बावजूद सुनवाई नहीं हुई और उससे पहले ही याच‍िका दायर करने वाली  मरीज की मौत हो गई. ऐसे में अब इस मामले पर सीजेआई ने सुओ-मोटो लिया है साथ ही उन्होंने बेहद जरूरी निर्देश भी दिए हैं.

बता दें कि मामला ब्रेस्ट कैंसर की महंगी दवा से जुड़ा है. जून 2022 में ब्रेस्ट कैंसर से जूझ रही एक महिला ने जीवन रक्षक और पेटेंटेड दवा ‘रिबोसिक्लिब’ (Ribociclib) को सस्ता करने की मांग को लेकर केरल हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी. जो केरल हाईकोर्ट में 57 बार लिस्ट कराया गया था. हालांकि केस की सुनवाई होने से पहले ही मरीज की मौत हो गई थी. अब इस मामले का सीजेआई ने स्वत: संज्ञान लिया है.

हालांक‍ि मरीज की मृत्यु के बाद भी जनहित को देखते हुए केरल हाईकोर्ट ने इसे सुओ-मोटो (स्वतः संज्ञान) जनहित याचिका के रूप में जारी रखा था. हाल ही में हाईकोर्ट ने राष्ट्रीय कैंसर संस्थानों और ड्रग्स कंट्रोलर से यह राय भी मांगी थी कि क्या ‘पाल्बोसिक्लिब’ (Palbociclib) जैसी सस्ती व पेटेंट-मुक्त दवा का इसके विकल्प के तौर पर इस्तेमाल किया जा सकता है.

हालांक‍ि मामले में लगातार देरी को देखते हुए ‘वर्किंग ग्रुप ऑन एक्सेस टू मेडिसिन्स एंड ट्रीटमेंट्स’ ने CJI को एक पत्र लिखकर तत्काल हस्तक्षेप की मांग की थी. ज‍िसके बाद सीजेआई सूर्यकांत ने इस पर स्‍वत: संज्ञान ल‍िया.

इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने केरल हाई कोर्ट को जल्द सुनवाई करने का निर्देश दिया है साथ ही कहा क‍ि सुप्रीम कोर्ट केंद्र सरकार और स्वास्थ्य मंत्रालय को नोटिस जारी करेगा. CJI ने कहा कि मामला जून 2022 से लंबित है और 58 बार सुनवाई के बावजूद फैसला नहीं हुआ.

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जीवन और स्वतंत्रता से जुड़े मामलों के समयबद्ध निपटारे के लिए पूरे देश के लिए दिशानिर्देश बनाए जाएंगे.

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प्रिया गौतमSenior Correspondent

Priya Gautam is an accomplished journalist currently working with Hindi.News18.com with over 14 years of extensive field reporting experience. Previously worked with Hindustan times group (Hindustan Hindi) and …और पढ़ें

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