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Who is Rajpal Tyagi: उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव से पहले मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का गाजियाबाद के मुरादनगर दौरा राजनीतिक रूप से खास माना जा रहा है. पूर्व कैबिनेट मंत्री और छह बार के विधायक रहे स्वर्गीय राजपाल त्यागी की प्रतिमा का अनावरण केवल श्रद्धांजलि कार्यक्रम नहीं, बल्कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश के प्रभावशाली त्यागी समाज को बड़ा राजनीतिक संदेश देने के तौर पर भी देखा जा रहा है.
गाजियाबाद: 2027 के विधानसभा चुनाव में अभी समय है, लेकिन उत्तर प्रदेश की राजनीति में सामाजिक समीकरणों को लेकर हलचल तेज हो गई है. इसी बीच मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का 17 जुलाई को गाजियाबाद के मुरादनगर दौरा राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बना हुआ है. इस दौरे में मुख्यमंत्री पूर्व कैबिनेट मंत्री और छह बार के विधायक रहे स्वर्गीय राजपाल त्यागी की प्रतिमा का अनावरण करेंगे. राजनीतिक जानकार इसे सिर्फ श्रद्धांजलि कार्यक्रम नहीं, बल्कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश के प्रभावशाली त्यागी समाज से जुड़ाव मजबूत करने की कोशिश के तौर पर भी देख रहे हैं. आइए जानते हैं आखिर कौन है राजपाल त्यागी जिनकी प्रतिमा का अनावरण करने सीएम योगी आज गाजियाबाद पहुंचेंगे.
गाजियाबाद जिले में त्यागी समाज की आबादी करीब ढाई लाख मानी जाती है. मुरादनगर, मोदीनगर और आसपास के ग्रामीण इलाकों में इस समाज का अच्छा प्रभाव है. इसके अलावा मेरठ, बागपत, मुजफ्फरनगर, शामली, हापुड़, बुलंदशहर, बिजनौर, सहारनपुर और गौतमबुद्ध नगर समेत पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कई जिलों में भी त्यागी समाज चुनावी समीकरणों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है. ऐसे में मुख्यमंत्री का यह दौरा राजनीतिक नजरिए से भी काफी अहम माना जा रहा है.
निर्दलीय विधायक से कैबिनेट मंत्री तक का सफर
उत्तर प्रदेश के बागपत जिले के मुकारी गांव में 10 जनवरी 1947 को जन्मे राजपाल त्यागी का राजनीतिक सफर काफी दिलचस्प रहा. उन्होंने 1989 में निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में पहली बार विधानसभा चुनाव जीता. इसके बाद कांग्रेस, समाजवादी पार्टी और फिर निर्दलीय रहते हुए भी उन्होंने अपनी मजबूत राजनीतिक पकड़ बनाए रखी. वर्ष 2007 में निर्दलीय चुनाव जीतने के बाद वह बहुजन समाज पार्टी में शामिल हुए और उत्तर प्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री बने. अपने लंबे राजनीतिक जीवन में वह मुरादनगर से छह बार विधायक चुने गए. इसके अलावा एक बार राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) और दो बार कैबिनेट मंत्री के रूप में भी उन्होंने जिम्मेदारी निभाई.
आज भी कायम है उनकी राजनीतिक विरासत
राजनीतिक दल बदलने के बावजूद राजपाल त्यागी की लोकप्रियता पर कोई खास असर नहीं पड़ा. वर्ष 2012 में उन्हें चुनाव में हार का सामना करना पड़ा, लेकिन 2017 में उनके बेटे अजीत पाल त्यागी भाजपा के टिकट पर चुनाव जीतकर विधानसभा पहुंचे. 2022 के चुनाव में भी भाजपा ने उन पर भरोसा जताया और मुरादनगर सीट अपने पास बरकरार रखी. इस तरह राजपाल त्यागी की राजनीतिक विरासत भाजपा के साथ आगे बढ़ती रही.
जनसेवा और सादगी के लिए भी रहे पहचान
राजनीति में आने से पहले राजपाल त्यागी ने गाजियाबाद में वकालत से अपने करियर की शुरुआत की थी. वह 1975-76 में गाजियाबाद बार एसोसिएशन के सचिव और अध्यक्ष भी रहे. अपने राजनीतिक जीवन में उन्होंने शिक्षा, सड़क, गांवों के विकास और बुनियादी सुविधाओं पर विशेष ध्यान दिया. स्थानीय लोगों के बीच उनकी पहचान सादगी, ईमानदारी और जनसेवा करने वाले नेता के रूप में रही. बीमारी के चलते 18 जुलाई 2025 को उनका निधन हो गया था.
प्रतिमा अनावरण से जाएगा बड़ा राजनीतिक संदेश
राजपाल त्यागी की प्रतिमा का अनावरण ऐसे समय हो रहा है, जब भाजपा 2027 के विधानसभा चुनाव की तैयारियों में सामाजिक संतुलन को मजबूत करने पर जोर दे रही है. पार्टी इसे समाज के सम्मान से जुड़ा कार्यक्रम बता रही है, जबकि विपक्ष इसे चुनावी रणनीति का हिस्सा मान रहा है. माना जा रहा है कि मुरादनगर का यह आयोजन सिर्फ प्रतिमा अनावरण तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश की राजनीति और त्यागी समाज को लेकर भी बड़ा संदेश देगा.
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सीमा नाथ 6 साल से मीडिया के क्षेत्र में काम कर रही हैं. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत शाह टाइम्स में रिपोर्टिंग के साथ की जिसके बाद कुछ समय उत्तरांचल दीप, न्यूज अपडेट भारत के साथ ही लोकल 18 (नेटवर्क18) में काम …और पढ़ें
