किताबों का खजाना है दिल्ली की ये लाइब्रेरी, मनमोहन सिंह ने यहीं की थी पढ़ाई, देखें अनदेखी Photos

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किताबों का खजाना है दिल्ली की ये लाइब्रेरी, मनमोहन सिंह ने यहीं की थी पढ़ाई

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Delhi Ratan Tata Library: दिल्ली के अंदर एक ऐसी लाइब्रेरी है, जो ऐतिहासिक है. यह लाइब्रेरी दिल्ली यूनिवर्सिटी का हिस्सा है और इस लाइब्रेरी के बारे में जानकर आप हैरान हो जाएंगे. क्योंकि देश के पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से लेकर कई बड़े अर्थशास्त्रियों ने यहां बैठकर पढ़ाई की है. इस लाइब्रेरी के सदस्य भी रहे हैं. इस लाइब्रेरी को अर्थशास्त्रियों का गढ़ कहा जाता है. देखें फोटो

आज यहां जिस लाइब्रेरी की बात हो रही है. इसका नाम रतन टाटा लाइब्रेरी है. जो कि दिल्ली के नॉर्थ कैंपस में स्थित है. यह लाइब्रेरी देश की सबसे प्रतिष्ठित सामाजिक विज्ञान लाइब्रेरियों में से एक मानी जाती है. यह दिल्ली स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स (DSE) जोकि दिल्ली विश्वविद्यालय का हिस्सा है और अर्थशास्त्र, समाजशास्त्र, भूगोल, वाणिज्य और सार्वजनिक नीति के शोधार्थियों के लिए एक प्रमुख शोध केंद्र है.

आपको जानकर हैरानी होगी कि यह लाइब्रेरी जी भवन के अंदर स्थित है, उस भवन का उद्घाटन 18 जनवरी 1956 को भारत के प्रधानमंत्री और दिल्ली स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स सोसाइटी के अध्यक्ष पंडित जवाहरलाल नेहरू ने किया था. 1949 में प्रोफेसर वी.के.आर.वी. राव ने दिल्ली स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स की स्थापना की. उसी वर्ष इसके साथ इस पुस्तकालय की भी शुरुआत हुई थी.

यही नहीं, इस लाइब्रेरी के बारे में दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रोफेसर और दूसरे सदस्यों से बात करने पर पता चला कि शुरुआती वर्षों में रतन टाटा ट्रस्ट ने इस लाइब्रेरी के विकास के लिए एक लाख का दान दिया था. इसी योगदान के सम्मान में इसका नाम रतन टाटा लाइब्रेरी रखा गया. लाइब्रेरी के प्रारंभिक विकास और संग्रह को व्यवस्थित करने की जिम्मेदारी प्रो. बी.एन. गांगुली ने संभाली थी.

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आज भी यह लाइब्रेरी देखने में बेहद खूबसूरत लगती है. हालांकि इसमें प्रवेश हर कोई नहीं कर सकता है. यहां वही कर सकता है, जिसके पास डिजिटल कार्ड होगा. डिजिटल कार्ड वाले ही इस लाइब्रेरी के अंदर प्रवेश कर सकते हैं और पढ़ाई कर सकते हैं. जानकारी के मुताबिक शुरुआत में दिल्ली स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स एक स्वायत्त संस्था थी. 1957 में इसका प्रशासन पूरी तरह दिल्ली विश्वविद्यालय ने अपने हाथ में ले लिया और रतन टाटा लाइब्रेरी भी आधिकारिक रूप से दिल्ली यूनिवर्सिटी का हिस्सा बन गई.

1980 में रतन टाटा ट्रस्ट ने लाइब्रेरी के विस्तार के लिए दो लाख की मदद की थी. इन पैसों से लाइब्रेरी का नया एनेक्सी ब्लॉक बनाया गया. जो कि 1986 में पूरा हुआ. यहां पर दो लाख से अधिक किताबें हैं. 1.3 लाख से अधिक बाउंड जर्नल वॉल्यूम और संयुक्त राष्ट्र और अन्य अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं के लगभग 30,000 प्रकाशनों का महत्वपूर्ण संग्रह यहां पर है. केंद्र और राज्य सरकारों की 40,000 से अधिक रिपोर्टें और आयोगों के दस्तावेज हैं. 1,600 से अधिक पीएचडी थीसिस और लगभग 40,000 ई-जर्नल और अनेक ऑनलाइन शोध डेटाबेस हैं.

इस लाइब्रेरी का उपयोग भारत के कई बड़े अर्थशास्त्रियों, नीति-निर्माताओं और शिक्षाविदों ने किया है. अमर्त्य कुमार सेन जोकि अर्थशास्त्री हैं और नोबेल पुरस्कार विजेता अर्थशास्त्री, जिन्होंने दिल्ली स्कूल ऑफ़ इकोनॉमिक्स में अध्ययन और अध्यापन दोनों किया. इसके अलावा देश के पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह यहां न केवल छात्र रहे बल्कि शिक्षक भी रहे. इसके अलावा जगदीश नटवरलाल भगवती एक भारतीय अर्थशास्त्री हैं और कौशिक बसु जो कि एक जाना माना नाम है. वह भी यहां के स्टूडेंट और शिक्षक दोनों ही रहे.

यही नहीं, सुखमय चक्रवर्ती जो कि प्रसिद्ध अर्थशास्त्री हैं और उनकी स्मृति में रतन टाटा लाइब्रेरी में एक विशेष स्टडी रूम भी स्थापित किया गया है. कक्कड़न नंदनाथ राज (13 मई 1924-10 फरवरी 2010) एक भारतीय अर्थशास्त्री थे. भारत की आर्थिक नीतियों के प्रमुख विशेषज्ञ रहे उनका नाम भी इस लाइब्रेरी से जुड़ा हुआ है.

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