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Sonam Wangchuk News: NEET पेपर लीक मामले में विरोध-प्रदर्शन की आग दिल्ली के बाद अब अन्य राज्यों में भी फैल चुकी है. खासकर बिहार में प्रदर्शन की तीव्रता काफी ज्यादा है. प्रदेश की राजधानी पटना से लेकर सारण, भोजपुर-आरा, औरंगाबाद, लखीसराय जैसे जिलों में हिंसक विरोध-प्रदर्शन हो रहे हैं. इन सबके बीच, 26 दिनों तक उपवास करने वाले सोनम वांगचुक ने सनसनीखेज बात कही है.
NEET पेपर लीक मामले में आमरण अनशन करने वाले सोनम वांगचुक ने कहा कि उन्हें एक वक्त लगा जैसे नॉर्थ कोरिया है. (फोटो: Reuters)
Sonam Wangchuk News: NEET पेपर लीक मामले को लेकर जारी विरोध-प्रदर्शन की आग धीरे-धीरे पूरे देश में फैल रही है. बिहार में प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच हिंसक झड़प हुई है. वहीं, दिल्ली के जंतर-मंतर पर भी छात्रों और पुलिस के बीच झड़प हो गई. हालात इतने बिगड़ गए कि RAF को आंसू गैस के गोले छोड़ने पड़े. इन सबके बीच, 26 दिनों के बाद अपना उपवास खत्म करने वाले सोनम वांगचुक ने चौंकाने वाली बात कही है. सोनम वांगचुक ने कहा कि उन्हें लगा जैसे यह नॉर्थ कोरिया है. साथ ही उन्होंने दावा किया कि सफदरजंग अस्पताल में उनके साथ एक कैदी की तरह बर्ताव किया गया.
सोनम वांगचुक ने दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में अपने साथ हुए व्यवहार को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं. 26 दिनों तक जंतर-मंतर पर नीट-यूजी पेपर लीक के विरोध में प्रदर्शन कर रहे छात्रों और कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के समर्थन में अनशन करने वाले वांगचुक ने दावा किया कि अस्पताल में उनके साथ एक कैदी जैसा व्यवहार किया गया और पूरा माहौल उन्हें उत्तर कोरिया जैसा महसूस हुआ. वांगचुक को 18 जुलाई को दिल्ली पुलिस ने जंतर-मंतर से हटाकर सफदरजंग अस्पताल में भर्ती कराया था. पुलिस ने उस समय कहा था कि मेडिकल सलाह और दिल्ली हाईकोर्ट के निर्देशों के मद्देनजर उन्हें अस्पताल ले जाया गया. शुक्रवार को अनशन समाप्त करने के बाद वांगचुक ने 24 मिनट का एक वीडियो जारी कर अस्पताल में बिताए दिनों का अपना अनुभव साझा किया.
सोनम वांगचुक क्या बोले
वीडियो में वांगचुक ने कहा कि अस्पताल किसी अस्पताल की तरह नहीं बल्कि एक छावनी और जेल जैसा लग रहा था. उन्होंने आरोप लगाया कि उन्हें कमरे से बाहर निकलने की अनुमति नहीं थी और सुरक्षा व्यवस्था इतनी कड़ी थी कि कोई भी उनसे मिलने नहीं आ सकता था. उन्होंने कहा, ‘मेरे साथ ऐसा व्यवहार किया गया जैसा शायद किसी कैदी के साथ भी नहीं किया जाता.’ वांगचुक के अनुसार, उन्हें अपने परिजनों, मित्रों या समर्थकों से मिलने की इजाजत नहीं दी गई. उन्होंने आरोप लगाया कि उनका मोबाइल फोन और लैपटॉप भी अपने पास रखने नहीं दिया गया, जिसके कारण वे किसी से संपर्क नहीं कर पा रहे थे. उनका कहना था कि संदेश भेजने का एकमात्र तरीका कागज के छोटे-छोटे टुकड़ों पर लिखकर किसी तरह बाहर पहुंचाना था, जो बेहद कठिन था.
लगा जैसे उत्तर कोरिया हो
सोनम वांगचुक ने यह भी दावा किया कि लंदन से उनसे मिलने आए उनके रिश्तेदारों और दोस्तों को भी अस्पताल में प्रवेश नहीं करने दिया गया. वांगचुक ने कहा कि यह पूरी प्रक्रिया गैरकानूनी थी और उन्हें ऐसा महसूस हुआ मानो वे किसी लोकतांत्रिक देश में नहीं बल्कि उत्तर कोरिया जैसे तंत्र में रह रहे हों. वांगचुक ने यह भी आरोप लगाया कि दिल्ली हाईकोर्ट द्वारा उन्हें निजी अस्पताल ले जाने की अनुमति दिए जाने के बावजूद उन्हें तुरंत अस्पताल से नहीं जाने दिया गया. उनके मुताबिक अधिकारियों ने यह कहते हुए उन्हें रोके रखा कि अदालत का लिखित आदेश अभी तक प्राप्त नहीं हुआ है. उन्होंने आरोप लगाया कि आदेश दोपहर में जारी होने के बावजूद उसे शाम तक रोके रखा गया, जिससे उनकी रिहाई में देरी हुई.
