Inspiring Story: जिसका चेहरा देखते ही चिल्लाते थे लोग, अब वही छात्रा IAS बनने का देख रही सपना

Inspiring Story:दिल्ली विश्वविद्यालय के लेडी श्रीराम कॉलेज (LSR)का हॉस्टल चार साल तक चले नवीनीकरण के बाद दोबारा खुल गया है. इसके साथ ही करीब 100 नए और आधुनिक कमरे फिर से छात्राओं के लिए उपलब्ध हो गए हैं जिनमें लगभग 150 छात्राएं रह सकेंगी.यह हॉस्टल सिर्फ रहने की जगह नहीं है, बल्कि उन छात्राओं के लिए नई उम्मीद बनकर सामने आया है जो आर्थिक तंगी, दिव्यांगता या लंबी दूरी की वजह से पढ़ाई में मुश्किलों का सामना कर रही थीं.हर साल कॉलेज में पहले वर्ष की करीब 700 छात्राएं हॉस्टल के लिए आवेदन करती हैं. इस बार कॉलेज ने दिव्यांग (PwD) श्रेणी की दूसरे और तीसरे वर्ष की छात्राओं के लिए भी हॉस्टल की सुविधा बढ़ाई है.

एसिड अटैक सर्वाइवर को मिली बड़ी राहत

इस हॉस्टल का सबसे बड़ा फायदा दूसरे वर्ष की पॉलिटिकल साइंस की छात्रा कैफी चौधरी को मिला है.टाइम्‍स ऑफ इंडिया में छपी रिपोर्ट के मुताबिक वह एक एसिड अटैक सर्वाइवर हैं. पहले साल उन्हें मजबूरी में एक पेइंग गेस्ट (PG) में रहना पड़ा था.अब हॉस्टल मिलने के बाद उन्होंने कहा कि इससे न सिर्फ उनका आर्थिक बोझ कम हुआ है, बल्कि मानसिक रूप से भी उन्हें काफी राहत मिली है. कैफी ने बताया कि हॉस्टल की सुविधाएं उनके पहले वाले पीजी से कहीं बेहतर हैं और अब वह बिना किसी चिंता के अपनी पढ़ाई पर पूरा ध्यान दे सकती हैं.

छात्राओं के लिए खास सुविधाएं

एसिड अटैक की वजह से काफी अपनी आंखों की रोशनी खो चुकी हैं. जब वह इस सप्ताह पहली बार अपने नए हॉस्टल के कमरे में पहुंचीं तो उन्होंने इसे अपने लिए बेहद खास पल बताया.उन्होंने कहा कि यहां का खाना घर जैसा लगता है और पूरी बिल्डिंग को दिव्यांग छात्राओं की जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है.हॉस्टल में हर जगह रैंप बनाए गए हैं, जिससे व्हीलचेयर या अन्य दिव्यांग छात्राओं को आने-जाने में परेशानी नहीं होती. इसके अलावा कमरों के नंबर ब्रेल लिपि में भी लिखे गए हैं जिससे दृष्टिबाधित छात्राओं को अपने कमरे पहचानने में आसानी होती है.

सिर्फ तीन साल की उम्र में हुआ एसिड अटैक

कैफी की जिंदगी बचपन से ही संघर्षों से भरी रही है. साल 2011 में होली के दौरान जब वह सिर्फ तीन साल की थीं तब उन पर एसिड से हमला कर दिया गया.इस हमले में उनकी आंखों की रोशनी चली गई और उन्हें लंबे समय तक इलाज और कई मेडिकल प्रक्रियाओं से गुजरना पड़ा.उन्होंने बताया कि शुरुआती इलाज हमले के तुरंत बाद हुआ था, लेकिन डॉक्टरों ने कहा था कि कई रिकंस्ट्रक्टिव सर्जरी 18 साल की उम्र के बाद ही हो पाएंगी.अब 18 साल की होने के बाद इस साल उनकी दो छोटी सर्जरी हो चुकी हैं, लेकिन अभी भी इलाज का सफर बाकी है. कैफी ने 12वीं में 95.7% हासिल करके स्‍कूल में टॉप किया था.

नहीं छोड़ा IAS बनने का सपना

इतनी बड़ी घटना के बाद भी काफी ने अपने सपनों को कभी नहीं छोड़ा.स्कूल के दिनों से ही उनका सपना दिल्ली विश्वविद्यालय में पढ़ने और आगे चलकर IAS अधिकारी बनने का रहा है.अब हॉस्टल मिलने के बाद उनका कहना है कि वह पूरी तरह अपनी पढ़ाई और सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी पर ध्यान दे सकेंगी.

लोगों की बातें सुनकर होता था दुख

काफी बताती हैं कि एसिड अटैक के बाद उनका आत्मविश्वास काफी प्रभावित हुआ था. वह लोगों से ज्यादा बातचीत नहीं करती थीं क्योंकि उन्हें खुद को लेकर हीन भावना महसूस होती थी.उन्होंने बताया कि कई बार ऐसा भी हुआ जब लोग उन्हें देखकर घबरा जाते थे या जोर से चिल्ला उठते थे. ऐसे अनुभव उनके लिए बेहद तकलीफदेह थे लेकिन दिल्ली विश्वविद्यालय आने के बाद उनकी सोच बदलने लगी. टीओआई से बातचीत में कैफी ने बताया कि दिल्ली विश्वविद्यालय का माहौल उनकी उम्मीद से कहीं ज्यादा सकारात्मक निकला.उन्हें यहां ऐसे छात्र-छात्राएं मिले जो दिव्यांगता को बेहतर तरीके से समझते हैं और सभी को समान सम्मान देते हैं. इसी वजह से उनका आत्मविश्वास पहले से काफी बढ़ा है.

क्यों खास है यह हॉस्टल

LSR की प्रिंसिपल कनिका के.आहूजा ने कहा कि यह हॉस्टल सिर्फ एक इमारत नहीं है, बल्कि कई छात्राओं के भविष्य को मजबूत करने वाला कदम है.उन्होंने बताया कि इस हॉस्टल से आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS), ओबीसी और दिव्यांग श्रेणी की छात्राओं को सुरक्षित और बेहतर रहने की सुविधा मिलेगी.

कैफी के लिए खुद किया था इंतजार

प्रिंसिपल ने बताया कि पिछले साल कैफी लगातार उन्हें हॉस्टल के लिए पत्र लिखती थीं. उस समय हॉस्टल बंद होने के कारण उन्हें कहीं और रहने की व्यवस्था कराने की कोशिश भी की गई, लेकिन यह संभव नहीं हो पाया.जब इस साल दूसरे और तीसरे वर्ष की दिव्यांग छात्राओं के लिए हॉस्टल खोलने का फैसला हुआ तो सबसे पहले उन्हें कैफी की याद आई. उन्होंने तुरंत कैफी को आवेदन करने की जानकारी देने के निर्देश दिए.आज कैफी को हॉस्टल में खुशी-खुशी रहते देखकर उन्हें बेहद संतोष महसूस हो रहा है.

नए भविष्य की शुरुआत

LSR का नया हॉस्टल उन छात्राओं के लिए सिर्फ एक आवास नहीं है, बल्कि यह पढ़ाई, आत्मनिर्भरता और बेहतर भविष्य की दिशा में एक मजबूत कदम है.कैफी चौधरी जैसी छात्राओं की कहानी यह साबित करती है कि अगर सही माहौल और सहयोग मिले तो कठिन से कठिन परिस्थितियों में भी सपनों को सच किया जा सकता है.

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