QR कोड से रिश्वत, UPI से रकम ट्रांसफर… कृषि मंत्रालय का अधिकारी बनकर करोड़ों की ठगी का खेल, CBI ने ऐसे किया गिरफ्तार

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कृषि भवन का अफसर बनकर मांगता था रिश्वत, CBI ने आगरा से दबोचा शातिर ठग

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सीबीआई ने कृषि भवन में पशुपालन और डेयरी विभाग के एक फर्जी अधिकारी को आगरा से गिरफ्तार किया है. उस पर AHIDF योजना के तहत लोन मंजूर कराने के नाम पर रिश्वत मांगने का आरोप है. आरोपी 22.50 लाख रुपये के लोन के बदले 45 हजार रुपये रिश्वत मांग रहा था. शिकायत मिलने पर CBI ने ट्रैप बिछाया और पहली किश्त के तौर पर 5 हजार रुपये QR कोड के जरिए लेते हुए पूरे नेटवर्क का खुलासा किया.

सीबीआई ने कृषि भवन में पशुपालन और डेयरी विभाग के एक फर्जी अधिकारी को आगरा से गिरफ्तार किया है.

कृषि भवन में अधिकारी होने का झांसा देकर सरकारी योजना के तहत लोन दिलाने के नाम पर रिश्वत वसूलने वाले एक शातिर ठग को सीबीआई ने गिरफ्तार कर लिया है. आरोपी खुद को पशुपालन और डेयरी विभाग का अधिकारी बताकर देशभर के लोन आवेदकों से संपर्क करता था और उनकी फाइल पास कराने के बदले मोटी रकम की मांग करता था. सीबीआई के मुताबिक, इस मामले में 29 जून को देहरादून स्थित एंटी करप्शन ब्रांच (ACB) में केस दर्ज किया गया था. उत्तराखंड स्थित उधम सिंह नगर () के एक पोल्ट्री फार्म संचालक ने इस बाबत शिकायत की थी, जिसने एसआईडीबीआई के उद्यमी मित्र पोर्टल के जरिए AHIDF (Animal Husbandry Infrastructure Development Fund) योजना के तहत 22.50 लाख रुपये के लोन के लिए आवेदन किया था.

जांच में सामने आया कि आरोपी ने शिकायतकर्ता को फोन कर खुद को कृषि भवन स्थित पशुपालन और डेयरी विभाग का अधिकारी बताया. उसने दावा किया कि यदि 22.50 लाख रुपये का लोन मंजूर कराना है तो ऋण राशि का 2 प्रतिशत, यानी 45 हजार रुपये रिश्वत देनी होगी.

सीबीआई ने शिकायत मिलने के बाद जाल बिछाया. आरोपी ने पहली किश्त के तौर पर 5 हजार रुपये क्यूआर कोड के जरिये मंगवाए. इसी डिजिटल ट्रांजैक्शन के आधार पर जांच आगे बढ़ी.

सीबीआई ने बैंक खातों और क्यूआर कोड की जांच के आधार पर पहले एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया, लेकिन पूछताछ में पता चला कि वह सिर्फ बैंक खाते उपलब्ध करा रहा था. इसके बाद जांच का फोकस मुख्य आरोपी पर गया, जो गिरफ्तारी से बचने के लिए लगातार ठिकाने बदल रहा था.

जांच में खुलासा हुआ कि आरोपी के पास AHIDF योजना के आवेदकों का डेटा मौजूद था. वह रोजाना कई आवेदकों को फोन कर उन्हें लोन रद्द होने, आवेदन खारिज होने या फाइल अटकने का डर दिखाता और फिर रिश्वत देकर काम कराने का प्रस्ताव देता था.

सीबीआई के अनुसार आरोपी रिश्वत की रकम UPI और QR कोड के जरिए अलग-अलग बैंक खातों में मंगवाता था. इसके बाद रकम को तुरंत दूसरे खातों में ट्रांसफर कर देता, ताकि लेन-देन का सीधा लिंक न मिल सके. इस तरीके से उसने लंबे समय तक लोगों को अपना शिकार बनाया.

मुख्य आरोपी की तलाश में सीबीआई ने दिल्ली, जयपुर और आगरा समेत कई स्थानों पर छापेमारी की. जांच एजेंसी ने मोबाइल कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR), बैंक खातों, आईपी एड्रेस और डिजिटल सर्विलांस की मदद से उसकी गतिविधियों पर नजर रखी.

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Saad Omar

साद बिन उमर मीडिया इंडस्ट्री में 15 साल से अधिक के अनुभव वाले सीनियर पत्रकार हैं. वह अभी News18 Hindi (hindi.news18.com) से जुड़े हैं, जहां वे होम पेज डेस्क पर काम करते हैं.

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