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Uttarakhand Police constable Sher Singh: दिल्ली के जंतर-मंतर पर सीजेपी आंदोलन के मंच से पुलिस वर्दी में इस्तीफा देने वाले उत्तराखंड पुलिस के जवान शेर सिंह (शमशेर) का मामला गरमा गया है. मंच पर छात्र नेता अभिजीत दीपके के साथ खड़े होकर उकसाने वाला भाषण देने वाले इस सिपाही की उत्तराखंड पुलिस ने पूरी पोल खोल दी है. कुमाऊं आईजी के अनुसार, शेर सिंह कोई ‘क्रांतिकारी’ नहीं, बल्कि पहले से निलंबित और आपराधिक बैकग्राउंड वाला सिपाही है. वह संगठित अपराध और जमीन कब्जे जैसे कई मामलों में लिप्त रहा है तथा सितंबर 2025 में जेल भी जा चुका है.
अभिजित दीपके के सामने इस्तीफा देने वाले सिपाही शमशेर सिंह की कहानी.
Uttarakhand Police constable Sher Singh: दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहे सीजेपी आंदोलन के मंच से उत्तराखंड पुलिस के एक सिपाही ने छात्रों के समर्थन में इस्तीफा दिया. वह मंच पर खड़े छात्र नेता अभिजीत दीपके के सामने अपनी वर्दी का तमगा हटाते हुए सार्वजनिक रूप इसका ऐलान किया है. इस वीडियो के सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद उत्तराखंड पुलिस महकमे में हड़कंप मच गई. आनन-फानन में कुमाऊं रेंज की आईजी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर इस सिपाही की क्राइम कुंडली खोल दीं. जिस सिपाही को सोशल मीडिया पर ‘सिंघम’ और ‘क्रांतिकारी’ बता रहे थे, उसकी हकीकत कुछ और है.
उत्तराखंड पुलिस के मुताबिक, जंतर-मंतर के मंच से सिस्टम के खिलाफ बातें करने वाले और इस्तीफा देने वाले इस जवान का नाम शेर सिंह (कुछ जगहों पर शमशेर सिंह) है. पुलिस अधिकारियों ने साफ किया है कि शेर सिंह कोई बागी या कर्तव्यनिष्ठ सिपाही नहीं, बल्कि महकमे से बर्खास्तगी की कगार पर खड़ा एक दागी और सस्पेंडेड कर्मी है.
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