पिता ने डेब्यू टेस्ट में बनाए 0-0, बेटे ने 171 की पारी के साथ किया आगाज, एक घर से निकली दो क्रिकेटर्स की अनोखी कहानी

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पिता ने डेब्यू टेस्ट में बनाए 0-0, बेटे ने 171 की पारी के साथ किया आगाज

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cricket record: न्यूज़ीलैंड क्रिकेट के इतिहास में ‘रदरफोर्ड’ एक ऐसा नाम है, जो एक बेहद अनोखे और ऐतिहासिक रिकॉर्ड के लिए जाना जाता है. जहाँ एक तरफ पिता अपने डेब्यू मैच में दोनों पारियों में खाता खोलने के लिए तरस गया, वहीं 27 साल बाद उसी के बेटे ने अपने पहले ही टेस्ट में रनों का ऐसा पहाड़ खड़ा कर दिया कि दुनिया देखती रह गई.

डेब्यू टेस्ट में पिता-पुत्र के नाम पर अनोखा रिकॉर्ड, जो कभी नहीं टूटेगा

नई दिल्ली. क्रिकेट के मैदान पर हर रोज कोई ना कोई किस्से बनते है और कहानी लिखी जाती है. कुछ स्टोरीज को याद करके चेहरे पर मुस्कान आती है तो कुछ को याद करके आंखे भर आती है है. एक ऐसी ही कहानी है जो एक घर से निकलती है पर दोनों का अंत अलग अलग होता है. न्यूजीलैंड की धरती से शुरु हुई दो क्रिकेटर्स की कहानी आज भी लोगों के लिए एक मिसाल है .

न्यूज़ीलैंड क्रिकेट के इतिहास में ‘रदरफोर्ड’ एक ऐसा नाम है, जो एक बेहद अनोखे और ऐतिहासिक रिकॉर्ड के लिए जाना जाता है. जहाँ एक तरफ पिता अपने डेब्यू मैच में दोनों पारियों में खाता खोलने के लिए तरस गया, वहीं 27 साल बाद उसी के बेटे ने अपने पहले ही टेस्ट में रनों का ऐसा पहाड़ खड़ा कर दिया कि दुनिया देखती रह गई. यह कहानी है न्यूज़ीलैंड के पूर्व कप्तान केन रदरफोर्ड और उनके बेटे हामिश रदरफोर्ड की, जो क्रिकेट इतिहास की सबसे दिलचस्प पिताओं और पुत्रों की जोड़ियों में से एक हैं.

पिता का डरावना डेब्यू: दोनों पारियों में ‘शून्य’

बात साल 1985 की है, जब न्यूज़ीलैंड की टीम वेस्टइंडीज के दौरे पर थी. उस समय वेस्टइंडीज के पास मैल्कम मार्शल, जोएल गार्नर और माइकल होल्डिंग जैसे दुनिया के सबसे खतरनाक तेज गेंदबाजों की चौकड़ी थी. 19 साल के युवा बल्लेबाज केन रदरफोर्ड को वेस्टइंडीज की इस आग उगलती पिचों पर अपना टेस्ट डेब्यू करने का मौका मिला. बल्लेबाजी के लिए परिस्थितियां नरक जैसी थीं. केन रदरफोर्ड पहली पारी में बिना खाता खोले (0) पवेलियन लौट गए. उम्मीद थी कि वह दूसरी पारी में वापसी करेंगे, लेकिन वेस्टइंडीज के तेज गेंदबाजों ने उन्हें दोबारा शून्य (0) पर ही आउट कर दिया. अपने पहले ही टेस्ट मैच की दोनों पारियों में ‘पेयर’ (दो बार शून्य) बनाना किसी भी बल्लेबाज के करियर का सबसे डरावना सपना हो सकता है. हालांकि, केन ने हिम्मत नहीं हारी और बाद में न्यूज़ीलैंड के एक शानदार बल्लेबाज और कप्तान बने.

बेटे की ऐतिहासिक वापसी: डेब्यू में 171 रन

पिता के इस अनचाहे रिकॉर्ड के ठीक 28 साल बाद, मार्च 2013 में उनके बेटे हामिश रदरफोर्ड को इंग्लैंड के खिलाफ डुनेडिन में अपना टेस्ट डेब्यू करने का मौका मिला. पूरा रदरफोर्ड परिवार दुआ कर रहा था कि हामिश के साथ वह न हो, जो उनके पिता के साथ हुआ था. हामिश ने न सिर्फ अपने पिता के उस डरावने इतिहास को पीछे छोड़ा, बल्कि इंग्लैंड के गेंदबाजी आक्रमण की धज्जियां उड़ा दीं. उन्होंने अपने पहले ही टेस्ट मैच में शानदार बल्लेबाजी करते हुए 171 रनों की विस्फोटक पारी खेली. इस पारी में उन्होंने 22 चौके और 3 शानदार छक्के लगाए. यह टेस्ट इतिहास में किसी भी कीवी बल्लेबाज द्वारा डेब्यू पर बनाया गया दूसरा सबसे बड़ा स्कोर था.

रदरफोर्ड परिवार की यह कहानी क्रिकेट जगत में हमेशा याद की जाती है. जहाँ पिता के नाम डेब्यू मैच में 0 और 0 का दर्दनाक रिकॉर्ड दर्ज हुआ, वहीं बेटे ने पहली ही पारी में 171 रन बनाकर उस दर्द को हमेशा के लिए एक गौरवमयी इतिहास में बदल दिया. खुद केन रदरफोर्ड उस वक्त कमेंट्री बॉक्स में मौजूद थे जब उनका बेटा शतक बना रहा था, और एक पिता के तौर पर उनकी आँखों में गर्व के आंसू थे. खेल का यही वो जादू है जो पीढ़ियों की कहानियों को अमर बना देता है.

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Rajeev MishraAssociate editor

राजीव मिश्रा, खेल पत्रकारिता में एक जाना पहचाना चेहरा है जो अपनी बेबाक विशलेषण के लिए जाने जाते है. वर्तमान में नेटवर्क 18 में एसोसिएट स्पोर्ट्स एडिटर के रूप में कार्यरत हूँ. इस भूमिका में मैं डिजिटल स्पोर्ट्स …

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