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गाजियाबाद के जलेश्वर महादेव मंदिर से जुड़ी सबसे अनोखी मान्यता यहां मौजूद प्राचीन पीपल के पेड़ से जुड़ी है. बताया जाता है कि इस पेड़ पर वर्षों से नाग-नागिन का एक जोड़ा निवास करता है. आज भी मंदिर में चढ़ाया जाने वाला जल और दूध सबसे पहले इसी पीपल के पेड़ पर अर्पित किया जाता है स्थानीय लोगों और श्रद्धालुओं का विश्वास है कि नाग-नागिन का यह जोड़ा दो बार मंदिर की शिवलिंग पर दर्शन करने आता है और फिर वापस उसी पीपल के पेड़ पर लौट जाता है यही वजह है कि इस परंपरा का आज भी पूरी श्रद्धा के साथ पालन किया जाता है.
गाजियाबादः सावन का पवित्र महीना भगवान शिव की आराधना के लिए सबसे शुभ माना जाता है. मान्यता है कि इस दौरान सच्चे मन से महादेव की पूजा करने और उनके प्राचीन मंदिरों के दर्शन करने से मनोकामनाएं पूरी होती हैं. यही वजह है कि इन दिनों शिवालयों में सुबह से लेकर देर रात तक श्रद्धालुओं की लंबी कतारें देखने को मिल रही हैं. अगर आप भी इस सावन किसी ऐसे मंदिर की तलाश में हैं, जहां आस्था के साथ अनोखी मान्यताएं भी जुड़ी हों तो गाजियाबाद के गोविंदपुरम स्थित संकट मोचन जलेश्वर महादेव मंदिर जरूर पहुंचिए. यह मंदिर अपनी धार्मिक मान्यताओं, प्राकृतिक शिवलिंग और संतान प्राप्ति की आस्था के कारण दूर-दूर तक प्रसिद्ध है.
जल संरक्षण का देते हैं संदेश
गोविंदपुरम में स्थित संकट मोचन जलेश्वर महादेव मंदिर वर्षों पुराना आस्था का केंद्र है. यहां आने वाले श्रद्धालु भगवान शिव से सुख-समृद्धि, अच्छे स्वास्थ्य और परिवार की खुशहाली की कामना करते हैं. खास बात यह है कि इस मंदिर में केवल व्यक्तिगत सुख-समृद्धि ही नहीं बल्कि धरती पर लगातार घटते जलस्तर और जल संकट से मुक्ति की प्रार्थना भी की जाती है. श्रद्धालुओं का मानना है कि भगवान जलेश्वर महादेव जल के संरक्षण का संदेश भी देते हैं और प्रकृति की रक्षा के लिए लोगों को प्रेरित करते हैं.
मंदिर के पुजारी पंडित ओमप्रकाश शास्त्री ने बताया कि कई वर्ष पहले यहां केवल एक प्राचीन पीपल का पेड़ हुआ करता था. उसी पेड़ के नीचे हनुमान जी की प्रतिमा स्थापित थी समय के साथ यहां भव्य मंदिर का निर्माण कराया गया और इसका नाम संकट मोचन जलेश्वर महादेव मंदिर रखा गया. भगवान शिव को जल का देवता माना जाता है इसलिए इस मंदिर का नाम जलेश्वर रखा गया है.
पीपल के पेड़ पर निवास करते हैं नाग नागिन
मंदिर से जुड़ी सबसे अनोखी मान्यता यहां मौजूद प्राचीन पीपल के पेड़ से जुड़ी है. बताया जाता है कि इस पेड़ पर वर्षों से नाग-नागिन का एक जोड़ा निवास करता है. आज भी मंदिर में चढ़ाया जाने वाला जल और दूध सबसे पहले इसी पीपल के पेड़ पर अर्पित किया जाता है स्थानीय लोगों और श्रद्धालुओं का विश्वास है कि नाग-नागिन का यह जोड़ा दो बार मंदिर की शिवलिंग पर दर्शन करने आता है और फिर वापस उसी पीपल के पेड़ पर लौट जाता है यही वजह है कि इस परंपरा का आज भी पूरी श्रद्धा के साथ पालन किया जाता है. इस मंदिर की एक और विशेषता यहां स्थापित शिवलिंग है श्रद्धालुओं का कहना है कि शिवलिंग पर प्राकृतिक रूप से अखंड भारत का नक्शा और ॐ का स्वरूप दिखाई देता है जिसे किसी व्यक्ति ने नहीं बनाया है यही कारण है कि यह शिवलिंग श्रद्धालुओं के बीच विशेष आकर्षण का केंद्र बनी हुई है.
दंपत्ति को मिलती है संतान सुख
मंदिर को लेकर एक और गहरी आस्था प्रचलित है. मान्यता है कि जिन दंपतियों को संतान सुख प्राप्त नहीं होता वे यदि यहां सच्चे मन से भगवान जलेश्वर महादेव की पूजा-अर्चना करें और आशीर्वाद लें तो उनकी मनोकामना पूरी होती है. इसी विश्वास के साथ हर वर्ष सावन के महीने में बड़ी संख्या में दंपति यहां पहुंचते हैं गाजियाबाद के अलावा दिल्ली, नोएडा, हापुड़, मेरठ और आसपास के कई जिलों से भी श्रद्धालु इस मंदिर में दर्शन के लिए आते हैं सावन के इस पावन अवसर पर जलेश्वर महादेव मंदिर आस्था, विश्वास और सनातन परंपरा का ऐसा केंद्र बना हुआ है जहां हर श्रद्धालु अपनी श्रद्धा के साथ भगवान शिव के चरणों में शीश झुकाता नजर आता है.
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