गाजियाबाद: हरिद्वार से गंगाजल लेकर लौट रहे लाखों कांवड़ियों के बीच एक ऐसी कांवड़ भी लोगों का ध्यान अपनी ओर खींच रही है, जिसे देखकर हर कोई भावुक हो जा रहा है. यह सिर्फ आस्था की यात्रा नहीं, बल्कि एक पोते का अपनी दादी के प्रति प्रेम, सम्मान और सेवा का अनोखा उदाहरण है. दिल्ली के 23 वर्षीय अरविंद प्रजापति अपनी 12वीं कांवड़ यात्रा पर हैं, लेकिन इस बार उनकी कांवड़ सबसे खास है. दरअसल, कांवड़ के एक तरफ 72 वर्षीय दादी बैठी हैं और दूसरी तरफ उनके बराबर यानी 41 लीटर गंगाजल, करीब 82 किलो वजन कंधों पर उठाकर अरविंद हरिद्वार से दिल्ली तक लगभग 250 किलोमीटर की यात्रा पूरी कर रहे हैं.
दादी को कांवड़ में बैठाकर निकले अरविंद
दिल्ली के आकाश नगर निवासी 23 वर्षीय अरविंद प्रजापति इस समय गाजियाबाद से होकर अपनी कांवड़ यात्रा पर आगे बढ़ रहे हैं. उन्होंने बताया कि यह उनकी लगातार 12वीं कांवड़ यात्रा है, लेकिन इस बार उन्होंने अपने वर्षों पुराने सपने को पूरा करने का फैसला किया. उनका सपना था कि वह अपनी दादी को तीर्थ यात्रा कराएं. उनका मानना है कि कांवड़ यात्रा से बड़ा और पवित्र तीर्थ कोई नहीं हो सकता. इसलिए उन्होंने इस बार अपनी दादी को कांवड़ में बैठाकर हरिद्वार से दिल्ली तक लाने का संकल्प लिया.
एक तरफ दादी तो दूसरी तरफ 41 लीटर गंगाजल
अरविंद ने बताया कि उनकी कांवड़ के एक ओर 72 वर्षीय दादी बैठी हैं, जिनका वजन करीब 41 किलोग्राम है, जबकि दूसरी ओर 41 लीटर गंगाजल रखा हुआ है. दोनों तरफ बराबर वजन होने से संतुलन बना रहता है. इस तरह करीब 82 किलो का भार अपने कंधों पर लेकर वह पूरी यात्रा कर रहे हैं. उन्होंने बताया कि यह यात्रा आसान नहीं है, लेकिन दादी के चेहरे की खुशी उन्हें हर कदम पर नई ताकत देती है.
रोजाना 10 किलोमीटर पैदल चल रहे अरविंद
अरविंद 9 जुलाई को दिल्ली से हरिद्वार के लिए रवाना हुए थे. 10 जुलाई को हरिद्वार से गंगाजल भरकर उन्होंने अपनी यात्रा शुरू की. वह रोजाना करीब 10 किलोमीटर चलते हैं. सुबह और शाम के समय पैदल यात्रा करते हैं, जबकि दोपहर और रात में आराम करते हैं. उनका लक्ष्य 10 अगस्त तक दिल्ली के आकाश नगर पहुंचना है. इसके बाद 11 अगस्त को शिवालय में गंगाजल अर्पित कर अपनी कांवड़ यात्रा पूरी करेंगे.
दादी ने भी पूरे उत्साह से स्वीकार की यात्रा
अरविंद ने बताया कि जब उन्होंने अपनी दादी को इस अनोखी तीर्थ यात्रा के बारे में बताया तो उनकी आंखों में खुशी छलक आई. दादी बिना किसी हिचकिचाहट के इस यात्रा के लिए तैयार हो गईं. उम्र भले ही 72 वर्ष हो, लेकिन उनका हौसला किसी युवा से कम नहीं है. पूरे रास्ते वह अपने पोते का हौसला बढ़ाती रहती हैं और भगवान शिव का नाम जपते हुए यात्रा का आनंद ले रही हैं.
दादी के लिए खास बना दी कांवड़ यात्रा
अरविंद का बचपन से ही अपनी दादी के साथ बेहद गहरा रिश्ता रहा है. वह हमेशा दादी के सबसे लाडले रहे हैं. यही वजह है कि उन्होंने इस बार कांवड़ यात्रा को सिर्फ धार्मिक आस्था तक सीमित नहीं रखा, बल्कि इसे अपनी दादी की जीवनभर की यादगार तीर्थ यात्रा बना दिया. उनकी यह अनोखी कांवड़ जहां भी पहुंच रही है, लोग रुककर उन्हें देख रहे हैं, तस्वीरें खींच रहे हैं और पोते के इस समर्पण को दिल से सलाम कर रहे हैं.
